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Gurugram News: सेक्टर-78 स्थित रहेजा वेदांता प्रोजेक्ट का होगा फारेंसिक ऑडिट
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हरियाणा भू संपदा विनियामक प्राधिकरण ने दिए आदेश
2011 में लांच हुआ था प्रोजेक्ट, अभी तक खरीदारों को नहीं मिले घर
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। खरीदारों को फ्लैट देने में हो रही लगातार देरी, समय पर निर्माण कार्य नहीं होने पर हरियाणा भू संपदा विनियामक प्राधिकरण (हरेरा) ने सेक्टर-78 स्थित रहेजा वेदांता प्रोजेक्ट का फारेंसिक ऑडिट करवाने का आदेश दिया है। प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदने वालों ने कुछ दिन पहले सोहना रोड स्थित बिल्डर के कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया था।
रहेजा वेदांता प्रोजेक्ट सन 2011 में लांच हुआ था। सन 2017 में फ्लैट बनाकर खरीदारों को सौंपना था। 18 एकड़ में फैले इस प्रोजेक्ट में ए और सी टावर में 55-55 मंजिल हैं जबकि बी टावर 61 मंजिल का है। पांच-पांच मंजिल के 25 विला भी हैं। इस प्रोजेक्ट में करीब एक हजार खरीदार हैं। सभी की इमारत खड़ी होने के बाद अभी काम बंद है। खरीदारों का आरोप है कि वह बिल्डर को 90 फीसदी तक पैसा दे चुके हैं लेकिन साइट पर काम 50 फीसदी भी पूरा नहीं हुआ है। इस प्रोजेक्ट की इमारत हरियाणा की सबसे ऊंची इमारत है।
इस मामले में हरेरा ने कुछ खरीदारों के पैसे वापस करने के आदेश भी दिए थे लेकिन बिल्डर न तो पैसा वापस कर रहा है और न घर दे रहा है। अब हरेरा फारेंसिक ऑडिट के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि प्रोजेक्ट के लिए जो पैसा जुटाया गया था, उसका क्या हुआ। कहां उपयोग किया गया। दूसरी ओर बिल्डर इस प्रोजेक्ट के पूरा नहीं होने के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकसित न होने की बात कहता है। जिसके लिए नगर निगम और अन्य विभाग जिम्मेदार हैं।
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2011 में लांच हुआ था प्रोजेक्ट, अभी तक खरीदारों को नहीं मिले घर
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। खरीदारों को फ्लैट देने में हो रही लगातार देरी, समय पर निर्माण कार्य नहीं होने पर हरियाणा भू संपदा विनियामक प्राधिकरण (हरेरा) ने सेक्टर-78 स्थित रहेजा वेदांता प्रोजेक्ट का फारेंसिक ऑडिट करवाने का आदेश दिया है। प्रोजेक्ट में फ्लैट खरीदने वालों ने कुछ दिन पहले सोहना रोड स्थित बिल्डर के कार्यालय पर प्रदर्शन भी किया था।
रहेजा वेदांता प्रोजेक्ट सन 2011 में लांच हुआ था। सन 2017 में फ्लैट बनाकर खरीदारों को सौंपना था। 18 एकड़ में फैले इस प्रोजेक्ट में ए और सी टावर में 55-55 मंजिल हैं जबकि बी टावर 61 मंजिल का है। पांच-पांच मंजिल के 25 विला भी हैं। इस प्रोजेक्ट में करीब एक हजार खरीदार हैं। सभी की इमारत खड़ी होने के बाद अभी काम बंद है। खरीदारों का आरोप है कि वह बिल्डर को 90 फीसदी तक पैसा दे चुके हैं लेकिन साइट पर काम 50 फीसदी भी पूरा नहीं हुआ है। इस प्रोजेक्ट की इमारत हरियाणा की सबसे ऊंची इमारत है।
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इस मामले में हरेरा ने कुछ खरीदारों के पैसे वापस करने के आदेश भी दिए थे लेकिन बिल्डर न तो पैसा वापस कर रहा है और न घर दे रहा है। अब हरेरा फारेंसिक ऑडिट के माध्यम से यह पता लगाने की कोशिश करेगा कि प्रोजेक्ट के लिए जो पैसा जुटाया गया था, उसका क्या हुआ। कहां उपयोग किया गया। दूसरी ओर बिल्डर इस प्रोजेक्ट के पूरा नहीं होने के लिए बुनियादी सुविधाओं के विकसित न होने की बात कहता है। जिसके लिए नगर निगम और अन्य विभाग जिम्मेदार हैं।
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