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डीएमआरसी 22 अक्तूबर तक करेगी रेपिड मेट्रो का टेकओवर
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गुरुग्राम। रेपिड मेट्रो को अधिग्रहण करने के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) को एक सप्ताह का समय और मिल गया है। डीएमआरसी ने बुधवार तक रैपिड मेट्रो को अधिग्रहण करना था। रैपिड मेट्रो रेल गुरुग्राम लिमिटेड (आरएमजीएल) द्वारा वेंडरों से किए गए 52 समझौतों को भी डीएमआरसी को स्थानांतरित किया जाना है। इन समझौतों की जानकारी लेने के लिए आरएमजीएल, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) व डीएमआरसी के अधिकारियों ने आपस में बैठक की। बैठक में सहमति बनने के बाद अधिग्रहण की समयावधि 16 अक्तूबर से बढ़ाकर 22 अक्तूबर तक किए जाने का आग्रह दोनों पक्षों ने पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय से किया। अदालत ने इस आग्रह को स्वीकार कर लिया है।
अधिकारियों की मानें तो आरएमजीएल के 52 वेंडर एग्रीमेंट हैं, जिन्हें पढ़ने में डीएमआरसी को कुछ समय लग रहा है। इन वेंडर एग्रीमेंट के अंतर्गत डीएमआरसी यह भी स्पष्ट करने में लगा है कि रेपिड मेट्रो के संचालन में कितना स्टाफ लगा हुआ है। किस व्यक्ति अथवा कंपनी के साथ रैपिड मेट्रो द्वारा किस तरह के समझौते किए गए हैं। इन समझौतों को पढ़ने के लिए ही एचएसवीपी व डीएमआरसी के अधिकारियों ने आरएमजीएल से अदालत के माध्यम से आग्रह कर एक सप्ताह का समय मांगा था। दोनों पक्षों की सहमति से अदालत ने 22 अक्तूबर तक का समय दे दिया है।
गौरतलब है कि आईएल एंड एफएस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से इसका करार कर नवंबर 2013 से रेपिड मेट्रो का निर्माण किया था। इसका संचालन आरएमजीएल द्वारा किया जा रहा है। पहले चरण में शुरू किया गया 5.1 किमी सिकंदरपुर से शंकर चौक तक तक के रूट का सेक्टर-56 तक विस्तार किया गया। वर्तमान में रेपिड मेट्रो में करीब 60 हजार यात्री सफर कर रहे हैं। आरएमजीएल ने लगातार हो रहे घाटे का हवाला देते हुए 7 जून को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) को 90 दिन का नोटिस देकर सेवाएं स्थगित करने को कहा था।
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एचएसवीपी ने इस नोटिस को अवैध बताते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायलय में याचिका दायर की थी। अदालत ने मामले में दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को मद्देनजर रखते हुए 6 सितंबर को स्थगन आदेश जारी करते हुए 9 सितंबर की तारीख निश्चित की थी। सोमवार को हुई सुनवाई में अदालत ने इस स्थगन आदेश को 17 सितंबर तक बढ़ा दिया है। अदालत ने अपने अंतरिम आदेशों में 10 बिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा कि एचएसवीपी को रेपिड मेट्रो को अपने अधीन करने को कहा था।
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अधिकारियों की मानें तो आरएमजीएल के 52 वेंडर एग्रीमेंट हैं, जिन्हें पढ़ने में डीएमआरसी को कुछ समय लग रहा है। इन वेंडर एग्रीमेंट के अंतर्गत डीएमआरसी यह भी स्पष्ट करने में लगा है कि रेपिड मेट्रो के संचालन में कितना स्टाफ लगा हुआ है। किस व्यक्ति अथवा कंपनी के साथ रैपिड मेट्रो द्वारा किस तरह के समझौते किए गए हैं। इन समझौतों को पढ़ने के लिए ही एचएसवीपी व डीएमआरसी के अधिकारियों ने आरएमजीएल से अदालत के माध्यम से आग्रह कर एक सप्ताह का समय मांगा था। दोनों पक्षों की सहमति से अदालत ने 22 अक्तूबर तक का समय दे दिया है।
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गौरतलब है कि आईएल एंड एफएस इंफ्रास्ट्रक्चर कंपनी ने हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण से इसका करार कर नवंबर 2013 से रेपिड मेट्रो का निर्माण किया था। इसका संचालन आरएमजीएल द्वारा किया जा रहा है। पहले चरण में शुरू किया गया 5.1 किमी सिकंदरपुर से शंकर चौक तक तक के रूट का सेक्टर-56 तक विस्तार किया गया। वर्तमान में रेपिड मेट्रो में करीब 60 हजार यात्री सफर कर रहे हैं। आरएमजीएल ने लगातार हो रहे घाटे का हवाला देते हुए 7 जून को हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (एचएसवीपी) को 90 दिन का नोटिस देकर सेवाएं स्थगित करने को कहा था।
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एचएसवीपी ने इस नोटिस को अवैध बताते हुए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायलय में याचिका दायर की थी। अदालत ने मामले में दोनों पक्षों के बीच हुए समझौते को मद्देनजर रखते हुए 6 सितंबर को स्थगन आदेश जारी करते हुए 9 सितंबर की तारीख निश्चित की थी। सोमवार को हुई सुनवाई में अदालत ने इस स्थगन आदेश को 17 सितंबर तक बढ़ा दिया है। अदालत ने अपने अंतरिम आदेशों में 10 बिंदुओं का जिक्र करते हुए कहा कि एचएसवीपी को रेपिड मेट्रो को अपने अधीन करने को कहा था।