फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi NCR ›   Gurugram News ›   Due to lack of awareness, migrants are not able to get small cylinders

Gurugram News: जागरूकता के अभाव में प्रवासियों को नहीं मिल पा रहा छोटा सिलिंडर

Wed, 15 Apr 2026 12:30 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 15 Apr 2026 12:30 AM IST
विज्ञापन
Due to lack of awareness, migrants are not able to get small cylinders
पलायन अभी भी जारी, मजदूर बोले नहीं हो पा रहा गैस का प्रबंध
विज्ञापन

संवाद न्यूज एजेंसी

बादशाहपुर। मजदूरी कर अपना जीवन यापन करने वाले बहुत से श्रमिकों को पता ही नहीं चल पा रहा कि 5 किलोग्राम वाला छोटा सिलिंडर भी मिल रहा है। मजदूरी कम और महंगी गैस के कारण उन्हें घर वापसी का रास्ता आसान लग रहा है। कई मजदूर पहले ही पलायन कर चुके हैं, वहीं जो हालात ठीक होने का इंतजार कर रहे हैं उनका भी हौसला धीरे-धीरे जवाब देने लगा है। ईरान और अमेरीका-इस्त्राइल के बीच शुरु हुए युद्ध से विश्व पर छाए एलपीजी संकट का असर पहले से काफी कम तो हुआ है पर प्रवासी मजदूरों के लिए नहीं। उन्हें अभी भी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा हैं।
वापस जाने की तैयारी करने वाले बहुत से लोगों की राय यह है कि अभी हालात ठीक नहीं है। सब कुछ जब सामान्य हो जाएगा तब वापस आएंगे। वहीं, दूसरा कारण शादी का सीजन भी है। गांव में रिश्तेदारों के यहां शादी है। साथ ही शादी के सीजन में कई लोगों को वहां पर भी काम मिल जाता है। पटौदी, सोहना, भोंडसी और बादशाहपुर जैसे इलाकों में किल्लत का फायदा उठाकर कालाबाजारी करने वालों पर अभी भी पूरी तरह लगाम नहीं लगी है। ब्लैक मार्केट में एक सिलिंडर की कीमत 4000 से 5000 रुपये तक पहुंच गई है। इस कारण प्रवासियों को 500 रुपये किलो तक गैस मिल रही है।
विज्ञापन

एक तरफ इन लोगों के पास एजेंसी का कनेक्शन नहीं है कि यह आधिकारिक तौर पर घरेलू सिलिंडर ले लें। वहीं, 5 किलोग्राम वाले छोटे सिलिंडर के बारे में इन लोगों को जानकारी नहीं है। इस कारण यह अभी भी परेशान हैं और पलायन को मजबूर है। गैस न मिलने और महंगी कीमतों के कारण डूंडाहेड़ा, वजीराबाद, फाजिलपुर और रामगढ़ और आस-पास के अन्य इलाकों में किराये पर रहने वाले श्रमिकों का बड़ी संख्या में मजदूरों ने पलायन शुरू कर दिया है। छोटे ढाबे बंद हो चुके हैं और रेहड़ी-पटरी वालों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। फाजिलपुर और रामगढ़ जैसे गांवों में रहने वाले हजारों प्रवासी श्रमिक अब पलायन की तैयारी में हैं। स्थानीय दुकानदारों का कहना है कि यदि अगले दो-चार दिनों में आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो उद्योगों और घरेलू सेवाओं में लगे मजदूरों की भारी कमी हो जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन




----



मकान मालिक किराया मांग रहा है और गैस वाले अधिक रुपयों में गैस दे रहे हैं। कई लोग तो गैस दे भी नहीं रहे हैं। अब गांव वापस जाने के अलावा कोई रास्ता नहीं बचा है। कुछ ही दिनों में निकल जाएंगें। - भोला

घर का बजट पूरी तरह बिगड़ गया है। पहले ही महंगाई मार रही थी, अब गैस की किल्लत ने कमर तोड़ दी। घंटों लाइन में लगने के बाद भी सिलिंडर नहीं मिलता। ब्लैक में खरीदने की हमारी हैसियत नहीं है। - अजीत



प्रशासन को बार-बार शिकायत दी गई कि एजेंसियां कालाबाजारी कर रही हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं होती। आम आदमी लाइन में लगा रहता है और पीछे के रास्ते से सिलिंडर ब्लैक में बेचे जा रहे हैं। - यादराम




प्रशासनिक अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही आपूर्ति सुधारी जाएगी, लेकिन जमीन पर स्थिति इसके उलट है। गुरुग्राम की रसोई ठंडी पड़ी है और गरीब की जेब पर डाका जारी है। - राहुल चौहान
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed