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Gurugram News: खराब हुई फसल का नहीं मिला था मुआवजा, अब बैंक को देने होंगे ब्याज समेत 40 हजार
सार
गुरुग्राम निवासी किसान विजय सिंह को फसल बीमा पॉलिसी समय पर न मिलने पर उपभोक्ता आयोग ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को मुआवजा देने का आदेश दिया। आयोग ने बैंक की सेवा में कमी मानते हुए कुल 65 हजार रुपये लौटाने को कहा।
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विस्तार
स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चरखी दादरी की बौंद कलां की ब्रांच से कराया था फसल का बीमा
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। एक किसान को उनकी खराब हुई फसल का मुआवजा न देने पर उपभोक्ता आयोग ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को ब्याज समेत 40 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के सदस्य खुशवींद्र कौर ने दिया है।
सेक्टर-84 निवासी विजय सिंह ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने एसबीआई की चरखी दादरी की बौंदकलां ब्रांच से 1.6 लाख रुपये का फसल लोन लिया था। 31 जुलाई 2023 इसमें से चार हजार 638 रुपये फसल बीमा प्रीमियम के रूप में जमा किए थे। उनका कहना है कि बैंक ने 100 दिनों तक बार-बार अनुरोध करने पर भी बीमा पॉलिसी नहीं दी थी।
सितंबर और अक्टूबर 2023 में उनकी कपास की फसल 70 प्रतिशत तक कीट के कारण नष्ट हो गई थी। पॉलिसी न होने के कारण वे बीमा कंपनी में दावे के लिए आवेदन नहीं कर सकें। इस मामले में बैंक की तरफ से कोई भी जवाब आयोग में नहीं दिया गया। आयोग ने पाया कि बैंक ने बीमा पॉलिसी प्रदान न करके गंभीर सेवा में कमी की है।
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आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह विजय को 40 हजार रुपये नौ प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाएं। इसके साथ ही किसान को होने वाली मानसिक परेशानी पर 20 हजार रुपये और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर पांच हजार रुपये देने का आदेश दिया है।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। एक किसान को उनकी खराब हुई फसल का मुआवजा न देने पर उपभोक्ता आयोग ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया को ब्याज समेत 40 हजार रुपये देने का आदेश दिया है। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के सदस्य खुशवींद्र कौर ने दिया है।
सेक्टर-84 निवासी विजय सिंह ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने एसबीआई की चरखी दादरी की बौंदकलां ब्रांच से 1.6 लाख रुपये का फसल लोन लिया था। 31 जुलाई 2023 इसमें से चार हजार 638 रुपये फसल बीमा प्रीमियम के रूप में जमा किए थे। उनका कहना है कि बैंक ने 100 दिनों तक बार-बार अनुरोध करने पर भी बीमा पॉलिसी नहीं दी थी।
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सितंबर और अक्टूबर 2023 में उनकी कपास की फसल 70 प्रतिशत तक कीट के कारण नष्ट हो गई थी। पॉलिसी न होने के कारण वे बीमा कंपनी में दावे के लिए आवेदन नहीं कर सकें। इस मामले में बैंक की तरफ से कोई भी जवाब आयोग में नहीं दिया गया। आयोग ने पाया कि बैंक ने बीमा पॉलिसी प्रदान न करके गंभीर सेवा में कमी की है।
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आयोग ने बैंक को आदेश दिया है कि वह विजय को 40 हजार रुपये नौ प्रतिशत ब्याज के साथ लौटाएं। इसके साथ ही किसान को होने वाली मानसिक परेशानी पर 20 हजार रुपये और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च होने पर पांच हजार रुपये देने का आदेश दिया है।