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Gurugram News: खेत में लगे टमाटर को खराब कर रहीं गाय और बकरियां, आहत किसान नुकसान झेलने को मजबूर
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2 से 3 रुपये प्रति किलोग्राम के भाव ने बढ़ाई किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें
पुष्पेंद्र शर्मा
फिरोजपुर झिरका। मेवात के किसानों द्वारा टमाटर की बंपर पैदावार की गई। इसके चलते मेवात सहित दिल्ली एनसीआर की मंडी में टमाटर के भाव गिर गए। भाव इतने गिरे की मजबूरी में किसानों को अपने टमाटर के खेतों को भी उजड़वाने को मजबूर हो गए हैं। किसानों का कहना है कि जब मेवात के टमाटर मंडियों में नहीं पहुंचे थे तो उसे समय टमाटर का भाव 350 से 450 रुपए प्रति कैरेट अर्थात 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम था लेकिन जैसे ही मेवात के टमाटर मंडी में आने शुरू हुए तभी टमाटर के दाम जमीन पर आ गए। इससे क्षेत्र के किसानों को इस बार टमाटर की फसल बोने में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।
टमाटर की खेती करने वाले रेशम खान, देवेंद्र शर्मा, मुकेश, भीम, साबिर, राहुल, वसीम, राहुल, शकूर इत्यादि ने बताया कि उन्होंने टमाटर की पौध लगाकर, ड्रिप के माध्यम से पौधों को पानी दिया। जैसे ही टमाटर की पैदावार क्षेत्र के खेतों में शुरू हुई। वैसे ही दिल्ली एनसीआर में टमाटर की कीमत गिर गई। उन्हें एक कैरेट के दिल्ली की मार्किट में 100 रुपये से 130 रुपये मिल रहे है जबकि दिल्ली जाने का भाड़ा 50 से 60 रुपये प्रति कैरेट तक वाहन द्वारा लिया जा रहा है। इसके चलते एक कैरट मात्र 50 से 60 रुपये अर्थात 2 से 3 रुपए प्रति किलोग्राम में ही बिक पा रही है। क्षेत्र के किसानों द्वारा टमाटर को लेकर जो मंडी में ले जाने में परेशानी आ रही है और मंडी में टमाटर के भावों को देखते हुए मजबूरी बस अपने चालू टमाटर के खेतों को उजड़वाने पर विवश होना पड़ रहा है। खेत में गोवंश व बकरियां टमाटर की फसल को बर्बाद कर रही हैं, लेकिन आहत किसान कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।
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दिल्ली में टमाटर के भाव 60 से 120 रुपये मिल रहे हैं जबकि दिल्ली का भाड़ा 60 रुपये गाड़ी द्वारा लिया जा रहा है। इसके चलते किसानों को मजबूरी में अपने खड़े टमाटर के खेत में नुकसान झेलना पड़ रहा है। -सुमेर गुर्जर, निवासी फिरोजपुर झिरका
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शहर के एक जमींदार से खेत पट्टे पर लेकर उन्होंने टमाटर के पौधे लगाए लेकिन मंडी में लगातार टमाटर के गिरते भावों से और खर्चा नहीं निकलने पर उन्होंने मजबूरी बस अपने खेत में पशुओं को चराने पर विवश हो गए हैं। इस बार टमाटर की फसल में उनका खर्चा भी पूरा नहीं हो पाया है । - साबिर, निवासी भोंड।
