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Gurugram News: जस्टिस ऑफ टावर में भूकंप-आग की मॉक ड्रिल, फंसे 5 लोग निकाले गए
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अलार्म बजते ही एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस और स्थानीय पुलिस की टीमें पहुंचीं
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम में शुक्रवार को प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा से निपटने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए मॉक ड्रिल की गई। दोपहर तीन बजे जस्टिस ऑफ टावर में आपातकालीन साइरन बजाया गया। यह अभ्यास भूकंप के झटकों के कारण नई कोर्ट इमारत के एक हिस्से के ढहने और आग लगने के परिदृश्य पर आधारित था।
कोर्ट परिसर में रोजाना हजारों वकीलों और आम जनता की आवाजाही रहती है इसलिए आपातकालीन प्रतिक्रिया समय परखने के लिए इस जगह को चुना गया। अलार्म बजते ही एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। बचाव अभियान के दौरान मलबे के नीचे और इमारत के अंदर कुल पांच लोग फंसे पाए गए। राहत दल ने सबसे पहले हेलिंग सर्च तकनीक का उपयोग किया। लाउड स्पीकर से आवाज लगाकर सहायता के लिए पुकारा गया। इसके बाद विजुअल सर्च कैमरे की मदद से फंसे पीड़ितों का सटीक पता लगाया गया। इससे तीन मीटर की दूरी पर पीड़ित की सही लोकेशन ट्रेस हुई।
बचाव अभियान और प्राथमिक उपचार
एक गंभीर रूप से घायल पीड़ित दीवार के पीछे दबा हुआ था। उसे निकालने के लिए एसडीआरएफ की टीम ने कटर मशीनों से दीवार काटकर रास्ता बनाया। प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे स्ट्रेचर के जरिये सुरक्षित निकाला गया। घायल को तुरंत एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया। मलबे में कुल पांच लोगों को चोटें आईं, जिनमें से एक गंभीर रूप से घायल युवक को अस्पताल भेजा गया। आपदा प्रबंधन के अधिकारी मोहित शर्मा ने बताया कि जिला प्रशासन और उपायुक्त के निर्देशों पर ऐसी मॉक ड्रिल हर महीने आयोजित की जाती है। इसका उद्देश्य आपदा के समय सभी विभागों के बीच समन्वय मजबूत करना है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। गुरुग्राम में शुक्रवार को प्राकृतिक या मानव निर्मित आपदा से निपटने की तैयारियों का जायजा लेने के लिए मॉक ड्रिल की गई। दोपहर तीन बजे जस्टिस ऑफ टावर में आपातकालीन साइरन बजाया गया। यह अभ्यास भूकंप के झटकों के कारण नई कोर्ट इमारत के एक हिस्से के ढहने और आग लगने के परिदृश्य पर आधारित था।
कोर्ट परिसर में रोजाना हजारों वकीलों और आम जनता की आवाजाही रहती है इसलिए आपातकालीन प्रतिक्रिया समय परखने के लिए इस जगह को चुना गया। अलार्म बजते ही एसडीआरएफ, सिविल डिफेंस, फायर ब्रिगेड, स्वास्थ्य विभाग की एंबुलेंस और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें तुरंत मौके पर पहुंचीं। बचाव अभियान के दौरान मलबे के नीचे और इमारत के अंदर कुल पांच लोग फंसे पाए गए। राहत दल ने सबसे पहले हेलिंग सर्च तकनीक का उपयोग किया। लाउड स्पीकर से आवाज लगाकर सहायता के लिए पुकारा गया। इसके बाद विजुअल सर्च कैमरे की मदद से फंसे पीड़ितों का सटीक पता लगाया गया। इससे तीन मीटर की दूरी पर पीड़ित की सही लोकेशन ट्रेस हुई।
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बचाव अभियान और प्राथमिक उपचार
एक गंभीर रूप से घायल पीड़ित दीवार के पीछे दबा हुआ था। उसे निकालने के लिए एसडीआरएफ की टीम ने कटर मशीनों से दीवार काटकर रास्ता बनाया। प्राथमिक उपचार देने के बाद उसे स्ट्रेचर के जरिये सुरक्षित निकाला गया। घायल को तुरंत एंबुलेंस से अस्पताल भेजा गया। मलबे में कुल पांच लोगों को चोटें आईं, जिनमें से एक गंभीर रूप से घायल युवक को अस्पताल भेजा गया। आपदा प्रबंधन के अधिकारी मोहित शर्मा ने बताया कि जिला प्रशासन और उपायुक्त के निर्देशों पर ऐसी मॉक ड्रिल हर महीने आयोजित की जाती है। इसका उद्देश्य आपदा के समय सभी विभागों के बीच समन्वय मजबूत करना है।
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