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किसानों की मांगों के समर्थन में एक वक्त का उपवास रखा
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गुरुग्राम। जिले में संयुक्त किसान मोर्चा के पदाधिकारियों ने कृषि कानूनों के खिलाफ देशभर में विभिन्न स्थानों पर धरने पर बैठे किसानों के समर्थन में बुधवार को एक वक्त का भोजन त्यागा। उनका कहना है कि राष्ट्रीय किसान दिवस के अवसर पर आंदोलनकारियों की अपील का पालन करने और उनका हौसला बढ़ाने के लिए यह कदम उठाया गया।
संयुक्त किसान मोर्चा गुरुग्राम के अध्यक्ष चौ. संतोख सिंह ने बताया कि देश के समस्त किसान संगठनों के आह्वान पर बुधवार को राष्ट्रीय किसान दिवस पर जिले में भी दिन में एक वक्त का भोजन त्याग कर उपवास किया। जिले में किसानों, मजदूरों, विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों व अन्य प्रमुख व्यक्तियों ने किसानों की मांगों के समर्थन में उपवास रखा।
चौ. संतोख सिंह, राव कमलबीर सिंह, आरएस राठी, गजे सिंह कबलाना, बीरू सरपंच, सतबीर सिंह संधु और नवनीत रोज ने कहा कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों की वजह से देश के किसान कड़कड़ाती ठंड में दिल्ली के चारों तरफ सड़कों पर खुले आसमान के नीचे बैठे हुए हैं, यह देश के लिए बहुत ही दुर्भाग्य की बात है। उन्होंने नए कृषि कानूनों को किसान, मजदूर, गरीब विरोधी बताया, साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि ये कानून खेत खलिहान को पूंजीपतियों के हाथ गिरवी रखने का षड्यंत्र है।
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उन्होंने कहा कि कांट्रेक्ट फार्मिंग से किसान अपने ही खेत में मजदूर बनकर रह जाएंगे। इन कानूनों से जमाखोरी, मुनाफाखोरी व कालाबाजारी बढ़ेगी। ये कानून केवल व्यापारी लाभ के कानून हैं। उन्होंने एक स्वर में कहा कि सरकार अहंकार को त्याग कर किसानों की मांगों को मानकर कृषि कानूनों को रद्द करें।
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संयुक्त किसान मोर्चा गुरुग्राम के अध्यक्ष चौ. संतोख सिंह ने बताया कि देश के समस्त किसान संगठनों के आह्वान पर बुधवार को राष्ट्रीय किसान दिवस पर जिले में भी दिन में एक वक्त का भोजन त्याग कर उपवास किया। जिले में किसानों, मजदूरों, विभिन्न सामाजिक संगठनों, राजनीतिक दलों व अन्य प्रमुख व्यक्तियों ने किसानों की मांगों के समर्थन में उपवास रखा।
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चौ. संतोख सिंह, राव कमलबीर सिंह, आरएस राठी, गजे सिंह कबलाना, बीरू सरपंच, सतबीर सिंह संधु और नवनीत रोज ने कहा कि केंद्र सरकार की गलत नीतियों की वजह से देश के किसान कड़कड़ाती ठंड में दिल्ली के चारों तरफ सड़कों पर खुले आसमान के नीचे बैठे हुए हैं, यह देश के लिए बहुत ही दुर्भाग्य की बात है। उन्होंने नए कृषि कानूनों को किसान, मजदूर, गरीब विरोधी बताया, साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि ये कानून खेत खलिहान को पूंजीपतियों के हाथ गिरवी रखने का षड्यंत्र है।
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उन्होंने कहा कि कांट्रेक्ट फार्मिंग से किसान अपने ही खेत में मजदूर बनकर रह जाएंगे। इन कानूनों से जमाखोरी, मुनाफाखोरी व कालाबाजारी बढ़ेगी। ये कानून केवल व्यापारी लाभ के कानून हैं। उन्होंने एक स्वर में कहा कि सरकार अहंकार को त्याग कर किसानों की मांगों को मानकर कृषि कानूनों को रद्द करें।