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Gurugram News: सरकारी रेट से दोगुने दाम पर बिक रहा यूरिया का कट्टा
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खाद बीज की दुकानों पर यूरिया खरीदते किसान।
- 266 रुपये के बैग के वसूले जा रहे 300 से 500 रुपये
-बिना रसीद दिए खुलेआम कालाबाजारी का आरोप
रिजवान खान
नूंह। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में यूरिया खाद की किल्लत और कालाबाजारी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। सरकार द्वारा 266 रुपये निर्धारित मूल्य वाला यूरिया का बैग खुलेआम 300 रुपये से लेकर 500 रुपये तक में बेचे जाने के आरोप सामने आए हैं। किसानों का कहना है कि दुकानदार उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाने दाम वसूल रहे हैं, जबकि प्रशासन और कृषि विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि कई दुकानदार खाद बेचते समय रसीद तक नहीं दे रहे, जिससे पूरे मामले में कालाबाजारी और जमाखोरी की आशंका गहरा गई है। तिरवाड़ा निवासी फजरुद्दीन ने आरोप लगाते हुए बताया कि वह अपनी ज्वार की फसल के लिए यूरिया खरीदने पुन्हाना की पंजाबी कॉलोनी स्थित सतीश बीज भंडार पर गया था। वहां उसे 266 रुपये के सरकारी रेट वाला यूरिया कट्टा 500 रुपये में दिया गया। जब उसने अधिक कीमत लेने का विरोध किया तो दुकानदार ने कथित तौर पर कहा कि मैं भी ब्लैक में खरीद रहा हूं, लेना है तो लो वरना आगे बढ़ो। फजरुद्दीन का कहना है कि खेती के लिए खाद बेहद जरूरी थी, इसलिए मजबूरी में उसे महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ी। आरोप है कि दुकानदार ने रसीद देने से भी साफ इंकार कर दिया।
स्थानीय किसानों का कहना है कि केवल एक दुकान ही नहीं बल्कि अनाजमंडी पुनहाना में बनी कई खाद-बीज दुकानों पर भी यूरिया कट्टा 300 से 350 रुपये तक में बेचा जा रहा है। दुकानदारों द्वारा गोदामों में खाद का भंडारण कर कृत्रिम कमी पैदा करने और बाद में ऊंचे दामों पर बेचने की चर्चा भी किसानों के बीच जोरों पर है। किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक निगरानी कमजोर होने के कारण दुकानदार बेखौफ होकर सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
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380 लाइसेंसी खाद विक्रेता हैं जिले में :
कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में करीब 380 लाइसेंसी खाद विक्रेता हैं, जिनके माध्यम से किसानों को यूरिया उपलब्ध कराया जाता है। विभाग का दावा है कि जिले में वर्तमान समय में लगभग पांच हजार टन यूरिया उपलब्ध है और किसी प्रकार की कमी नहीं है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यूरिया के एक कट्टे का सरकारी मूल्य 266 रुपये निर्धारित है। इसके बावजूद बाजार में अधिक कीमत वसूलना नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।
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किसान संगठनों ने की कार्रवाई की मांग :
ग्रामीणों और किसान संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि खाद दुकानों पर छापेमारी कर कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गरीब और छोटे किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे और खेती की लागत लगातार बढ़ती जाएगी।
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जिले में सरकार द्वारा निर्धारित रेट पर यूरिया किसानों को बेचने के निर्देश दिए हुए हैं। सरकारी रेट 266 रुपये है। अगर कोई भी दुकानदार इससे अधिक मूल्य में यूरिया बेचता है तो उसकी लिखित शिकायत हमें दें। जल्द ही टीम गठित कर जांच करवाई जाएगी और दोषी पाए जाने पर ऐसे दुकानदारों पर कार्रवाई करवाई जाएगी।
- वीरेंद्र सिंह, उपनिदेशक कृषि विभाग, नूंह
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मजबूरी में 500 रुपये देकर यूरिया खरीदना पड़ा। दुकानदार ने साफ कहा कि लेना है तो लो, नहीं तो आगे बढ़ो।
- फजरुद्दीन, किसान तिरवाड़ा
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सरकार एक रेट तय करती है लेकिन दुकानदार मनमानी कर रहे हैं। प्रशासन को तुरंत जांच करनी चाहिए।
- अरशद हुसैन, अधिवक्ता
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कई दुकानदार बिना रसीद खाद बेच रहे हैं। इससे साफ है कि कहीं न कहीं कालाबाजारी हो रही है।
