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Gurugram News: खुद के साथ दूसरों का भी संवार रहीं भविष्य ड्रोन दीदी

Mon, 29 Dec 2025 05:26 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Mon, 29 Dec 2025 05:26 PM IST
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Drone Didi is shaping the future of others along with herself.
भावना और राजेश बनीं ग्रामीण महिलाओं के लिए उदाहरण
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। खेड़की (बाघनकी) गांव की भावना और पटौदी पचगांव के पुखरपुर की राजेश कुमारी दो ऐसी महिलाएं हैं, जो ड्रोन चलाती हैं। अपने खुद के खेतों और दूसरे किसानों के खेतों में यूरिया आदि के स्प्रे के लिए ये ड्रोन का प्रयोग करती हैं। ये दोनों केवल ड्रोन दीदी की भूमिका ही नहीं बल्कि ग्रामीण महिलाओं को स्वरोजगार की ट्रेनिंग, सरकारी योजनाओं को महिलाओं तक पहुंचाने और अपनी पढ़ाई को जारी रखकर अपने सपने पूरे करने में भी लगी हुई हैं।
राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत दो साल पहले उन्हें ड्रोन चलाने की ट्रेनिंग दी गई। इन्हें नमो ड्रोन दीदी कहा गया। खेड़की गांव की भावना की शादी वर्ष 2008 में हो गई। वर्ष 2017 में गांव में स्वयं सहायता समूह में शामिल हुई तब भावना ने केवल प्लस टू की पढ़ाई की थी। स्वयं सहायता समूहों के बीच भावना नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरीं। हैदराबाद में इन्हें एसएचजी डाटा के संग्रहण की सॉफ्टवेयर ट्रेनिंग के लिए भेजा गया। स्वयं सहायता समूह में महिलाओं को जोड़ने से लेकर, किसान के रूप काम करने के साथ इन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी। अब भावना केवल ड्रोन दीदी ही नहीं बल्कि ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जोड़ने वाले केंद्र के लिए काम करती हैं। मेलों और प्रदर्शनियों में एसएचजी की महिलाओं की बनाई सामग्री लेकर जाती हैं। इस साल वे एमबीए का फाइनल सेमेस्टर दे रही हैं। वे बताती हैं कि सारे कार्य उन्होंने शादी के बाद किए।
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राजेश कुमारी वर्ष 2017 से एसएचजी से जुड़ी। किसान राजेश कुमार पशु पालन किया करती थीं। दो साल पहले नमो ड्रोन दीदी के तहत उन्हें ड्रोन सिखाया। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के तहत ड्रोन मिला। राजेश बताती हैं कि एसएसजी में ग्रामीण महिलाओं के साथ उत्पाद बनाने के साथ-साथ प्रदर्शनियों में भी जाती रही हैं मगर ड्रोन की ट्रेनिंग के बाद से अपने खेतों के साथ दूसरे किसानों के खेतों में भी खाद, दवा आदि स्प्रे कराने में सहयोग करती हैं।
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राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन प्रोजेक्ट अधिकारी दिप्ती ढ़ीढसा कहती हैं कि ये महिलाएं कई कार्यों में दक्ष हैं, अन्यों के लिए नजीर हैं। इन ग्रामीण और मूलत: किसान महिलाएं कई कार्य एक साथ कर रही हैं। गांव में खेती के साथ महिलाओं को संगठित करने, सरकारी योजनाओं से जोड़ने वाले केंद्र में काम करने के साथ उन्होंने उच्च शिक्षा भी हासिल किया है।
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