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Gurugram News: आईएमटी में धरना दे रहे किसान 6 नवंबर को करेंगे महापंचायत
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20 महीनों से जारी आंदोलन को संयुक्त किसान मोर्चा का औपचारिक समर्थन मिला
भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत महापंचायत में शामिल होंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह के आईएमटी (इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप) रोज़का मेव में किसानों का अपनी अधिग्रहित ज़मीन के उचित मुआवज़े को लेकर चला आ रहा संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले लगभग 20 महीनों (करीब 600 दिनों) से जारी इस आंदोलन को अब संयुक्त किसान मोर्चा का औपचारिक समर्थन मिल गया है।
सोमवार को इस बारे में क्षेत्र के किसानों ने एक पत्रकार वार्ता के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि उनके इस धरने को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊर्जा और दिशा देने के लिए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत 6 नवंबर को रोज़का मेव में आयोजित होने वाली महापंचायत में शामिल होंगे। यह पूरा मामला लगभग 13 साल पुराना है। 9 गांवों के किसानों की करीब 1600 एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण आईएमटी के विकास के लिए किया गया था।
किसानों का मुख्य आरोप मुआवज़े में हुए भारी भेदभाव को लेकर है। आसपास के जिलाें में किसानों को उनकी ज़मीन के लिए 2 करोड़ प्रति एकड़ का मुआवज़ा मिला है। किसानों के विरोध के बाद सरकार ने उनसे बातचीत की और उनकी ज़मीन के लिए 46 लाख प्रति एकड़ देने का वादा किया। किसानों को कोर्ट जाने से रोकने के लिए सरकार ने उनसे शपथ पत्र (एफिडेविट) पर हस्ताक्षर करा लिए। हालांकि, उन्हें केवल 21 लाख प्रति एकड़ का भुगतान किया गया, जबकि बकाया 25 लाख प्रति एकड़ 13 साल बाद भी नहीं दिया गया है।
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किसानों ने पिछले 20 महीनों से अपना धरना जारी रखा है। मुआवज़े के बकाए को लेकर आक्रोशित हजारों किसानों और महिलाओं ने अब अपने आंदोलन को अनिश्चितकालीन संघर्ष में बदल दिया है।
किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें उनका पूरा और उचित मुआवज़ा नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह धरना जारी रहेगा। इस दौरान मुख्य रूप से धरना स्थल पर पी कृष्णा प्रशाद, सिराजूद्दीन, मोहम्मद एस. पी, खुर्शीद, दीनमो, जहिर, अकरम, एडवोकेट अफ़ज़ल, बसीर, नसीम, रफ़ीक़ हामिद और अन्य ग्रामीण शामिल हैं।
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भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत महापंचायत में शामिल होंगे
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह के आईएमटी (इंडस्ट्रियल मॉडल टाउनशिप) रोज़का मेव में किसानों का अपनी अधिग्रहित ज़मीन के उचित मुआवज़े को लेकर चला आ रहा संघर्ष अब निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले लगभग 20 महीनों (करीब 600 दिनों) से जारी इस आंदोलन को अब संयुक्त किसान मोर्चा का औपचारिक समर्थन मिल गया है।
सोमवार को इस बारे में क्षेत्र के किसानों ने एक पत्रकार वार्ता के दौरान जानकारी देते हुए बताया कि उनके इस धरने को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊर्जा और दिशा देने के लिए भारतीय किसान यूनियन के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत 6 नवंबर को रोज़का मेव में आयोजित होने वाली महापंचायत में शामिल होंगे। यह पूरा मामला लगभग 13 साल पुराना है। 9 गांवों के किसानों की करीब 1600 एकड़ ज़मीन का अधिग्रहण आईएमटी के विकास के लिए किया गया था।
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किसानों का मुख्य आरोप मुआवज़े में हुए भारी भेदभाव को लेकर है। आसपास के जिलाें में किसानों को उनकी ज़मीन के लिए 2 करोड़ प्रति एकड़ का मुआवज़ा मिला है। किसानों के विरोध के बाद सरकार ने उनसे बातचीत की और उनकी ज़मीन के लिए 46 लाख प्रति एकड़ देने का वादा किया। किसानों को कोर्ट जाने से रोकने के लिए सरकार ने उनसे शपथ पत्र (एफिडेविट) पर हस्ताक्षर करा लिए। हालांकि, उन्हें केवल 21 लाख प्रति एकड़ का भुगतान किया गया, जबकि बकाया 25 लाख प्रति एकड़ 13 साल बाद भी नहीं दिया गया है।
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किसानों ने पिछले 20 महीनों से अपना धरना जारी रखा है। मुआवज़े के बकाए को लेकर आक्रोशित हजारों किसानों और महिलाओं ने अब अपने आंदोलन को अनिश्चितकालीन संघर्ष में बदल दिया है।
किसानों का स्पष्ट कहना है कि जब तक उन्हें उनका पूरा और उचित मुआवज़ा नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह धरना जारी रहेगा। इस दौरान मुख्य रूप से धरना स्थल पर पी कृष्णा प्रशाद, सिराजूद्दीन, मोहम्मद एस. पी, खुर्शीद, दीनमो, जहिर, अकरम, एडवोकेट अफ़ज़ल, बसीर, नसीम, रफ़ीक़ हामिद और अन्य ग्रामीण शामिल हैं।