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कहीं घरेलू सहायकों सेे तो नहीं बनी कोरोना की चेन
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गुरुग्राम (प्रवीन कुमार)। पिछले एक माह सेे हरियाणा के कई जिलों में कोरोना संक्रमण के मामले लगातार बढ़ रहे हैं, जबकि दिल्ली, चंडीगढ़ और मुंबई जैसे बड़े शहरों में कोरोना के हालात काफी गंभीर हो चुके हैं। वहीं हरियाणा के गुरुग्राम, फरीदाबाद, पंचकूला में कोरोना संक्रमितों की अच्छी-खासी तादाद रोज मिल रही है। केंद्र औैर प्रदेश सरकार सहित स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना संक्रमण पर काबू पानेे के लिए तरह-तरह के प्रयास किए हैं, लेकिन लगातार बढ़ते संक्रमण की चेन को नहीं तोड़ पा रहे। अगर आंकड़ों पर गौर करें तो शहरों की रिहायशी इमारतों, पॉश कालोनियों औैर सेक्टरों से कोरोना संक्रमण के अधिक मरीज मिल रहे हैं। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि उक्त तीनों क्षेत्र कोरोना संक्रमण के हॉटस्पॉट बने हुए हैं, जबकि लोग कोरोना संक्रमण से बचाव के लिए मास्क लगाते हैं और हाथों को भी सैनिटाइज करते रहते हैं। ऐसे में कहीं पॉश कॉलोनियों या रिहायशी इमारतों में घरेलू कार्य करने वाले सहायक ही तो कोरोना संक्रमण फैलने की चेन तो नहीं बने हुए हैैं।
दिनभर में 5 से 8 घरों में करते हैं काम
शहरों की रिहायशी इमारतों के फ्लैैट और पॉश क्षेत्रों में रहने वाले अधिकतर लोग घरों में काम कराने के लिए घंटे के हिसाब से सहायकों को काम पर रखते हैं, जोकि सुबह-सायं या दोपहर को कपड़े धोने, साफ-सफाई करने या खाना बनाने सहित रसोई का अन्य काम करते हैं। यह सहायक एक-दो घरों में नहीं बल्कि दिनभर में 5 से 8 घरों में काम करने जाते हैं। ऐसे में अगर किसी एक फ्लैैट में कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित है तो घर में काम करने वाले सहायक भी उनके संपर्क में आ जाते हैं और इनके माध्यम से अन्य लोगों तक कोरोना संक्रमण फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता।
तबीयत खराब होने की जानकारी नहीं देते
शारीरिक मेहनत ज्यादा होने एवं खानपान पर ध्यान देने के कारण कई लोगों में कोरोना संक्रमण का ज्यादा असर नहीं देखने को मिल पाता। ऐसे में कई घरों में काम करने वालों की शारीरिक मेहनत ज्यादा होती है और उनको बीमारियां भी कम होती हैैं। वहीं कुछ सहायक तबीयत खराब होने के बावजूद काम करनेे घरों में पहुंच जाते हैं, क्योंकि समय पर काम नहीं करने से उनका काम छूटने का डर रहता है। ऐसे में वर्तमान में भी उनको बुखार होने की शिकायत होने के बाद भी यह लोग घरों में काम करना बंद नहीं करते। अगर किसी सहायक में कोरोना संक्रमण के लक्ष्य हैं और वह उसे छुपा लेता है तो वह जिन घरों में यह काम करते हैं, उनको संक्रमित कर सकता है।
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कोरोना संक्रमण फैलने के कई कारण हैं, जिसमें संक्रमित लोगों के संपर्क में आना मुख्य कारण है। ऐसे में रिहायशी इमारतों के फ्लैटों या घरों में काम करने वाले लोगों में संक्रमण फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता। लोगों को स्वयं इसके लिए सावधानी बरतनी होगी, तभी संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।
-वीरेंद्र यादव, सीएमओ, गुरुग्राम
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दिनभर में 5 से 8 घरों में करते हैं काम
शहरों की रिहायशी इमारतों के फ्लैैट और पॉश क्षेत्रों में रहने वाले अधिकतर लोग घरों में काम कराने के लिए घंटे के हिसाब से सहायकों को काम पर रखते हैं, जोकि सुबह-सायं या दोपहर को कपड़े धोने, साफ-सफाई करने या खाना बनाने सहित रसोई का अन्य काम करते हैं। यह सहायक एक-दो घरों में नहीं बल्कि दिनभर में 5 से 8 घरों में काम करने जाते हैं। ऐसे में अगर किसी एक फ्लैैट में कोई व्यक्ति कोरोना संक्रमित है तो घर में काम करने वाले सहायक भी उनके संपर्क में आ जाते हैं और इनके माध्यम से अन्य लोगों तक कोरोना संक्रमण फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता।
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तबीयत खराब होने की जानकारी नहीं देते
शारीरिक मेहनत ज्यादा होने एवं खानपान पर ध्यान देने के कारण कई लोगों में कोरोना संक्रमण का ज्यादा असर नहीं देखने को मिल पाता। ऐसे में कई घरों में काम करने वालों की शारीरिक मेहनत ज्यादा होती है और उनको बीमारियां भी कम होती हैैं। वहीं कुछ सहायक तबीयत खराब होने के बावजूद काम करनेे घरों में पहुंच जाते हैं, क्योंकि समय पर काम नहीं करने से उनका काम छूटने का डर रहता है। ऐसे में वर्तमान में भी उनको बुखार होने की शिकायत होने के बाद भी यह लोग घरों में काम करना बंद नहीं करते। अगर किसी सहायक में कोरोना संक्रमण के लक्ष्य हैं और वह उसे छुपा लेता है तो वह जिन घरों में यह काम करते हैं, उनको संक्रमित कर सकता है।
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कोरोना संक्रमण फैलने के कई कारण हैं, जिसमें संक्रमित लोगों के संपर्क में आना मुख्य कारण है। ऐसे में रिहायशी इमारतों के फ्लैटों या घरों में काम करने वाले लोगों में संक्रमण फैलने से इंकार नहीं किया जा सकता। लोगों को स्वयं इसके लिए सावधानी बरतनी होगी, तभी संक्रमण से बचाव किया जा सकता है।
-वीरेंद्र यादव, सीएमओ, गुरुग्राम