फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Gurugram News ›   Ever since the flowers became paper, the fragrance has disappeared

Gurugram News: फूल कागज के हुए जबसे, खुशबुएं दर बदर हो गईं तबसे

Sun, 27 Jul 2025 05:54 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 27 Jul 2025 05:54 PM IST
विज्ञापन
Ever since the flowers became paper, the fragrance has disappeared
अड़े हैं बच्चे गांव का घर बेच देने को, वो तड़पे हैं ये मां बाप की अंतिम निशानी है
विज्ञापन

पोखर की तरह सिमटे हैं कैद अपने में, कोई झरने की तरह खुलता ही नहीं
लक्ष्मी शंकर वाजपेयी का गजल संग्रह अश्कों से लफ्जों तक लोकार्पित
सुरुचि परिवार ने किया साहित्यिक आयोजन, कवियों ने बिखेरे विविध रंग
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। सुरुचि परिवार के तत्वावधान में रविवार को सेक्टर-चार स्थित सीसीए स्कूल के सभागार में लोकार्पण समारोह और काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कर्नल कुंवर प्रताप सिंह ने कार्यक्रम की अध्यक्षता की। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. अमरनाथ अमर रहे। डॉ. मनोज अबोध, ओमप्रकाश यती, रूबी मोहंती, लक्ष्मी शंकर वाजपेयी, त्रिलोक कौशिक, ममता किरण, मदन साहनी समेत 30 कवियों ने इस मौके पर अपनी कविताएं पढ़ीं।
इस दौरान अतिथियों द्वारा गजलकार लक्ष्मी शंकर वाजपेयी के नवीनतम गजल संग्रह अश्कों से लफ्जों तक को लोकार्पित किया गया। डॉ. लक्ष्मी शंकर वाजपेयी ने कहा कि दुष्यंत कुमार ने हिंदी गजल के परिदृश्य को बदला और उन्होंने उसे आदमी की पीड़ा से जोड़ दिया। उन्होंने कहा कि फूल कागज के हुए जबसे, खुशबुएं दर बदर हो गईं तबसे। मदन साहनी ने संचालन करते हुए कहा कि कविता या गजल, जितनी मानवीय भावनाओं और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी होती है, उतनी ही अधिक समय तक जीवित रहती है। मुख्य अतिथि डॉ. अमर नाथ अमर ने संग्रह की गजलों को आत्मबोध और सरोकारों की गजल बताया। उन्होंने उद्धरित करते हुए कहा कि पोखर की तरह सिमटे हैं कैद अपने में, कोई झरने की तरह खुलता ही नहीं। डॉ. मनोज अबोध ने कहा लक्ष्मी कांत वाजपेयी की अधिकांश गजलों में व्यवस्था के प्रति आक्रोश, आमजन की पीड़ा, संबंधों की बदलती परिस्थिति दिखाई देती है। हकीकत आदमी की क्या पता चलती है चेहरे से, ज़ुबां फौरन बता देती है शख्स कितना खानदानी है। अड़े हैं बच्चे गांव का घर बेच देने को, वो तड़पे हैं ये मां बाप की अंतिम निशानी है।
विज्ञापन

इस मौके पर बिमलेंदु सागर, राजकुमार गजलयार, रक्षा सिंह, मीना चौधरी, मेघना शर्मा, दीपशिखा श्रीवास्तव, विनय कुमार, अनंत सप्रे, घमंडी लाल अग्रवाल, संजीव नादान, कृष्ण गोपाल विद्यार्थी, शकुंतला मित्तल, रमा त्यागी, दौलत राम कौशिक, वीणा अग्रवाल, प्रियंका कटारिया, रेणु मिश्रा, सुरेंद्र मनचंदा, अनिल श्रीवास्तव आदि कवियों ने काव्य पाठ किया।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed