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कोविड श्मशान घाट के आसपास की बस्तियों में रहना हुआ मुश्किल

Sun, 09 May 2021 10:44 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 09 May 2021 10:44 PM IST
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Difficult to live in settlements around Kovid crematorium
गुरुग्राम। शहर के आधा दर्जन कोविड श्मशान घाट के आसपास की बस्तियों और बाजारों में शवों के अंतिम संस्कार के धुएं की वजह से लोगों का रहना मुश्किल हो गया है। सबसे ज्यादा बुरा हाल तो रामबाग स्थित मदनपुरी श्मशान घाट का है। यहां की आधा दर्जन मलिन बस्तियों और बाजारों के करीब 20 हजार लोग न खा पा रहे हैं और नहीं सो पा रहे हैं। इन इलाकों के लोगों को धुएं के साथ-साथ अजीब सी गंध आती है जिसके कारण लोगों को उल्टी हो रही है। ऐसा ही हाल शहर के अन्य कोविड श्मशान घाटों के आसपास की बस्तियों में रहने वाले लोगों का है। इन इलाकों के लोगों ने नगर निगम और प्रशासन से राहत प्रदान करने का अनुरोध किया है लेकिन अभी तक कोई सुनवाई नहीं हो रही है।
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रामबाग श्मशान घाट को ही लीजिए, यहां के वीरनगर, अर्जुनगर, पटौदी चौक, भूतेश्वर मंदिर के आसपास की कॉलोनियों के निवासियों का रहना मुश्किल हो गया है। यह श्मशान घाट बड़ा है और यहां पर सर्वाधिक कोविड शवों का अंतिम संस्कार किया जाता है। अप्रैल के महीने में तो यहां सुबह से लेकर रात तक चिंताएं जलती रहती थीं। इसके अलावा एलपीसी पर आधारित मशीन से भी शवों का अंतिम संस्कार होता है जिसकी गंध और धुएं के कारण प्रदूषण के साथ-साथ बीमारियां भी बढ़ रही हैं। यही हाल सेक्टर-37, अतुल कटारिया चौक, झाड़सा रोड सहित आधा दर्जन श्मशान घाट घाटों का है।
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रामबाग श्मशान घाट के पास वीरनगर निवासी दीनानाथ और उनके परिवार की चिताओं के धुएं के कारण बुरी हालत है। उनका परिवार न ठीक से सो पा रहा है और न ही खाना खा पा रहा है। दिन-रात अजीब सी गंध आती है, जिसकी वजह से उल्टियां आती हैं। इसी इलाके के कालू, रमेश और महिला रामवती का कहना है कि अब तो रहना मुश्किल हो गया है। गंध की वजह से खाना नहीं बना पा रहे हैं। कोरोना के कारण रिश्तेदार भी अपने घरों में नहीं आने देते। एक तो कोविड श्मशान घाट के पास रहते हैं ऐसे में उन्हें भी संक्रमण का खतरा बना रहता है। इन सभी का कहना है कि ऐसे में जाएं तो कहां जाएं।
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अर्जुन नगर निवासी रामपाल और फागुराम का कहना है कि रात में घरों के अंदर धुआं और अजीब सी गंध आने के कारण रात को सो नहीं पाते हैं। ऐसे में कई बार सड़क किनारे फुटपाथ पर सोने को मजबूर हुए हैं। स्थिति यह है कि दरवाजा खोलते ही अजीब सी गंध आने लगती है। इतना ही नहीं जिस तरह से दिन-रात चिताएं जलती हैं, उनको देखकर बच्चों और महिलाओं को डर लगने लगा है।
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