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पूर्व पीएम चंद्रशेखर के सपनों का आश्रम बना शराबियों का अड्डा
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गुरुग्राम ( पंकज मोहन मिश्रा )। जिला मुख्यालय से 14 किलोमीटर दूर अरावली की पहाड़ियों में स्थित पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर के सपनों का आश्रम भारत यात्रा केंद्र वीरान पड़ा है और अब यह शराबियों का अड्डा भी बन चुका है। 2014 में भाजपा सरकार बनने के बाद भारत यात्रा केंद्र को स्वर्ण जयंती नेचर पार्क के तौर पर विकसित करने की योजना बनाई गई थी, लेकिन 7 साल के बाद भी भारत यात्रा केंद्र पहले की तरह ही वीरान पड़ा है। यहां तक कि वन विभाग की तरफ से केंद्र के गेट पर एक पहरेदार तक नहीं है।
भारत यात्रा केंद्र में चारों तरफ शराब की बोतलें बिखरी पड़ी हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का निवास हो या फिर बाबा अवधूत राम की कुटिया व बेनी माधव का निवास, चारों तरफ शराब की बोतलें, स्मोकिंग पेपर समेत नशे की अन्य सामग्रियां बिखरी पड़ी हैं। भवन के बेसमेंट को लोग अब अनैतिक कृत्यों के लिए इस्तेमाल करने लगे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर 1988 से लेकर 2002 तक यहां पर रहे। बाद में केंद्र को वन विभाग को सौैंपने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने पर चंद्रशेखर ने भारत यात्रा केंद्र को उसकी किस्मत पर छोड़ दिया।
सूख चुका है जलाशय
करीब 17 साल से देखरेख के अभाव में भारत यात्रा केंद्र में बनाया गया जलाशय सूख चुका है। चंद्रशेखर के यहां रहने के दौरान झील पानी से लबालब रहती थी। वहीं भारत यात्रा केंद्र में लगे लाइट्स टूटी-फूटी अवस्था में हैं। भारत यात्रा केंद्र के समीप स्थित भुवनेश्वरी माता मंदिर परिसर में मौजूद वयोवृद्ध बाबा राघव महाराज ने बताया कि 1975 में आपातकाल के बाद करीब ढाई दशक का एक कालखंड ऐसा भी था जब इसी भारत यात्रा केंद्र से पूरे देश की सियासत तय होती थी। यहां पर पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल, हरियाणा के पूर्व सीएम ओपी चौटाला, बंसीलाल, भजनलाल समेत पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह तक समय-समय पर चंद्रशेखर से मुलाकात के लिए आते रहते थे।
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इस तरह से हुई थी स्थापना
भारत यात्रा केंद्र अरावली की गोद में बसा है। झील में तरह-तरह के जलीय पक्षियों व जीव जंतुओं का बसेरा था। पेय जल के प्रति जन जागरूकता पैदा करने के लिए चंद्रशेखर ने कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद स्मारक से 6 जनवरी 1983 से पदयात्रा शुरू की थी। लगभग 4200 किलोमीटर की पदयात्रा का समापन 25 जून 1984 को दिल्ली के राजघाट पर किया। यात्रा के दौरान वे कई स्थानों पर ठहरे, जिसमें से गांव भोंडसी स्थित भारत यात्रा केंद्र को उन्होेंने अपने विचारों का केंद्र बनाया, जो करीब डेढ़ दशक तक सियासत का केंद्र बना रहा। सुप्रीम कोर्ट ने इसे वन विभाग को सौंपने का आदेश दिया, जिसके बाद 2004 में यह केंद्र वन विभाग के अधीन हो गया।
भारत यात्रा केंद्र का सौंदर्यीकरण हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। कोरोना काल में सभी तरह के कार्य प्रभावित हुए हैं। इसी वजह से भारत यात्रा केंद्र को विकसित करने का कार्य भी रुका है। हम इसके सौैंदर्यीकरण पर जल्द काम शुरू करेंगे।
- एमएस मलिक, मुख्य महाप्रबंधक हरियाणा वन निगम
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भारत यात्रा केंद्र में चारों तरफ शराब की बोतलें बिखरी पड़ी हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर का निवास हो या फिर बाबा अवधूत राम की कुटिया व बेनी माधव का निवास, चारों तरफ शराब की बोतलें, स्मोकिंग पेपर समेत नशे की अन्य सामग्रियां बिखरी पड़ी हैं। भवन के बेसमेंट को लोग अब अनैतिक कृत्यों के लिए इस्तेमाल करने लगे हैं। पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर 1988 से लेकर 2002 तक यहां पर रहे। बाद में केंद्र को वन विभाग को सौैंपने संबंधी सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने पर चंद्रशेखर ने भारत यात्रा केंद्र को उसकी किस्मत पर छोड़ दिया।
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सूख चुका है जलाशय
करीब 17 साल से देखरेख के अभाव में भारत यात्रा केंद्र में बनाया गया जलाशय सूख चुका है। चंद्रशेखर के यहां रहने के दौरान झील पानी से लबालब रहती थी। वहीं भारत यात्रा केंद्र में लगे लाइट्स टूटी-फूटी अवस्था में हैं। भारत यात्रा केंद्र के समीप स्थित भुवनेश्वरी माता मंदिर परिसर में मौजूद वयोवृद्ध बाबा राघव महाराज ने बताया कि 1975 में आपातकाल के बाद करीब ढाई दशक का एक कालखंड ऐसा भी था जब इसी भारत यात्रा केंद्र से पूरे देश की सियासत तय होती थी। यहां पर पूर्व उप प्रधानमंत्री देवीलाल, हरियाणा के पूर्व सीएम ओपी चौटाला, बंसीलाल, भजनलाल समेत पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह तक समय-समय पर चंद्रशेखर से मुलाकात के लिए आते रहते थे।
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इस तरह से हुई थी स्थापना
भारत यात्रा केंद्र अरावली की गोद में बसा है। झील में तरह-तरह के जलीय पक्षियों व जीव जंतुओं का बसेरा था। पेय जल के प्रति जन जागरूकता पैदा करने के लिए चंद्रशेखर ने कन्याकुमारी स्थित विवेकानंद स्मारक से 6 जनवरी 1983 से पदयात्रा शुरू की थी। लगभग 4200 किलोमीटर की पदयात्रा का समापन 25 जून 1984 को दिल्ली के राजघाट पर किया। यात्रा के दौरान वे कई स्थानों पर ठहरे, जिसमें से गांव भोंडसी स्थित भारत यात्रा केंद्र को उन्होेंने अपने विचारों का केंद्र बनाया, जो करीब डेढ़ दशक तक सियासत का केंद्र बना रहा। सुप्रीम कोर्ट ने इसे वन विभाग को सौंपने का आदेश दिया, जिसके बाद 2004 में यह केंद्र वन विभाग के अधीन हो गया।
भारत यात्रा केंद्र का सौंदर्यीकरण हमारी प्राथमिकताओं में शामिल है। कोरोना काल में सभी तरह के कार्य प्रभावित हुए हैं। इसी वजह से भारत यात्रा केंद्र को विकसित करने का कार्य भी रुका है। हम इसके सौैंदर्यीकरण पर जल्द काम शुरू करेंगे।
- एमएस मलिक, मुख्य महाप्रबंधक हरियाणा वन निगम