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Gurugram News: फोन कॉल में उलझा रहा डॉक्टर, जिंदगी की जंग हार गया मासूम
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अस्पताल परिसर के बाहर खड़े परिजन
-मांडीखेड़ा अस्पताल में दस माह के बच्चे की इलाज के दौरान मौत, परिजनों ने काटा हंगामा
संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह जिले के जिला नागरिक अस्पताल मांडीखेड़ा में एक बार फिर डॉक्टरों की कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। मंगलवार देर रात 10 महीने के एक मासूम बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने बच्चे की गंभीर हालत के बावजूद समय पर इलाज नहीं किया और फोन पर बातचीत में व्यस्त रहा। मासूम की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर के बाहर जमकर हंगामा किया और डॉक्टर के खिलाफ नाराजगी जताई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मृतक बच्चे के पिता नजर खान निवासी गांव औथा ने आरोप लगाया कि देर रात बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे तुरंत मांडीखेड़ा अस्पताल लाया गया था। उस समय बच्चे को तेज बुखार की समस्या बनी हुई थी, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार डॉक्टर को बच्चे की गंभीर स्थिति के बारे में बताया, लेकिन डॉक्टर हर बार 5-10 मिनट में आने की बात कहकर टालता रहा। आरोप है कि करीब डेढ़ घंटे तक डॉक्टर ने बच्चे को देखने की जहमत तक नहीं उठाई।
परिजनों के अनुसार जब बच्चे की हालत ज्यादा नाजुक हो गई तो उन्होंने दोबारा डॉक्टर को बुलाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और मासूम ने दम तोड़ दिया। इसके बाद डॉक्टर मौके पर पहुंचा और बच्चे को अंदर ले जाकर इलाज करने की बात कहने लगा। इस पर परिजन भड़क उठे और कहा कि जब बच्चा जीवित था तब इलाज नहीं किया गया, अब मौत के बाद इलाज का क्या फायदा। घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा खड़ा हो गया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग उठाई।
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लोग बोले, लगातार बढ़ रहे लापरवाही के मामले :
लोगों का कहना है कि मांडीखेड़ा अस्पताल में लापरवाही के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। हालांकि मामला बढता देख डोक्टरों ने परिजनों के साथ आए हुए लोगों के साथ फैसला कर लिया।
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पहले भी विवादों में रहा है अस्पताल :
गौरतलब है कि जिला नागरिक अस्पताल मांडीखेड़ा पहले भी विवादों में रह चुका है। 30 जुलाई 2025 को दोहा गांव की सरजीना नामक महिला की डिलीवरी के दौरान नवजात शिशु का हाथ कटने का मामला सामने आया था, जिसके बाद अस्पताल में जमकर विरोध हुआ था। वहीं करीब दो साल पहले पिनगवां क्षेत्र की एक गर्भवती महिला की भी कथित लापरवाही के चलते मौत हो गई थी।
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स्वास्थ्य सेवाओं पर उठ रहे सवाल :
लगातार सामने आ रहे मामलों ने जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी दर्दनाक घटना का सामना न करना पड़े।
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मामला के बारे में जैसे ही जानकारी मुझे मिली तो जांच शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम के बारे में मुझे जानकारी नहीं है क्योंकि मैं मीटिंग में चली गई थी। पूरे मामले की गहनता से जांच कराई जाएगी। जांच में जो कुछ भी निकल कर सामने आएगा उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- डा. ज्योत्सना, सिविल सर्जन, नूंह
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संवाद न्यूज एजेंसी
नूंह। नूंह जिले के जिला नागरिक अस्पताल मांडीखेड़ा में एक बार फिर डॉक्टरों की कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। मंगलवार देर रात 10 महीने के एक मासूम बच्चे की इलाज के दौरान मौत हो गई। परिजनों का आरोप है कि ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर ने बच्चे की गंभीर हालत के बावजूद समय पर इलाज नहीं किया और फोन पर बातचीत में व्यस्त रहा। मासूम की मौत के बाद गुस्साए परिजनों ने अस्पताल परिसर के बाहर जमकर हंगामा किया और डॉक्टर के खिलाफ नाराजगी जताई। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
मृतक बच्चे के पिता नजर खान निवासी गांव औथा ने आरोप लगाया कि देर रात बच्चे की तबीयत अचानक बिगड़ने पर उसे तुरंत मांडीखेड़ा अस्पताल लाया गया था। उस समय बच्चे को तेज बुखार की समस्या बनी हुई थी, जिससे उसकी हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कई बार डॉक्टर को बच्चे की गंभीर स्थिति के बारे में बताया, लेकिन डॉक्टर हर बार 5-10 मिनट में आने की बात कहकर टालता रहा। आरोप है कि करीब डेढ़ घंटे तक डॉक्टर ने बच्चे को देखने की जहमत तक नहीं उठाई।
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परिजनों के अनुसार जब बच्चे की हालत ज्यादा नाजुक हो गई तो उन्होंने दोबारा डॉक्टर को बुलाने की कोशिश की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी और मासूम ने दम तोड़ दिया। इसके बाद डॉक्टर मौके पर पहुंचा और बच्चे को अंदर ले जाकर इलाज करने की बात कहने लगा। इस पर परिजन भड़क उठे और कहा कि जब बच्चा जीवित था तब इलाज नहीं किया गया, अब मौत के बाद इलाज का क्या फायदा। घटना के बाद अस्पताल परिसर में भारी हंगामा खड़ा हो गया। परिजनों और स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और दोषी डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग उठाई।
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लोग बोले, लगातार बढ़ रहे लापरवाही के मामले :
लोगों का कहना है कि मांडीखेड़ा अस्पताल में लापरवाही के मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा। हालांकि मामला बढता देख डोक्टरों ने परिजनों के साथ आए हुए लोगों के साथ फैसला कर लिया।
पहले भी विवादों में रहा है अस्पताल :
गौरतलब है कि जिला नागरिक अस्पताल मांडीखेड़ा पहले भी विवादों में रह चुका है। 30 जुलाई 2025 को दोहा गांव की सरजीना नामक महिला की डिलीवरी के दौरान नवजात शिशु का हाथ कटने का मामला सामने आया था, जिसके बाद अस्पताल में जमकर विरोध हुआ था। वहीं करीब दो साल पहले पिनगवां क्षेत्र की एक गर्भवती महिला की भी कथित लापरवाही के चलते मौत हो गई थी।
स्वास्थ्य सेवाओं पर उठ रहे सवाल :
लगातार सामने आ रहे मामलों ने जिला अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने स्वास्थ्य विभाग और जिला प्रशासन से मांग की है कि दोषी कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई कर अस्पताल की व्यवस्थाओं में सुधार किया जाए, ताकि भविष्य में किसी और परिवार को ऐसी दर्दनाक घटना का सामना न करना पड़े।
मामला के बारे में जैसे ही जानकारी मुझे मिली तो जांच शुरू कर दी गई है। पोस्टमार्टम के बारे में मुझे जानकारी नहीं है क्योंकि मैं मीटिंग में चली गई थी। पूरे मामले की गहनता से जांच कराई जाएगी। जांच में जो कुछ भी निकल कर सामने आएगा उसके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- डा. ज्योत्सना, सिविल सर्जन, नूंह