{"_id":"6ad7a72493929c9a850b43d6","slug":"civil-courts-cannot-hear-electricity-bill-cases-petition-dismissed-gurgaon-news-c-24-1-fbd1020-104845-2026-10-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: सिविल अदालत नहीं सुन सकती बिजली बिल के मामले, याचिका खारिज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: सिविल अदालत नहीं सुन सकती बिजली बिल के मामले, याचिका खारिज
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। बिजली बिल न भरने पर लगे जुर्माने के विरोध में दायर याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रुक्साना की अदालत ने माना कि बिजली से जुड़े मामले सिविल अदालत के क्षेत्राधिकार से बाहर है। प्रताप नगर निवासी मनीष आहूजा ने अदालत में दायर की याचिका में बताया कि उनका बिजली कनेक्शन 13 जनवरी 2025 को गलत तरीके से काट दिया गया। निगम ने बिना उचित जांच के 3.26 लाख रुपये का असेसमेंट नोटिस भी जारी कर दिया। उन्होंने नोटिस और एलएल-आई को अवैध घोषित करने तथा बिजली कनेक्शन बहाल करने की मांग की थी।
बिजली निगम ने अदालत में दलील दी कि 2015 से बिजली बिल भरा ही नहीं किया गया था। जांच करने पर पता चला था कि बिजली बिल लंबित है। इस पर बिजली निगम ने 3.26 लाख रुपये का बिल दिया था। इसके साथ ही दलील दी गई कि ऐसे मामलों में सिविल कोर्ट को सुनवाई का अधिकार नहीं है। अदालत ने निगम की दलील स्वीकार करते हुए मुकदमा खारिज कर दिया।
विज्ञापन
गुरुग्राम। बिजली बिल न भरने पर लगे जुर्माने के विरोध में दायर याचिका को अदालत ने खारिज कर दिया है। सिविल जज (जूनियर डिवीजन) रुक्साना की अदालत ने माना कि बिजली से जुड़े मामले सिविल अदालत के क्षेत्राधिकार से बाहर है। प्रताप नगर निवासी मनीष आहूजा ने अदालत में दायर की याचिका में बताया कि उनका बिजली कनेक्शन 13 जनवरी 2025 को गलत तरीके से काट दिया गया। निगम ने बिना उचित जांच के 3.26 लाख रुपये का असेसमेंट नोटिस भी जारी कर दिया। उन्होंने नोटिस और एलएल-आई को अवैध घोषित करने तथा बिजली कनेक्शन बहाल करने की मांग की थी।
बिजली निगम ने अदालत में दलील दी कि 2015 से बिजली बिल भरा ही नहीं किया गया था। जांच करने पर पता चला था कि बिजली बिल लंबित है। इस पर बिजली निगम ने 3.26 लाख रुपये का बिल दिया था। इसके साथ ही दलील दी गई कि ऐसे मामलों में सिविल कोर्ट को सुनवाई का अधिकार नहीं है। अदालत ने निगम की दलील स्वीकार करते हुए मुकदमा खारिज कर दिया।
विज्ञापन