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Gurugram News: 15 दिनों में खाली करना होगा चिंटेल्स का जे टावर
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जिलाधीश ने जारी किए आदेश, टावर में रहते हैं 10 परिवार
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। जिलाधीश एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष निशांत कुमार यादव ने चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के जे टावर 15 दिन के भीतर खाली करने के संबंध में आदेश पारित किए हैं। जे टावर में अभी 10 परिवार रह रहे हैं।
जिलाधीश द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि आईआईटी दिल्ली ने चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के टावर जे की स्ट्रक्चर ऑडिट रिपोर्ट ( 5 जनवरी 2024) के तहत टावर जे को रहने के हिसाब से असुरक्षित घोषित किया है। इसी रिपाेर्ट के आधार पर जिलाधीश ने टावर जे में रह रहे निवासियों के जीवन और संपत्ति के आसन्न खतरे को देखते हुए मानव जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरे को रोकने के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 34 के साथ, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के आधार पर संबंधित निवासियों को तत्काल निकासी के आदेश दिए हैं।
आदेश में यह भी कहा गया है कि टावर जे में रहने वाले निवासियों को आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपने संबंधित परिसर को खाली करने और कब्जे को चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को सौंपना होगा। आदेश की निगरानी के लिए डीटीपी (ई) गुरुग्राम को नोडल अधिकारी और ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त किया गया है। आदेशों में यह भी कहा गया है कि आदेश की पालना के लिए पुलिस बल की सहायता भी ली जा सकती है।
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आदेश में इस बात का भी जिक्र है कि डेवलपर अर्थात मैसर्स चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फ्लैट मालिकों को मुआवजे के भुगतान के मामले को इस मामले में गठित एसआईटी द्वारा अलग से निपटाया जा रहा है। चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को टावर-जे के सभी आवंटियों के सभी दावों को समयबद्ध तरीके से निपटाने का निर्देश दिया गया है। जारी आदेशों की अवहेलना में यदि कोई दोषी पाया जाता है कि तो कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी आरडब्ल्यूए के प्रधान राकेश हुड्डा ने बताया कि टावर में 52 परिवार रहते थे। मौजूदा समय में यहां दस परिवार ही रह रहे हैं। उनका कहना है कि बिल्डर छह माह का किराया और सामान शिफ्ट करने का खर्च दें।
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पानी, बिजली और फायर सिस्टम को शिफ्ट करने का चल रहा काम
सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के असुरक्षित पांच टावरों को तोड़ने काम चल रहा है। इसके तहत असुरक्षित टावरों से केंद्रीयकृत बिजली, पानी व फायर सिस्टम को निकालकर शिफ्ट किया जा रहा है। इसके बाद एडिफिस कंपनी टावरों को तोड़ने का बड़े स्तर पर काम शुरू करेगी। चिटेल्स इंडिया के उपाध्यक्ष जेएन यादव ने बताया कि सुरक्षित ए, बी और सी टावर के लोगों के लिए बिजली, पानी और फायर जैसी सुविधाएं देना है। ऐसे में असुरक्षित टावरों को तोड़ने से पहले इन सुविधाओं को बाहर किया जा रहा है। कंपनी ने पांच टावरों के फ्लैटों में लगी खिड़कियों, पाइप, दरवाजे, फायर सिस्टम समेत अन्य सामानों को निकाल लिया है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। जिलाधीश एवं जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अध्यक्ष निशांत कुमार यादव ने चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के जे टावर 15 दिन के भीतर खाली करने के संबंध में आदेश पारित किए हैं। जे टावर में अभी 10 परिवार रह रहे हैं।
जिलाधीश द्वारा जारी आदेशों में कहा गया है कि आईआईटी दिल्ली ने चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के टावर जे की स्ट्रक्चर ऑडिट रिपोर्ट ( 5 जनवरी 2024) के तहत टावर जे को रहने के हिसाब से असुरक्षित घोषित किया है। इसी रिपाेर्ट के आधार पर जिलाधीश ने टावर जे में रह रहे निवासियों के जीवन और संपत्ति के आसन्न खतरे को देखते हुए मानव जीवन, स्वास्थ्य और सुरक्षा के लिए खतरे को रोकने के लिए आपदा प्रबंधन अधिनियम, 2005 की धारा 34 के साथ, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 163 के आधार पर संबंधित निवासियों को तत्काल निकासी के आदेश दिए हैं।
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आदेश में यह भी कहा गया है कि टावर जे में रहने वाले निवासियों को आदेश जारी होने के 15 दिनों के भीतर अपने संबंधित परिसर को खाली करने और कब्जे को चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को सौंपना होगा। आदेश की निगरानी के लिए डीटीपी (ई) गुरुग्राम को नोडल अधिकारी और ड्यूटी मजिस्ट्रेट के रूप में नियुक्त किया गया है। आदेशों में यह भी कहा गया है कि आदेश की पालना के लिए पुलिस बल की सहायता भी ली जा सकती है।
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आदेश में इस बात का भी जिक्र है कि डेवलपर अर्थात मैसर्स चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा फ्लैट मालिकों को मुआवजे के भुगतान के मामले को इस मामले में गठित एसआईटी द्वारा अलग से निपटाया जा रहा है। चिंटेल्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को टावर-जे के सभी आवंटियों के सभी दावों को समयबद्ध तरीके से निपटाने का निर्देश दिया गया है। जारी आदेशों की अवहेलना में यदि कोई दोषी पाया जाता है कि तो कानूनी प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी आरडब्ल्यूए के प्रधान राकेश हुड्डा ने बताया कि टावर में 52 परिवार रहते थे। मौजूदा समय में यहां दस परिवार ही रह रहे हैं। उनका कहना है कि बिल्डर छह माह का किराया और सामान शिफ्ट करने का खर्च दें।
पानी, बिजली और फायर सिस्टम को शिफ्ट करने का चल रहा काम
सेक्टर-109 स्थित चिंटेल्स पैराडाइसो सोसाइटी के असुरक्षित पांच टावरों को तोड़ने काम चल रहा है। इसके तहत असुरक्षित टावरों से केंद्रीयकृत बिजली, पानी व फायर सिस्टम को निकालकर शिफ्ट किया जा रहा है। इसके बाद एडिफिस कंपनी टावरों को तोड़ने का बड़े स्तर पर काम शुरू करेगी। चिटेल्स इंडिया के उपाध्यक्ष जेएन यादव ने बताया कि सुरक्षित ए, बी और सी टावर के लोगों के लिए बिजली, पानी और फायर जैसी सुविधाएं देना है। ऐसे में असुरक्षित टावरों को तोड़ने से पहले इन सुविधाओं को बाहर किया जा रहा है। कंपनी ने पांच टावरों के फ्लैटों में लगी खिड़कियों, पाइप, दरवाजे, फायर सिस्टम समेत अन्य सामानों को निकाल लिया है।