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Gurugram News: महापंचायत में मुसलमानों के बहिष्कार का फैसला
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सेक्टर -57 से धार्मिक स्थल हटाने की मांग, मामले की पैरवी के लिए 101 सदस्यीय कमेटी का गठन
सात दिन के भीतर आरोपी युवकों को मुकदमे से निकालने की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। नूंह में हुए बवाल के बाद सेक्टर-57 में नायब इमाम की हत्या के आरोपियों पर पुलिस कार्रवाई के बाद रविवार को सर्व समाज की महापंचायत हुई। जिसमें बे गुनाह युवाओं को फंसाने की बात कही गई। पंचायत के दौरान प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर युवाओं के नाम वापस नहीं हुए तो वह सख्त फैसला लेंगे। सेक्टर-57 से धर्मस्थल हटाया जाए। पंचायत के दौरान लसखूवास की रहने वाली बबिता ने कहा कि अगर धर्मस्थल को तोड़ने की बात होती है तो सबसे पहले वह तोड़ने के लिए तैयार है। पंचायत में मुसलमानों के बहिष्कार का फैसला लिया गया।
पंचायत की अध्यक्षता तिगरा गांव के सरपंच अंतर सिंह ने की। पंचायत के दौरान सेक्टर-57 से धर्मस्थल हटाने की बात कही गई। जो भी युवा इस मामले में फंसे हैं। उसकी निष्पक्ष जांच हो और सात दिन के भीतर उनको मामले से बाहर निकाला जाए। समाज का कोई भी व्यक्ति मुस्लिम किरायेदार नहीं रखेगा और न ही उनसे कोई सामान खरीदेगा। सामान हिंदू दुकानदार से खरीदना है चाहे वह पांच रुपये मंहगा ही क्यों न हो।
बैठक के दौरान हिन्दू नेता कुलभूषण भारद्वाज ने कहा कि नूंह की घटना के बाद मुख्यमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर उनसे मेवात नहीं संभलता है तो उसे यूपी में योगी को दें दे। इसके साथ ही सोहना से विधायक संजय सिंह ने नूंह की घटना के बाद मुख्यमंत्री की ओर से बुलडोजर चलवाने की तारीफ की। युवा कांग्रेसी नेता वर्धन यादव ने कहा कि जितनी पुलिस पंचायत के लिए लगाई गई है। सरकार ने इतना इंतजाम मेवात में किया होता तो यह दिन ना देखने पड़ते। पंचायत के अंत में 101 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई। जो पूरे मामले की पैरवी करेगी। सोमवार की सुबह दस बजे कमेटी के लोग उपायुक्त और पुलिस आयुक्त को पंचायत में हुए फैसले को लेकर ज्ञापन सौंपेंगे।
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गांव में पुलिस का किया जाएगा विरोधपंचायत के दौरान इस बात का फैसला लिया गया कि मामले में किसी भी आरोपी को दबोचने के लिए कोई भी पुलिस कर्मी किसी गांव में नहीं घुसेगा। अगर पुलिस गांव में जाती है तो उसका विरोध किया जाएगा। अगर पुलिस मुकदमे के नाम पर किसी को परेशान करती है तो इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा।
गांव को चारों ओर से किया गया था सील आने-जाने वालों की हुई वीडियोग्राफी
सर्व समाज की पंचायत को लेकर पुलिस अलर्ट मोड पर थी। पहले फ्लैग मार्च कर चुकी थी। लोगों को धारा -144 को लेकर जागरूक किया गया था। गांव में घुसने वाले हर मार्ग पर पुलिस नाका लगाया गया था। आने जाने वाले वाहनों की जांच की जा रही थी। उनकी वीडियोग्राफी भी हो रही थी। जांच के दौरान एक कार में डंडे मिले उसके बाद पुलिस ने उसे घेर लिया। बाद में उसे अंदर जाने से मना कर दिया गया।
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सात दिन के भीतर आरोपी युवकों को मुकदमे से निकालने की चेतावनी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। नूंह में हुए बवाल के बाद सेक्टर-57 में नायब इमाम की हत्या के आरोपियों पर पुलिस कार्रवाई के बाद रविवार को सर्व समाज की महापंचायत हुई। जिसमें बे गुनाह युवाओं को फंसाने की बात कही गई। पंचायत के दौरान प्रशासन को सात दिन का अल्टीमेटम देते हुए कहा कि अगर युवाओं के नाम वापस नहीं हुए तो वह सख्त फैसला लेंगे। सेक्टर-57 से धर्मस्थल हटाया जाए। पंचायत के दौरान लसखूवास की रहने वाली बबिता ने कहा कि अगर धर्मस्थल को तोड़ने की बात होती है तो सबसे पहले वह तोड़ने के लिए तैयार है। पंचायत में मुसलमानों के बहिष्कार का फैसला लिया गया।
पंचायत की अध्यक्षता तिगरा गांव के सरपंच अंतर सिंह ने की। पंचायत के दौरान सेक्टर-57 से धर्मस्थल हटाने की बात कही गई। जो भी युवा इस मामले में फंसे हैं। उसकी निष्पक्ष जांच हो और सात दिन के भीतर उनको मामले से बाहर निकाला जाए। समाज का कोई भी व्यक्ति मुस्लिम किरायेदार नहीं रखेगा और न ही उनसे कोई सामान खरीदेगा। सामान हिंदू दुकानदार से खरीदना है चाहे वह पांच रुपये मंहगा ही क्यों न हो।
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बैठक के दौरान हिन्दू नेता कुलभूषण भारद्वाज ने कहा कि नूंह की घटना के बाद मुख्यमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए। अगर उनसे मेवात नहीं संभलता है तो उसे यूपी में योगी को दें दे। इसके साथ ही सोहना से विधायक संजय सिंह ने नूंह की घटना के बाद मुख्यमंत्री की ओर से बुलडोजर चलवाने की तारीफ की। युवा कांग्रेसी नेता वर्धन यादव ने कहा कि जितनी पुलिस पंचायत के लिए लगाई गई है। सरकार ने इतना इंतजाम मेवात में किया होता तो यह दिन ना देखने पड़ते। पंचायत के अंत में 101 सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई। जो पूरे मामले की पैरवी करेगी। सोमवार की सुबह दस बजे कमेटी के लोग उपायुक्त और पुलिस आयुक्त को पंचायत में हुए फैसले को लेकर ज्ञापन सौंपेंगे।
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गांव में पुलिस का किया जाएगा विरोधपंचायत के दौरान इस बात का फैसला लिया गया कि मामले में किसी भी आरोपी को दबोचने के लिए कोई भी पुलिस कर्मी किसी गांव में नहीं घुसेगा। अगर पुलिस गांव में जाती है तो उसका विरोध किया जाएगा। अगर पुलिस मुकदमे के नाम पर किसी को परेशान करती है तो इसका खामियाजा उसे भुगतना पड़ेगा।
गांव को चारों ओर से किया गया था सील आने-जाने वालों की हुई वीडियोग्राफी
सर्व समाज की पंचायत को लेकर पुलिस अलर्ट मोड पर थी। पहले फ्लैग मार्च कर चुकी थी। लोगों को धारा -144 को लेकर जागरूक किया गया था। गांव में घुसने वाले हर मार्ग पर पुलिस नाका लगाया गया था। आने जाने वाले वाहनों की जांच की जा रही थी। उनकी वीडियोग्राफी भी हो रही थी। जांच के दौरान एक कार में डंडे मिले उसके बाद पुलिस ने उसे घेर लिया। बाद में उसे अंदर जाने से मना कर दिया गया।