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सत्यमेव पुरम, मेवात और नूंह में 18 वर्ष बीतने के बावजूद नहीं बना कृषि विज्ञान केंद्र
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नगीना। किसानों को उन्नत खेती से जोड़ने के लिए भले ही केंद्र और राज्य सरकार गंभीरता से कार्य कर रही हो लेकिन इसका असर सबसे पिछड़े जिले नूंह में दिखाई नहीं दे रहा है। अभी तक जिले में कृषि विज्ञान केंद्र नहीं है, जबकि 15 अगस्त 2010 को मेवात के बाद जिला बने पलवल में कृषि विज्ञान केंद्र गांव मंडकोला में है।
बता दें नगीना खंड के गांव मरोडा में कृषि विज्ञान केंद्र बनाने के लिए 2019 में करीब 38 एकड़ भूमि प्रस्तावित की थी। विडंबना है कि किसान समृद्ध होने की जगह लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। जिले का कृषि विभाग भी स्टाफ सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा है। किसानों के हित का दावा करने वाली सरकार में अभी तक किसानों की बेहतरी के लिए नूंह जिला के गांव मरोडा में कृषि विज्ञान केंद्र नहीं बना पाई है।
जानकारी के अभाव में किसान अंधाधुंध रासायनिक खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे जमीन की उर्वरक क्षमता भी कम होती जा रही है। आज के समय में किसानों की लागत तो लगातार बढ़ती जा रही है परंतु उत्पादन घट गया है। इससे कृषि किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। अब कृषि विज्ञान केंद्र जिले के किसानों की मूलभूत आवश्यकता बन गया है। गांव मरोडा के अब्बास खान, इकबाल ठेकेदार पूर्व ब्लाक समिति सदस्य इब्राहिम खान कहते हैं कि जिले की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। कृषि के माध्यम से ही उनकी रोजी-रोटी चलती है, किंतु नूंह के किसानों की हालात दयनीय है। इसका कारण किसानों को पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं मुहैया ना कर पाना है।
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कृषि विज्ञान केंद्र की मांग लंबे समय से चली आ रही है। ग्राम पंचायत मरोडा ने साल 2019 में पूठली स्कूल व पीएचसी के साथ लगती 38 एकड़ भूमि कृषि विज्ञान केंद्र के लिए दी थी। तीन साल का वक्त बीत चुका है अभी तक काम शुरू नहीं हुआ।
गोपी किशन, पूर्व सरपंच मरोडा
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नूंह की जगह पलवल जिले के मंडकोला में कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित कर दिया, लेकिन नूंह उपेक्षित रह गया। पंचायत विभाग ने मरोडा गांव में पर्याप्त जमीन दे रखी है। जल्द निर्माण शुरू हो।
वीरेंद्र सिंह कुंडू, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी नगीना
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जिले में कृषि विज्ञान केंद्र बनाया जाएगा। फाइल पर त्वरित कार्रवाई होगी। किसानों के लिए सरकार तेजी से काम करने में जुटी हुई है।
अजय कुमार, जिला उपायुक्त नूंह
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बता दें नगीना खंड के गांव मरोडा में कृषि विज्ञान केंद्र बनाने के लिए 2019 में करीब 38 एकड़ भूमि प्रस्तावित की थी। विडंबना है कि किसान समृद्ध होने की जगह लगातार पिछड़ते जा रहे हैं। जिले का कृषि विभाग भी स्टाफ सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं से जूझ रहा है। किसानों के हित का दावा करने वाली सरकार में अभी तक किसानों की बेहतरी के लिए नूंह जिला के गांव मरोडा में कृषि विज्ञान केंद्र नहीं बना पाई है।
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जानकारी के अभाव में किसान अंधाधुंध रासायनिक खाद का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे जमीन की उर्वरक क्षमता भी कम होती जा रही है। आज के समय में किसानों की लागत तो लगातार बढ़ती जा रही है परंतु उत्पादन घट गया है। इससे कृषि किसानों के लिए घाटे का सौदा साबित हो रही है। अब कृषि विज्ञान केंद्र जिले के किसानों की मूलभूत आवश्यकता बन गया है। गांव मरोडा के अब्बास खान, इकबाल ठेकेदार पूर्व ब्लाक समिति सदस्य इब्राहिम खान कहते हैं कि जिले की 80 प्रतिशत आबादी कृषि पर निर्भर है। कृषि के माध्यम से ही उनकी रोजी-रोटी चलती है, किंतु नूंह के किसानों की हालात दयनीय है। इसका कारण किसानों को पर्याप्त संसाधन और सुविधाएं मुहैया ना कर पाना है।
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कृषि विज्ञान केंद्र की मांग लंबे समय से चली आ रही है। ग्राम पंचायत मरोडा ने साल 2019 में पूठली स्कूल व पीएचसी के साथ लगती 38 एकड़ भूमि कृषि विज्ञान केंद्र के लिए दी थी। तीन साल का वक्त बीत चुका है अभी तक काम शुरू नहीं हुआ।
गोपी किशन, पूर्व सरपंच मरोडा
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नूंह की जगह पलवल जिले के मंडकोला में कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित कर दिया, लेकिन नूंह उपेक्षित रह गया। पंचायत विभाग ने मरोडा गांव में पर्याप्त जमीन दे रखी है। जल्द निर्माण शुरू हो।
वीरेंद्र सिंह कुंडू, खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी नगीना
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जिले में कृषि विज्ञान केंद्र बनाया जाएगा। फाइल पर त्वरित कार्रवाई होगी। किसानों के लिए सरकार तेजी से काम करने में जुटी हुई है।
अजय कुमार, जिला उपायुक्त नूंह