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धार्मिक स्थल खोलने के निर्णय पर मंदिर कमेटियों में असमंजस की स्थिति
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गुरुग्राम। धार्मिक स्थल खोलने की अनुमति के साथ ही मंदिरों में प्रभु के दर्शन के लिए श्रद्धालु पहुंचते नजर आए। शीतला माता मंदिर में सोशल डिस्टेंसिंग को लेकर घेरे बनाए गए। वहीं, प्रेम मंदिर में तुरंत ही बड़ी संख्या में महीनों बाद श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे। वहीं, गुरुग्राम में धार्मिक स्थलों को खोलने के निर्णय पर अभी मंदिर कमेटियों के सदस्यों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है, जिसमें एक वर्ग का कहना है कि जन्माष्टमी के मौके पर यह बेहतर निर्णय है। नियमों को मानते हुए मंदिरों को खोला जाना स्वागत योग्य है।
वहीं, कई पंडित इस निर्णय से सहमत नहीं हैं। सेक्टर 17 स्थित सनातन मंदिर के पंडित पुरुषोत्तम शास्त्री ने बताया कि जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर को खोलना सही नहीं रहेगा। इस मौके पर श्रद्धालुओं के लिए सोशल डिस्टेंसिंग बनाना संभव नहीं होगा। इसी को देखते हुए जन्माष्टमी पर मंदिर को नहीं खोला जाएगा। हालांकि अनुमति मिलते ही अगले दिन से श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों को खोल दिया जाएगा। इस्कान मंदिर कमेटी ने भी जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर नहीं खोलने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि इस्कॉन में भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग को बनाना आसान नहीं होगा। वहीं पंडित अमरचंद ने बताया कि यदि सोशल डिस्टेंसिंग को बनाकर रखा जाए तो मंदिरों को खोलने का निर्णय स्वागत योग्य है। इसके लिए मंदिर के सदस्यों और श्रद्धालुओं को सभी शर्तों को मानना होगा।
मंदिरों को खोले जाने के फैसले का श्रद्धालुओं ने किया स्वागत
सोहना। धार्मिक स्थलों को खोले जाने के फैसले से श्रीकृष्ण भक्तों में खुशी का माहौल है तो मंदिरों के पुरोहितों में भी जबरदस्त खुशी देखने को मिल रही है। मंदिर संचालकों का कहना है कि वह इस बार भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिरों को हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी अच्छे से सजाएंगे। श्रद्धालुओं का कहना है कि वह अब मिल-जुलकर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाएंगे।
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वहीं, कई पंडित इस निर्णय से सहमत नहीं हैं। सेक्टर 17 स्थित सनातन मंदिर के पंडित पुरुषोत्तम शास्त्री ने बताया कि जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर को खोलना सही नहीं रहेगा। इस मौके पर श्रद्धालुओं के लिए सोशल डिस्टेंसिंग बनाना संभव नहीं होगा। इसी को देखते हुए जन्माष्टमी पर मंदिर को नहीं खोला जाएगा। हालांकि अनुमति मिलते ही अगले दिन से श्रद्धालुओं के लिए मंदिरों को खोल दिया जाएगा। इस्कान मंदिर कमेटी ने भी जन्माष्टमी के मौके पर मंदिर नहीं खोलने का निर्णय लिया है। उनका कहना है कि इस्कॉन में भारी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। ऐसे में सोशल डिस्टेंसिंग को बनाना आसान नहीं होगा। वहीं पंडित अमरचंद ने बताया कि यदि सोशल डिस्टेंसिंग को बनाकर रखा जाए तो मंदिरों को खोलने का निर्णय स्वागत योग्य है। इसके लिए मंदिर के सदस्यों और श्रद्धालुओं को सभी शर्तों को मानना होगा।
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मंदिरों को खोले जाने के फैसले का श्रद्धालुओं ने किया स्वागत
सोहना। धार्मिक स्थलों को खोले जाने के फैसले से श्रीकृष्ण भक्तों में खुशी का माहौल है तो मंदिरों के पुरोहितों में भी जबरदस्त खुशी देखने को मिल रही है। मंदिर संचालकों का कहना है कि वह इस बार भी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर मंदिरों को हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी अच्छे से सजाएंगे। श्रद्धालुओं का कहना है कि वह अब मिल-जुलकर श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाएंगे।
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