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टमाटर की पौधे उन्होंने बड़ी आशा के साथ लगाई थी कि इस बार टमाटर के रेट अच्छे हैं। लेकिन जैसे ही मेवात का टमाटर मंडी में आया वैसे ही टमाटर के भाव गिर गए। इसके चलते उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। यहां तक की खेतों में टमाटर लाल होकर सड़ गए हैं। टमाटर को तोड़ने की मेहनत भी उनकी नहीं भर पा रही है। -रेशम, निवासी भोंड।
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पुष्पेंद्र शर्मा
फिरोजपुर झिरका। मेवात के किसानों द्वारा टमाटर की बंपर पैदावार की गई। इसके चलते मेवात सहित दिल्ली एनसीआर की मंडी में टमाटर के भाव गिर गए। भाव इतने गिरे की मजबूरी में किसानों को अपने टमाटर के खेतों को भी उजड़वाने को मजबूर हो गए हैं। किसानों का कहना है कि जब मेवात के टमाटर मंडियों में नहीं पहुंचे थे तो उसे समय टमाटर का भाव 350 से 450 रुपए प्रति कैरेट अर्थात 15 से 20 रुपये प्रति किलोग्राम था लेकिन जैसे ही मेवात के टमाटर मंडी में आने शुरू हुए तभी टमाटर के दाम जमीन पर आ गए। इससे क्षेत्र के किसानों को इस बार टमाटर की फसल बोने में भारी नुकसान का सामना करना पड़ा।
टमाटर की खेती करने वाले रेशम खान, देवेंद्र शर्मा, मुकेश, भीम, साबिर, राहुल, वसीम, राहुल, शकूर इत्यादि ने बताया कि उन्होंने टमाटर की पौध लगाकर, ड्रिप के माध्यम से पौधों को पानी दिया। जैसे ही टमाटर की पैदावार क्षेत्र के खेतों में शुरू हुई। वैसे ही दिल्ली एनसीआर में टमाटर की कीमत गिर गई। उन्हें एक कैरेट के दिल्ली की मार्किट में 100 रुपये से 130 रुपये मिल रहे है जबकि दिल्ली जाने का भाड़ा 50 से 60 रुपये प्रति कैरेट तक वाहन द्वारा लिया जा रहा है। इसके चलते एक कैरट मात्र 50 से 60 रुपये अर्थात 2 से 3 रुपए प्रति किलोग्राम में ही बिक पा रही है। क्षेत्र के किसानों द्वारा टमाटर को लेकर जो मंडी में ले जाने में परेशानी आ रही है और मंडी में टमाटर के भावों को देखते हुए मजबूरी बस अपने चालू टमाटर के खेतों को उजड़वाने पर विवश होना पड़ रहा है। खेत में गोवंश व बकरियां टमाटर की फसल को बर्बाद कर रही हैं, लेकिन आहत किसान कोई कदम नहीं उठा रहे हैं।
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दिल्ली में टमाटर के भाव 60 से 120 रुपये मिल रहे हैं जबकि दिल्ली का भाड़ा 60 रुपये गाड़ी द्वारा लिया जा रहा है। इसके चलते किसानों को मजबूरी में अपने खड़े टमाटर के खेत में नुकसान झेलना पड़ रहा है। -सुमेर गुर्जर, निवासी फिरोजपुर झिरका
शहर के एक जमींदार से खेत पट्टे पर लेकर उन्होंने टमाटर के पौधे लगाए लेकिन मंडी में लगातार टमाटर के गिरते भावों से और खर्चा नहीं निकलने पर उन्होंने मजबूरी बस अपने खेत में पशुओं को चराने पर विवश हो गए हैं। इस बार टमाटर की फसल में उनका खर्चा भी पूरा नहीं हो पाया है । - साबिर, निवासी भोंड।
टमाटर की पौधे उन्होंने बड़ी आशा के साथ लगाई थी कि इस बार टमाटर के रेट अच्छे हैं। लेकिन जैसे ही मेवात का टमाटर मंडी में आया वैसे ही टमाटर के भाव गिर गए। इसके चलते उन्हें भारी नुकसान का सामना करना पड़ा। यहां तक की खेतों में टमाटर लाल होकर सड़ गए हैं। टमाटर को तोड़ने की मेहनत भी उनकी नहीं भर पा रही है। -रेशम, निवासी भोंड।