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विदेश में शिक्षा के नाम पर 15 लाख की ठगी
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गुरुग्राम। विदेश में शिक्षा दिलाने के नाम पर एक कंसल्टेंसी द्वारा युवक से 15 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित ने सीजेएम (चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट) अनिल कौशिक को पत्र लिखकर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस को निर्देश देने व राशि रिफंड कराने की मांग की है।
पीड़ित विवेक शर्मा ने सीजेएम को लिखे पत्र में बताया कि वह विदेश से अच्छी शिक्षा लेना चाहते थे। इसके लिए वह एक कंसलटेंट की तलाश में थे। दिसंबर 2018 में उन्होंने यूनि असिस्ट एजुटेक प्राइवेट लिमिटेड (बाद में यूनिफैक्ट प्राइवेट लिमिटेड हो गई) नामक कंसलटेंसी के संचालक रणदीप घोषाल से मुलाकात की। रणदीप ने जर्मनी के एक विश्वविद्यालय में उनका दाखिला कराने की बात कही, जिसके खर्च का लाखों का ब्योरा पेश कर दिया। इसी क्रम में फरवरी 2020 में वीजा दिलाने के बाद आरोपी ने उनसे विश्वविद्यालय से ऑफर लेटर दिलवाने के नाम पर 4 लाख रुपये की मांग की। इस पर विवेक ने आरोपी को मार्च के प्रथम सप्ताह में पहली किस्त के तौर पर 1 लाख 93 हजार रुपये दे दिए। 17 मार्च 2020 को उन्होंने बचे हुए 2 लाख 7 हजार रुपये भी जमा कर दिए।
लॉकडाउन के कारण 7 माह तक लंबित रहा मामला :
इसी बीच 22 मार्च को कोरोना के कारण पूरे देश में लॉकडाउन लग गया। बाद में कोरोना का व्यापक असर होने के चलते आगे की प्रक्रिया सितंबर 2020 तक पूरी नहीं हो सकी। सितंबर में पीड़ित ने आरोपी से ऑफर लेटर के बारे में पूछा तो उसने बताया कि कोविड के कारण देरी हुई है लेकिन अब ऑफर लेटर के लिए विश्वविद्यालय को पैसे जमा करा दिए गए हैं। खुद के साथ धोखाधड़ी की आशंका में विवेक ने आरोपी से विश्वविद्यालय के बारे में जानकारी मांगी लेकिन आरोपी ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी। पीड़ित के मुताबिक आरोपी अब तक अलग-अलग किस्तों में उनसे 15 लाख 25 हजार रुपये ले चुका है जबकि विश्वविद्यालय के ऑफर लेटर का कोई पता नहीं है। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी ने सिर्फ उनके साथ ही नहीं कई अन्य लोगों के साथ विदेश के शिक्षण संस्थानों में दाखिला दिलाने के नाम पर ठगी कर चुका है।
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पीड़ित विवेक शर्मा ने सीजेएम को लिखे पत्र में बताया कि वह विदेश से अच्छी शिक्षा लेना चाहते थे। इसके लिए वह एक कंसलटेंट की तलाश में थे। दिसंबर 2018 में उन्होंने यूनि असिस्ट एजुटेक प्राइवेट लिमिटेड (बाद में यूनिफैक्ट प्राइवेट लिमिटेड हो गई) नामक कंसलटेंसी के संचालक रणदीप घोषाल से मुलाकात की। रणदीप ने जर्मनी के एक विश्वविद्यालय में उनका दाखिला कराने की बात कही, जिसके खर्च का लाखों का ब्योरा पेश कर दिया। इसी क्रम में फरवरी 2020 में वीजा दिलाने के बाद आरोपी ने उनसे विश्वविद्यालय से ऑफर लेटर दिलवाने के नाम पर 4 लाख रुपये की मांग की। इस पर विवेक ने आरोपी को मार्च के प्रथम सप्ताह में पहली किस्त के तौर पर 1 लाख 93 हजार रुपये दे दिए। 17 मार्च 2020 को उन्होंने बचे हुए 2 लाख 7 हजार रुपये भी जमा कर दिए।
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लॉकडाउन के कारण 7 माह तक लंबित रहा मामला :
इसी बीच 22 मार्च को कोरोना के कारण पूरे देश में लॉकडाउन लग गया। बाद में कोरोना का व्यापक असर होने के चलते आगे की प्रक्रिया सितंबर 2020 तक पूरी नहीं हो सकी। सितंबर में पीड़ित ने आरोपी से ऑफर लेटर के बारे में पूछा तो उसने बताया कि कोविड के कारण देरी हुई है लेकिन अब ऑफर लेटर के लिए विश्वविद्यालय को पैसे जमा करा दिए गए हैं। खुद के साथ धोखाधड़ी की आशंका में विवेक ने आरोपी से विश्वविद्यालय के बारे में जानकारी मांगी लेकिन आरोपी ने इस बारे में कोई जानकारी नहीं दी। पीड़ित के मुताबिक आरोपी अब तक अलग-अलग किस्तों में उनसे 15 लाख 25 हजार रुपये ले चुका है जबकि विश्वविद्यालय के ऑफर लेटर का कोई पता नहीं है। शिकायतकर्ता के मुताबिक आरोपी ने सिर्फ उनके साथ ही नहीं कई अन्य लोगों के साथ विदेश के शिक्षण संस्थानों में दाखिला दिलाने के नाम पर ठगी कर चुका है।
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