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Gurugram News: शराब से हुई बीमारी के नाम पर रोका था क्लेम, अब ब्याज के साथ करेंगे वापस
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- महिला को थी अल्कोहलिक हेपेटाइटिस की बीमारी
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शराब से हुई बीमारी होने की बात कहकर रोके गए 7.30 लाख रुपये का क्लेम बीमा कंपनी को अब ब्याज के साथ वापस करना होगा। आयोग ने आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि वह बीमा पॉलिसी देते हुए उपभोक्ता के स्वास्थ्य की जांच कराने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होती है। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
डीएलएफ फेज-दो निवासी राकेश कुमार वर्मा ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने एचडीएफसी एर्गो से 2013 से अपना और पत्नी को बीमा लिया हुआ था। उनकी पत्नी रेखा वर्मा को 20 जुलाई 2020 को अल्कोहलिक हेपेटाइटिस व अन्य बीमारी से निजी अस्पताल में भर्ती हुई थी। उनके उपचार के लिए जब अस्पताल प्रबंधन की तरफ से बीमा कंपनी को उपचार के लिए क्लेम की अनुमति के लिए भेजा गया लेकिन कंपनी ने क्लेम को खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि शराब से होने वाली बीमारी पर क्लेम नहीं दिया जा सकता है।
आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान दस्तावेज के आधार पर माना कि रेखा वर्मा की रिपोर्ट पर अस्पताल की तरफ से नहीं लिखा गया कि उनको शराब पीने की वजह से यह बीमारी हुई है। इसके साथ ही अगर उन्हें यह बीमारी थी तो बीमा कंपनी की तरफ से उनका बीमा क्यों किया गया था। यह बीमा कंपनी की जिम्मेदारी है कि बीमा देते हुए वह व्यक्ति के स्वास्थ्य की जांच कराएं।
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आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह 7.30 लाख रुपये का नौ प्रतिशत की दर से वापस करें। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी होने पर एक लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च के लिए 33 हजार रुपये देने होंगे।
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। शराब से हुई बीमारी होने की बात कहकर रोके गए 7.30 लाख रुपये का क्लेम बीमा कंपनी को अब ब्याज के साथ वापस करना होगा। आयोग ने आदेश देते हुए स्पष्ट किया है कि वह बीमा पॉलिसी देते हुए उपभोक्ता के स्वास्थ्य की जांच कराने की जिम्मेदारी बीमा कंपनी की होती है। यह आदेश जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के अध्यक्ष संजीव जिंदल ने दिया है।
डीएलएफ फेज-दो निवासी राकेश कुमार वर्मा ने आयोग में दायर की याचिका में बताया कि उन्होंने एचडीएफसी एर्गो से 2013 से अपना और पत्नी को बीमा लिया हुआ था। उनकी पत्नी रेखा वर्मा को 20 जुलाई 2020 को अल्कोहलिक हेपेटाइटिस व अन्य बीमारी से निजी अस्पताल में भर्ती हुई थी। उनके उपचार के लिए जब अस्पताल प्रबंधन की तरफ से बीमा कंपनी को उपचार के लिए क्लेम की अनुमति के लिए भेजा गया लेकिन कंपनी ने क्लेम को खारिज कर दिया। कंपनी का तर्क था कि शराब से होने वाली बीमारी पर क्लेम नहीं दिया जा सकता है।
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आयोग ने मामले की सुनवाई के दौरान दस्तावेज के आधार पर माना कि रेखा वर्मा की रिपोर्ट पर अस्पताल की तरफ से नहीं लिखा गया कि उनको शराब पीने की वजह से यह बीमारी हुई है। इसके साथ ही अगर उन्हें यह बीमारी थी तो बीमा कंपनी की तरफ से उनका बीमा क्यों किया गया था। यह बीमा कंपनी की जिम्मेदारी है कि बीमा देते हुए वह व्यक्ति के स्वास्थ्य की जांच कराएं।
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आयोग ने कंपनी को आदेश दिया है कि वह 7.30 लाख रुपये का नौ प्रतिशत की दर से वापस करें। इस दौरान उन्हें हुई मानसिक परेशानी होने पर एक लाख रुपये का मुआवजा और कानूनी प्रक्रिया पर खर्च के लिए 33 हजार रुपये देने होंगे।