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पहले सुख सुविधाओं को तव्वजो, अब स्वास्थ्य सेवाओं पर जोर

Wed, 22 Sep 2021 11:33 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 22 Sep 2021 11:33 PM IST
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First focus on amenities, now emphasis on health services
गुरुग्राम। कोरोना ने दो साल में बहुत कुछ बदला। यहां तक कि हमारे सार्वजनिक जीवन की प्राथमिकताएं भी। इंसानी व्यवहार के साथ ही कोरोना ने कॉरपोरेट घरानों की प्राथमिकताएं बदल दी हैं। कोरोना से पहले कंपनियां लोगों के सुख सुविधाओं के संसाधनों पर जोर देती थीं, अब केवल स्वास्थ्य सेवाओं पर फोकस कर रही हैं।
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कंपनियां कॉरपोरेट सोशल रेस्पांस्बिलिटी (सीएसआर) फंड से अब केवल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने पर जोर दे रही है। दूसरी लहर में ऑक्सीजन की कमी से बनी भयावह स्थिति का दोबारा से सामना न करना पड़े, इसके लिए कंपनियों ने सीएसआर विभाग के साथ मिलकर व्यापक तैयारियां की हैं। इन तैयारियों के मद्देनजर ही प्रदेश भर में अलग-अलग स्थानों पर 91 ऑक्सीजन प्लांट लगाए जा रहे हैं। इनमें से 26 प्लांट लगाए जा चुके हैं। दावा किया रहा है कि भविष्य में अब ऑक्सीजन की कमी नहीं रहेगी। पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन जनरेट की जा रही है।
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कहां कितने प्लांट लगाए जा रहे
जिले का नाम प्लांट की संख्या
गुरुग्राम 17
रेवाड़ी 4
रोहतक 3
पलवल 2
नूंह 7
फरीदाबाद 16
जींद 2
हिसार 2
पंचकुला 4
चरखी दादरी 1
नारनौल 1
सोनीपत 3
कैथल 1
फतेहाबद 3
अंबाला 3
यमुनानगर 4
करनाल 8
सिरसा 3
झज्जर 1
कुरुक्षेत्र 3
पानीपत 1
कुल 91
प्रति मिनट 30 हजार से अधिक लीटर ऑक्सीजन हो रही है तैयार
इन प्लांट के जरिये प्रदेश में प्रति मिनट 30 हजार लीटर से अधिक ऑक्सीजन जनरेट की जा रही है। सीएसआर विभाग से मिली जानकारी के अनुसार प्रत्येक प्लांट की अलग-अलग क्षमता है। इन सबकी क्षमता को अगर एक करके मापा जाए तो यह 30 हजार लीटर से अधिक होती है।
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कितनी क्षमता के कितने प्लांट
लीटर प्रति मिनट संख्या
45 1
50 3
60 2
75 2
100 1
150 1
167 3
200 8
250 2
300 2
350 1
400 1
500 21
600 1
666 1
1000 11
1650 1
20एम3 1
8एम3 1
कुल 64
गुरुग्राम-फरीदाबाद की कंपनियां ज्यादा गंभीर
सीएसआर विभाग के संयुक्त निदेशक गौरव सिंह के मुताबिक वैसे तो हर छोटे बड़े कॉरपोरेट्स सीएसआर को गंभीरता से ले रहे हैं, लेकिन गुरुग्राम और फरीदाबाद की कंपनियां इसमें अग्रणी भूमिका निभा रही हैं। पहले कंपनियां सड़क, सीवर, पार्क, खेल मैदान और दूसरी सुविधाओं पर अधिक ध्यान देती थी, लेकिन कोरोना ने कंपनियों की प्राथमिकताएं बदल दी है। अब कंपनियां स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर करने में अपना योगदान दे रही हैं। स्वास्थ्य के बाद शिक्षा के क्षेत्र में भी कंपनियां नया कर रही है।
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