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Gurugram News: यूपीआई पर एमडीआर की चर्चा से जिले के कारोबारी चिंतित
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कारोबारियों को डर-शुल्क लगा तो बढ़ेगी लागत, छोटे दुकानदारों पर पड़ेगा ज्यादा असर
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। क्यूआर कोड दिखाइए और भुगतान पाइए की आदत डाल चुके गुरुग्राम के कारोबारियों के बीच यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाए जाने की चर्चा ने चिंता बढ़ा दी है। अगर छोटे-छोटे डिजिटल भुगतान पर भी शुल्क लगा तो रोजाना के कारोबार की लागत बढ़ेगी। इसका सीधा असर कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे दुकानदारों पर पड़ सकता है। त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले इस तरह की चर्चा ने कारोबारियों की बेचैनी और बढ़ा दी है।
कारोबारियों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई ने बाजार में लेनदेन को काफी आसान बनाया है। ग्राहक 20-50 रुपये की खरीदारी से लेकर हजारों रुपये तक का भुगतान मोबाइल से कर देते हैं। जेब में नकदी नहीं होने पर भी खरीदारी पूरी हो जाती है। ऐसे में यूपीआई पर किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क लागू होने की स्थिति में कारोबारी और ग्राहक दोनों प्रभावित हो सकते हैं। गुरुग्राम के सदर बाजार, पटौदी रोड, बादशाहपुर, सोहना और अन्य प्रमुख बाजारों में छोटे-बड़े कारोबार में यूपीआई भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। किराना, दवा, कपड़ा, खाद-बीज, हार्डवेयर और अन्य खुदरा दुकानों पर ग्राहक क्यूआर कोड के जरिये भुगतान करते हैं।
यदि डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाया गया तो हर दिन होने वाले सैकड़ों छोटे लेनदेन पर अतिरिक्त लागत बढ़ेगी।
- शंत कुमार, कारोबारी
यदि भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो हम नकद भुगतान को प्राथमिकता देना शुरू कर देंगे।
- मनोज जैन, महासचिव सेक्टर - 15 पार्ट-2
एमडीआर लागू होने की स्थिति में छोटे दुकानदार डिजिटल भुगतान से दूरी बनाकर नकदी की ओर लौट सकते हैं।
- नितिन जैन, कारोबारी
एमडीआर लगाया तो नकदी का इस्तेमाल बढ़ सकता है। बैंकों में नकदी जमा और निकासी के लिए भीड़ बढ़ने की स्थिति बनेगी।
- सोनू मलिक, दुकानदार
यदि बड़े भुगतान पर शुल्क का बोझ बढ़ता है तो दुकानदार इसकी भरपाई के लिए सामान की कीमतों में बदलाव कर सकते हैं।
- अखिल गुप्ता, दुकानदार
अब अगर यूपीआई भुगतान पर हमें सरकार को पैसे देने होंगे तो हमारा मुनाफा ही कम हो जाएगा।
- नवीन कुमार, दुकानदार
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। क्यूआर कोड दिखाइए और भुगतान पाइए की आदत डाल चुके गुरुग्राम के कारोबारियों के बीच यूपीआई भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (एमडीआर) लगाए जाने की चर्चा ने चिंता बढ़ा दी है। अगर छोटे-छोटे डिजिटल भुगतान पर भी शुल्क लगा तो रोजाना के कारोबार की लागत बढ़ेगी। इसका सीधा असर कम मार्जिन पर काम करने वाले छोटे दुकानदारों पर पड़ सकता है। त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले इस तरह की चर्चा ने कारोबारियों की बेचैनी और बढ़ा दी है।
कारोबारियों के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में यूपीआई ने बाजार में लेनदेन को काफी आसान बनाया है। ग्राहक 20-50 रुपये की खरीदारी से लेकर हजारों रुपये तक का भुगतान मोबाइल से कर देते हैं। जेब में नकदी नहीं होने पर भी खरीदारी पूरी हो जाती है। ऐसे में यूपीआई पर किसी तरह का अतिरिक्त शुल्क लागू होने की स्थिति में कारोबारी और ग्राहक दोनों प्रभावित हो सकते हैं। गुरुग्राम के सदर बाजार, पटौदी रोड, बादशाहपुर, सोहना और अन्य प्रमुख बाजारों में छोटे-बड़े कारोबार में यूपीआई भुगतान का इस्तेमाल तेजी से बढ़ा है। किराना, दवा, कपड़ा, खाद-बीज, हार्डवेयर और अन्य खुदरा दुकानों पर ग्राहक क्यूआर कोड के जरिये भुगतान करते हैं।
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यदि डिजिटल भुगतान पर शुल्क लगाया गया तो हर दिन होने वाले सैकड़ों छोटे लेनदेन पर अतिरिक्त लागत बढ़ेगी।
- शंत कुमार, कारोबारी
यदि भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क देना पड़ा तो हम नकद भुगतान को प्राथमिकता देना शुरू कर देंगे।
- मनोज जैन, महासचिव सेक्टर - 15 पार्ट-2
एमडीआर लागू होने की स्थिति में छोटे दुकानदार डिजिटल भुगतान से दूरी बनाकर नकदी की ओर लौट सकते हैं।
- नितिन जैन, कारोबारी
एमडीआर लगाया तो नकदी का इस्तेमाल बढ़ सकता है। बैंकों में नकदी जमा और निकासी के लिए भीड़ बढ़ने की स्थिति बनेगी।
- सोनू मलिक, दुकानदार
यदि बड़े भुगतान पर शुल्क का बोझ बढ़ता है तो दुकानदार इसकी भरपाई के लिए सामान की कीमतों में बदलाव कर सकते हैं।
- अखिल गुप्ता, दुकानदार
अब अगर यूपीआई भुगतान पर हमें सरकार को पैसे देने होंगे तो हमारा मुनाफा ही कम हो जाएगा।
- नवीन कुमार, दुकानदार