- तौसीफ बिसरु, समाजसेवी
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खेती पहले ही घाटे का सौदा बनती जा रही है, ऊपर से खाद के दाम बढ़ाकर किसानों का शोषण किया जा रहा है।
- जुबेर सरपंच, हतनगांव
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-बिना रसीद दिए खुलेआम कालाबाजारी का आरोप
रिजवान खान
नूंह। खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही क्षेत्र में यूरिया खाद की किल्लत और कालाबाजारी ने किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। सरकार द्वारा 266 रुपये निर्धारित मूल्य वाला यूरिया का बैग खुलेआम 300 रुपये से लेकर 500 रुपये तक में बेचे जाने के आरोप सामने आए हैं। किसानों का कहना है कि दुकानदार उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर मनमाने दाम वसूल रहे हैं, जबकि प्रशासन और कृषि विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।
सबसे गंभीर बात यह है कि कई दुकानदार खाद बेचते समय रसीद तक नहीं दे रहे, जिससे पूरे मामले में कालाबाजारी और जमाखोरी की आशंका गहरा गई है। तिरवाड़ा निवासी फजरुद्दीन ने आरोप लगाते हुए बताया कि वह अपनी ज्वार की फसल के लिए यूरिया खरीदने पुन्हाना की पंजाबी कॉलोनी स्थित सतीश बीज भंडार पर गया था। वहां उसे 266 रुपये के सरकारी रेट वाला यूरिया कट्टा 500 रुपये में दिया गया। जब उसने अधिक कीमत लेने का विरोध किया तो दुकानदार ने कथित तौर पर कहा कि मैं भी ब्लैक में खरीद रहा हूं, लेना है तो लो वरना आगे बढ़ो। फजरुद्दीन का कहना है कि खेती के लिए खाद बेहद जरूरी थी, इसलिए मजबूरी में उसे महंगे दामों पर खाद खरीदनी पड़ी। आरोप है कि दुकानदार ने रसीद देने से भी साफ इंकार कर दिया।
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स्थानीय किसानों का कहना है कि केवल एक दुकान ही नहीं बल्कि अनाजमंडी पुनहाना में बनी कई खाद-बीज दुकानों पर भी यूरिया कट्टा 300 से 350 रुपये तक में बेचा जा रहा है। दुकानदारों द्वारा गोदामों में खाद का भंडारण कर कृत्रिम कमी पैदा करने और बाद में ऊंचे दामों पर बेचने की चर्चा भी किसानों के बीच जोरों पर है। किसानों का आरोप है कि प्रशासनिक निगरानी कमजोर होने के कारण दुकानदार बेखौफ होकर सरकारी नियमों की धज्जियां उड़ा रहे हैं।
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380 लाइसेंसी खाद विक्रेता हैं जिले में :
कृषि विभाग से मिली जानकारी के अनुसार जिले में करीब 380 लाइसेंसी खाद विक्रेता हैं, जिनके माध्यम से किसानों को यूरिया उपलब्ध कराया जाता है। विभाग का दावा है कि जिले में वर्तमान समय में लगभग पांच हजार टन यूरिया उपलब्ध है और किसी प्रकार की कमी नहीं है। विभागीय अधिकारियों के अनुसार यूरिया के एक कट्टे का सरकारी मूल्य 266 रुपये निर्धारित है। इसके बावजूद बाजार में अधिक कीमत वसूलना नियमों का सीधा उल्लंघन माना जा रहा है।
किसान संगठनों ने की कार्रवाई की मांग :
ग्रामीणों और किसान संगठनों ने प्रशासन से मांग की है कि खाद दुकानों पर छापेमारी कर कालाबाजारी करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। किसानों का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो गरीब और छोटे किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे और खेती की लागत लगातार बढ़ती जाएगी।
जिले में सरकार द्वारा निर्धारित रेट पर यूरिया किसानों को बेचने के निर्देश दिए हुए हैं। सरकारी रेट 266 रुपये है। अगर कोई भी दुकानदार इससे अधिक मूल्य में यूरिया बेचता है तो उसकी लिखित शिकायत हमें दें। जल्द ही टीम गठित कर जांच करवाई जाएगी और दोषी पाए जाने पर ऐसे दुकानदारों पर कार्रवाई करवाई जाएगी।
- वीरेंद्र सिंह, उपनिदेशक कृषि विभाग, नूंह
मजबूरी में 500 रुपये देकर यूरिया खरीदना पड़ा। दुकानदार ने साफ कहा कि लेना है तो लो, नहीं तो आगे बढ़ो।
- फजरुद्दीन, किसान तिरवाड़ा
सरकार एक रेट तय करती है लेकिन दुकानदार मनमानी कर रहे हैं। प्रशासन को तुरंत जांच करनी चाहिए।
- अरशद हुसैन, अधिवक्ता
कई दुकानदार बिना रसीद खाद बेच रहे हैं। इससे साफ है कि कहीं न कहीं कालाबाजारी हो रही है।
- तौसीफ बिसरु, समाजसेवी
खेती पहले ही घाटे का सौदा बनती जा रही है, ऊपर से खाद के दाम बढ़ाकर किसानों का शोषण किया जा रहा है।
- जुबेर सरपंच, हतनगांव