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Gurugram News: समाधान हब के जरिये पर्यावरण संरक्षण की कवायद

Wed, 04 Jun 2025 11:20 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 04 Jun 2025 11:20 PM IST
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Efforts to protect the environment through Samadhan Hub
आई एम गुड़गांव संगठन ने ठोस कचरा प्रबंधन के लिए शहर में स्थापित किए समाधान हब
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- ठोस कचरे को रिसाइकिल कर लैंड फिल में जाने से रोका जा रहा, वंचितों की भी हो रही मदद

पूनम शंकर
गुरुग्राम। शहर की हवा, पानी और जमीन को प्रदूषित करने में कचरे के कुप्रबंधन का बड़ा योगदान रहा है। शहर की आबोहवा को सुरक्षित रखने में कचरा प्रबंधन बड़ी भूमिका निभा सकता है। लैंडफिल में कचरे को जाने से बचाने का एक तरीका रिसाइकिल भी है और ठोस कचरे को रिसाइकिल करने के लिए समाधान हब बनाए गए हैं। ऐसे चार समाधान हब में ठोस कचरे को रिसाइकिल किया जा रहा है। आई एम गुड़गांव संगठन ने ऐसे चार समाधान हब ठोस कचरे की रिसाइकिलिंग के लिए बनाए हैं। इनमें से एक मंदिरों के फूलों, मूर्तियों आदि के प्रबंधन के लिए बनाया गया है।
संगठन ने नगर निगम और जीएमडीए के बायोडायवर्सिटी पार्क विकसित करने, सिकंदरपुर नाले रिनोवेशन, वन क्षेत्र का विस्तार करने और अरावली नगर वन क्षेत्र को विकसित करने जैसे पर्यावरण संरक्षण के कई प्रोजेक्ट शुरू कर रखे हैं। संगठन ने समाधान हब की शुरुआत वर्ष 2019 में की थी। अब इनकी संख्या चार हो गई है। यह प्रोजेक्ट अब व्यापक स्तर पर पहुंच गया है। डीएलएफ फेज वन में खुशबू चौक के पास, बादशाहपुर में टाटा प्रीमंती सोसाइटी के पास, सेक्टर-56 और डीएलएफ फेज वन में पश्चिमी हनुमान और शनिदेव मंदिर के पास चार समाधान हब बने हुए हैं।
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साढ़े तीन लाख किलो कचरा हो चुका रिसाइकिल
समाधान हब ठोक कचरा प्रबंधन के लिए आठ बिन बनाए गए हैं। इनमें कोई भी व्यक्ति या आस-पास की सोसाइटी रिसाइकिल किए जाने युक्त कचरा जैसे मल्टीलेयर प्लास्टिक (पैकेजिंग वाले रैपर), मोटे लेयर वाले प्लास्टिक, पेपर, ई वेस्ट, मेटल, ग्लास आदि डाल कर जा सकते हैं। अबतक इन केंद्रों में 3,61,719 किलो ठोस कचरे को लैंडफिल में जाने की जगह रिसाइकिल किया गया है।
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जरूरतमंदों को मिल रही है सहायता
प्रोजेक्ट हेड नमृता चौधरी और अंजलि खत्री ने बताया कि समाधान केंद्रों में प्राप्त चीजों को विभिन्न संगठनों को दे दिया जाता है। जैसे पेपर को वंचित बच्चों के स्कूलों के लिए नोटबुक और किताबों बनाने के लिए दिया जाता है। ई-वेस्ट को रिसाइकिल करने के लिए दे दिया जाता है। इससे कुछ आमदनी होती है, जिसे केंद्र के संसाधनों को बढ़ाने में प्रयोग किया जाता है।

शनि मंदिर वाले समाधान हब से शहर के 10-12 मंदिर जुड़े हैं। मंदिरों में इस्तेमाल किए गए फूलों को कुछ संगठन ले जाते हैं और उन फूलों का इस्तेमाल अगरबत्ती, धूप और होली के समय रंग बनाने में होता है। इससे कई वंचित परिवारों को रोजगार मिलता है। माता की चुनरियां और मूर्तियों को तो नए तरीके से तैयार कर दिया जाता है। ज्यादा खंडित मूर्तियों को मिट्टी में विसर्जित कर दिया जाता है। पुराने कपड़ों को ठीक कर जरूरतमंदों तक पहुंचाने का काम भी गूंज नाम की एक संस्था करती है। यह संस्थान भी समाधान हब के साथ जुड़ी है।
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