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Gurugram News: सिस्टम की बेरुखी से हो रहा सपनों का रन आउट
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कोच बोले- साई सेंटर का अभाव, महंगी निजी अकादमियां और रुकी डाइट राशि ने बढ़ाई खिलाड़ियों की मुश्किलें
नंबर गेम - 05 से 10 हजार तक है निजी अकादमियों की मासिक फीस
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। मिलेनियम सिटी की गगनचुंबी इमारतों के बीच खेल सुविधाएं कहीं गुम हो गई हैं। जिले में सिस्टम की बेरुखी के कारण खिलाड़ियों के सपनों का रन आउट हो रहा है। संवाद में विभिन्न खेलों के कोच ने कहा कि यहां खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) सेंटर का अभाव, निजी अकादमियों की ऊंची फीस और खेल नर्सरी के खिलाड़ियों को समय पर डाइट राशि न मिलने के कारण उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रशिक्षकों का कहना है कि प्रशासन खेलों को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे तो करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं है।
खेल विशेषज्ञों और प्रशिक्षकों का मानना है कि बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं के अभाव में जिले के खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक तो पहुंच जाते हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने में पिछड़ जाते हैं। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को बीच में ही छोड़ने को मजबूर हैं। जिले में अधिकांश उन्नत प्रशिक्षण निजी अकादमियों के माध्यम से उपलब्ध है, जहां मासिक फीस 5 हजार से 10 हजार रुपये तक है। प्रशिक्षकों का कहना है कि खेल प्रतिभा पैसे की मोहताज नहीं होनी चाहिए लेकिन वर्तमान व्यवस्था में आर्थिक स्थिति ही खिलाड़ियों के भविष्य का फैसला कर रही है। कोच का कहना है कि यदि जिले में भारतीय खेल प्राधिकरण का सेंटर स्थापित किया जाए तो खिलाड़ियों को बेहतर और किफायती प्रशिक्षण मिल सकेगा। इससे जिले के खिलाड़ियों को बाहर के शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
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खेल प्रतिभा पैसे की मोहताज नहीं होनी चाहिए
जिले में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं का अभाव उन्हें आगे बढ़ने से रोक रहा है। आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र नहीं होने के कारण खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर के बाद संघर्ष करने लगते हैं। - सुनील डबास, कब्बडी प्रशिक्षक
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जिले के क्रिकेट खिलाड़ियों को मेडिकल टेस्ट करवाने के लिए दूसरे जिले में जाना पड़ता है। यह स्थिति बताती है कि प्रशासन खेलों को लेकर कितना गंभीर है। -मोहन भट्ट, क्रिकेट कोच
निजी अकादमियों की फीस इतनी अधिक है कि सामान्य परिवार के बच्चे वहां प्रशिक्षण लेने की सोच भी नहीं सकते। इससे कई प्रतिभाएं शुरुआत में ही दम तोड़ देती हैं। -अजय, रोलर स्केटिंग, प्रशिक्षक
सरकार खेल नर्सरी चलाने की बात करती है लेकिन खिलाड़ियों को मिलने वाली डाइट राशि तक समय पर नहीं मिल रही। बिना उचित पोषण के खिलाड़ी कैसे बेहतर प्रदर्शन करेंगे। -जयदीप, कायाकिंग और कैनोइंग प्रशिक्षक
यदि जिले में साई सेंटर स्थापित हो जाए तो खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय कोचिंग, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ी तैयार होंगे। - भूषण सैनी, बाक्सिंग प्रशिक्षक
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नंबर गेम - 05 से 10 हजार तक है निजी अकादमियों की मासिक फीस
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। मिलेनियम सिटी की गगनचुंबी इमारतों के बीच खेल सुविधाएं कहीं गुम हो गई हैं। जिले में सिस्टम की बेरुखी के कारण खिलाड़ियों के सपनों का रन आउट हो रहा है। संवाद में विभिन्न खेलों के कोच ने कहा कि यहां खेल इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) सेंटर का अभाव, निजी अकादमियों की ऊंची फीस और खेल नर्सरी के खिलाड़ियों को समय पर डाइट राशि न मिलने के कारण उनका भविष्य प्रभावित हो रहा है। प्रशिक्षकों का कहना है कि प्रशासन खेलों को बढ़ावा देने के बड़े-बड़े दावे तो करता है, लेकिन जमीनी स्तर पर खिलाड़ियों को मूलभूत सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं है।
खेल विशेषज्ञों और प्रशिक्षकों का मानना है कि बेहतर प्रशिक्षण सुविधाओं के अभाव में जिले के खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक तो पहुंच जाते हैं लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सफलता हासिल करने में पिछड़ जाते हैं। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी केवल संसाधनों की कमी के कारण अपने सपनों को बीच में ही छोड़ने को मजबूर हैं। जिले में अधिकांश उन्नत प्रशिक्षण निजी अकादमियों के माध्यम से उपलब्ध है, जहां मासिक फीस 5 हजार से 10 हजार रुपये तक है। प्रशिक्षकों का कहना है कि खेल प्रतिभा पैसे की मोहताज नहीं होनी चाहिए लेकिन वर्तमान व्यवस्था में आर्थिक स्थिति ही खिलाड़ियों के भविष्य का फैसला कर रही है। कोच का कहना है कि यदि जिले में भारतीय खेल प्राधिकरण का सेंटर स्थापित किया जाए तो खिलाड़ियों को बेहतर और किफायती प्रशिक्षण मिल सकेगा। इससे जिले के खिलाड़ियों को बाहर के शहरों पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा।
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खेल प्रतिभा पैसे की मोहताज नहीं होनी चाहिए
जिले में प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है, लेकिन सुविधाओं का अभाव उन्हें आगे बढ़ने से रोक रहा है। आधुनिक प्रशिक्षण केंद्र नहीं होने के कारण खिलाड़ी राष्ट्रीय स्तर के बाद संघर्ष करने लगते हैं। - सुनील डबास, कब्बडी प्रशिक्षक
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जिले के क्रिकेट खिलाड़ियों को मेडिकल टेस्ट करवाने के लिए दूसरे जिले में जाना पड़ता है। यह स्थिति बताती है कि प्रशासन खेलों को लेकर कितना गंभीर है। -मोहन भट्ट, क्रिकेट कोच
निजी अकादमियों की फीस इतनी अधिक है कि सामान्य परिवार के बच्चे वहां प्रशिक्षण लेने की सोच भी नहीं सकते। इससे कई प्रतिभाएं शुरुआत में ही दम तोड़ देती हैं। -अजय, रोलर स्केटिंग, प्रशिक्षक
सरकार खेल नर्सरी चलाने की बात करती है लेकिन खिलाड़ियों को मिलने वाली डाइट राशि तक समय पर नहीं मिल रही। बिना उचित पोषण के खिलाड़ी कैसे बेहतर प्रदर्शन करेंगे। -जयदीप, कायाकिंग और कैनोइंग प्रशिक्षक
यदि जिले में साई सेंटर स्थापित हो जाए तो खिलाड़ियों को उच्च स्तरीय कोचिंग, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और बेहतर सुविधाएं मिल सकती हैं। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पदक जीतने वाले खिलाड़ी तैयार होंगे। - भूषण सैनी, बाक्सिंग प्रशिक्षक