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देश को जोड़ना सिखाती हैं भारतीय भाषाएं : कोविंद

Mon, 31 Jul 2023 12:04 AM IST
नोएडा ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम Updated Mon, 31 Jul 2023 12:04 AM IST
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Former President reached the culture festival of India International Cultural Center
भारत अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र के संस्कृति महोत्सव में पहुंचे पूर्व राष्ट्रपति
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संवाद न्यूज एजेंसी

गुरुग्राम। पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने कहा है कि भारत की सभी भाषाएं समाज को एकता के सूत्र में जोड़ने का कार्य करती हैं। आज भारतीय भाषाओं की स्वाभाविक सांस्कृतिक एकता के सूत्र को उजागर कर दुनिया में उसके प्रसार प्रचार की जरूरत है। पूर्व राष्ट्रपति कोविंद रविवार को गुरुग्राम में बनने वाले भारत अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक केंद्र के शिलान्यास संस्कृति महोत्सव में मुख्य अतिथि के रूप में बोल रहे थे। उन्होंने संस्कृति की संवाहक भारतीय भाषाएं विषय पर अपने संबोधन में कहा कि भारत केवल प्राचीन सभ्यता के लिए ही नहीं अपितु अपनी संस्कृति और भाषाई संस्कृति के लिए भी जाना जाता है।
पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि भारत की विभिन्न भाषाओं का अपना गौरवशाली इतिहास है। अपनी सांस्कृतिक एकता को अभिव्यक्त करने का सामर्थ्य भी है। कभी-कभी भारत की भाषाओं को एक-दूसरे के विरुद्ध खड़ा करने का प्रयास किया जाता है। ऐसे में बौद्धिक समाज का यह दायित्व बनता है कि वह भाषाओं के बीच पारस्परिक संवाद को प्रोत्साहित करें और विवाद पैदा करने से बचें। भारतीय भाषाओं के बीच कोई आपसी द्वेष नहीं हो सकता क्योंकि उनके भाव एक ही है। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी भारतीय भाषाओं के बीच दूरी को मिटाने के लिए हमेशा तत्पर रहते थे। वे हमेशा कहते थे कि सभी देशवासियों को अपनी मातृ भाषा के साथ-साथ देश की एक और भाषा सीखनी चाहिए।
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राखीगढ़ी की पुरातात्विक संपदा बढ़ाएगी हरियाणा का महत्व
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि भारत की गणना दुनिया की प्राचीनतम सभ्यताओं में की जाती है। हरियाणा ने सरस्वती नदी के उद्गम स्थल, कपाल तीर्थ, नदी के प्रकटन स्थल और उसके प्रच्छन प्रवाह की खोज के लिए सराहनीय कार्य किया है। इसी कड़ी में एक और महत्वपूर्ण कार्य हो रहा है राखी गढ़ी में। मैं समझता हूं सिंधु सभ्यता से जुड़े प्राचीन स्थल राखी गढ़ी की पुरातात्विक संपदा का मूल्यांकन जब दुनिया के समक्ष प्रस्तुत किया जाएगा तब हरियाणा का पुरातात्विक महत्व और भी बढ़़ जाएगा।
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सरस्वती नदी को पुनर्जीवित करने का कार्य ऐतिहासिक : कोश्यारी
कार्यक्रम में उपस्थित पूर्व राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि भारत में भाषाएं तो अनेक है लेकिन उनके भाव एक हैं। यहां वेशभूषा, खाना, भाषा अलग होने के बाद भी भारत की संस्कृति एक हैं, जिस पर देश को गर्व है। भारत की यही संस्कृति गांधार, अफगानिस्तान, श्रीलंका तक है। रामायण व अन्य धार्मिक पुस्तकों में भी हमारी संस्कृति की झलक मिलती है उनसे भी सिद्ध हो जाता है कि हमारी भाषाएं अलग अलग हैं, लेकिन उनके भाव एक ही हैं। पूर्व राज्यपाल ने सरस्वती नदी को पुनर्जीवित किये जाने को ऐतिहासिक कार्य बताया और कहा कि यह भागीरथी प्रयास है। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत डॉ. अमित जैन ने किया । डॉ. कल्पना पांडे, आर एस सिराजू, प्रो अवनीश कुमार, पवन जिंदल, स्वामी रामेश्वरानंद, डॉ. बीएल गौड़, वी के जैन, डॉ. ए के गुप्ता, डॉ. योगेंद्र नारायण आदि ने भी संबोधित किया।
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