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Gurugram News: मानेसर नाले में डाला जा रहा दूषित पानी, नजफगढ़ ड्रेन से यमुना में पहुंच रहा

Sun, 05 Oct 2025 12:17 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 05 Oct 2025 12:17 AM IST
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Contaminated water is being dumped into the Manesar drain and reaching the Yamuna from the Najafgarh drain.
सेक्टर-37डी के पास बादशाहपुर ड्रेन में मिलता है मानेसर नाला
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मानेसर नाले में आ रहा दूषित पानी नजफगढ़ नाले से होकर यमुना नदी में जा रहा है। इसमें कई गांवों का सीवर का पानी, अवैध तरीके से चल रही डाइंग यूनिट व टैंकरों से गंदा पानी नाले में छोड़ा जा रहा है। इस मामले की समीक्षा बैठक अगले सप्ताह प्रस्तावित है, जिसमें संबंधित विभाग रिपोर्ट देंगे।
सरकार नालों में दूषित पानी छोड़ने के मामलों को लेकर गंभीर है। इसे लेकर संबंधित विभागों को उद्योगों और सोसाइटियों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश हैं। पिछले माह आयोजित जिलास्तरीय समन्वय बैठक में मानेसर क्षेत्र से गुजरने वाले नाले में औद्योगिक केमिकल युक्त अपशिष्ट डालने पर चर्चा हुई थी। इसमें बताया गया कि रासायनिक विषाक्त पदार्थ डालने से भूजल दूषित होता है और जलीय जीवन नष्ट होते हैं। मानेसर नगर निगम आयुक्त और हरियाणा क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा मानेसर को जरूरी कदम उठाने को कहा गया था। एचएचपीसीबी ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि नाला आईएमटी मानेसर से निकलता है और रामप्रस्थ सिटी सेक्टर-37डी गुरुग्राम के पास बादशाहपुर नाले (लेग-3) में गिरता है। आईएमटी मानेसर में 287 उद्योग हैं और इनका गंदा पानी 55 एमएलडी कॉमन इंफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईटीपी) से शोधित होने के नाले में छोड़ा जाता है। एचएसपीसीबी ने सीईटीपी मानेसर के पानी के नमूने लिए और विश्लेषण रिपोर्ट के अनुसार पानी तय मानक पर मिला।
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एचएसपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी कृष्ण कुमार ने बताया कि अवैध तरीके से चल रही डाइंग यूनिटों पर कार्रवाई की गई है। ऐसी यूनिटों पर लगातार नजर रखी जा रही है और कई को बंद कराया गया है। सेप्टिक टैंक का गंदा पानी बिना उपचारित कर नालों में डालने वाले टैंकरों पर भी नजर रखी जा रही है। ऐसे टैंकरों के निरीक्षण के लिए पांच लोगों की एक टीम गठित की गई हैं।
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डाइंग यूनिटें चोरी छिपे नाले में डाल रहीं केमिकल युक्त पानी
मानेसर के गांव कांकरोला, भांगरोला और नाहरपुर (जोकि सीईटीपी से बादशाहपुर ड्रेन के बीच स्थित हैं) के अपशिष्ट को मानेसर ड्रेन में डाला जा रहा है। दूसरा गांवों में चोरी छिपे डाइंग यूनिट चल रही हैं और केमिकल युक्त पानी नाले में डाल रही हैं। नाले के पानी में केमिकल मिलाने से जहरीला हो जाता है। ये इकाइयां जहरीले अपशिष्ट सीधे नजफगढ़ चैनल में छोड़ती हैं, जो यमुना नदी में जाकर गिरता है। नियमों के अनुसार, केवल उपचारित औद्योगिक अपशिष्ट ही नजफगढ़ में छोड़ा जा सकता है। रंगाई इकाइयों को उनके अत्यधिक प्रदूषण के रूप में चिह्नित किया गया है। उन्हें केवल औद्योगिक केंद्रों में ही चलने की अनुमति है, आवासीय क्षेत्रों में नहीं। इस एरिया में सेप्टिक टैंक का गंदा पानी बिना उपचारित किए चोरी छिपे टैंकरों से नाले में डाल दिया जाता है।
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