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पक्षी अस्पतालों में भी बर्ड फ्लू का खौफ, कौवों को नहीं किया जा रहा भर्ती

Thu, 14 Jan 2021 11:15 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Thu, 14 Jan 2021 11:15 PM IST
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Crows are not recruited, kept herons separate from other birds
गुुरुग्राम। विभिन्न राज्यों में फैले बर्ड फ्लू की दहशत के बीच अब पक्षी अस्पतालों में भी खासी एहतियात बरती जा रही है। अब तक के आंकड़ों के मुताबिक, बर्ड फ्लू का प्रकोप मुर्गियों, कौवों व बगुलों में ज्यादा है। यही वजह है कि अन्य पक्षियों को फ्लू से बचाने के लिए पक्षी अस्पतालों में कौवों को भर्ती नहीं किया जा रहा है। वहीं, मुर्गियों पर पोल्ट्री फॉर्म संचालक विशेष नजर रख रहे हैं।
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जैकमपुरा स्थित बर्ड हॉस्पिटल के डॉक्टर सतपाल गौतम ने बताया कि कौवों को किसी सूरत में भर्ती नहीं कर रहे हैं जबकि बगुलों को भर्ती तो कर रहे हैं लेकिन अन्य पक्षियों से पूरी तरह से अलग रखा जा रहा है। पक्षी रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, रात को पारा 3.2 डिग्री सेल्सियस तक गिर रहा है, जिसकी वजह से ठंड में पक्षी बीमार पड़ रहे हैं। पिछले तीन-चार दिन में एक दर्जन से ज्यादा डॉगी अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। डॉ. गौतम ने बताया कि बाहर से आने वाले पक्षी ही बीमारी लेकर आते हैं। ठंड के कारण जो कौवे मर रहे हैं, उनमें कोई बीमारी नहीं है।
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बाहरी पक्षियों के कारण मुर्गियों में फैला वायरस
पक्षी रोग विशेषज्ञ सतपाल गौतम ने कहा कि बर्ड फ्लू फैलने के पीछे बाहरी पक्षी जिम्मेदार हैं। उन्होंने अपनी बात को पुष्ट करते हुए कहा कि एच5एन8 वायरस बाहरी पक्षी लेकर आ रहे हैं। यह वायरस सिर्फ बाहरी पक्षियों में ही पाया जाता है। पोल्ट्री फॉर्म के ऊपर से गुजरने के दौरान बीट करने पर मुर्गियां इसकी चपेट में आ जाती हैं।
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दो तरह के हैं वायरस
पक्षी रोग विशेषज्ञों के मुताबिक, एच5एन8 व एच5एन1 समेत पक्षियों में दो तरह का वायरस पाया जाता है। इसमें से एच5 एन8 इंसानों के लिए घातक होता है जबकि एच5एन1 सिर्फ पक्षियों तक ही सीमित रहता है। एच5एन8 2006 में हॉन्गकॉंन्ग में आया था। 14 लोग इसकी चपेट में आए थे, जिसमें से 6 लोगों की मौत हुई थी।
सर्दी के मौसम में पक्षियों में फ्लू हो जाता है। सामान्यतया ठंड के कारण ही पक्षियों की जान भी चली जाती है। बड़ी संख्या में कबूतरों को इलाज के लिए लाया जा रहा है।

- सतपाल गौतम, पक्षी रोग विशेषज्ञ, चैरिटेबल बर्ड हॉस्पिटल, जैकमपुरा
सर्दियों के समय में पक्षियों में फ्लू कोई नई बात नहीं है। दो तरह के वायरस होते हैं, जिसमें से पक्षियों में एच5एन1 वायरस ही होता है, जो इंसानों के लिए घातक नहीं होता। बावजूद इसके सावधानी बेहद जरूरी है।
- राजकुमार, वरिष्ठ पक्षी रोग विशेषज्ञ
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