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लॉकडाउन के छह माह : कर्ज में डूबे ऑटो चालकों ने बदला काम
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गुरुग्राम। लॉकडाउन के बाद का समय ऑटो चालकों पर पहाड़ बनकर टूटा है। कर्ज तले दबे कई ऑटो चालकों को तो अपना काम तक बदलना पड़ा। अनलॉक-4 में सार्वजनिक परिवहन को सशर्त अनुमति मिली है, लेकिन दिनभर मेहनत के बाद भी वे खर्च तक नहीं निकाल पा रहे हैं। लॉकडाउन के दौरान हरियाणा सरकार ने ऑटो चालकों को आर्थिक मदद देने का वादा किया था, लेकिन उन्हें आज तक कुछ नहीं मिला। ऑटो चालकों के मुताबिक, उनके साथी काम बदलने वालों की संख्या करीब 20 फीसदी है।
शहर में परिवहन व्यवस्था 25 मार्च को लॉकडाउन के बाद से ठप है। अनलॉक में ऑटो को सशर्त अनुमति मिली है। ऑटो चालक दोबारा काम पर तो निकले, लेकिन पूरे दिन मेहनत के बाद भी 500 रुपये तक नहीं कमा पा रहे हैं। ऑटो चालकों ने बताया कि आजकल सवारियां ऑटो में बैठने से डर रही हैं। हरियाणा ऑटो चालक संघ के महामंत्री योगेश शर्मा ने कहा कि परिवार पालने के लिए काम बदलने वाले ऑटो चालकों में कोई मजदूरी कर रहा है तो कोई छोटी-मोटी नौकरी। 15 फीसदी चालक अपने ऑटो का इस्तेमाल कर सब्जी बेचने लगे हैं। करीब 15 फीसदी मकान का किराया भी नहीं दे सकते थे, वे अपने गांव लौट गए हैं।
संघ के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत शर्मा ने बताया कि सरकार ने असंगठित क्षेत्र के लोगों को आर्थिक मदद देने का आश्वासन दिया था, लेकिन ऑटो चालकों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। इनके रजिस्ट्रेशन तो किए गए, लेकिन आज तक सहायता नहीं दी गई। दिल्ली सरकार ने ऑटो चालकों की पांच हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक मदद दी है। मृत्युंजय कुमार का कहना है कि अनलॉक में ऑटो चलाने की अनुमति के बावजूद सवारियां न होने से खर्च नहीं निकल पा रहा है। पूरे दिन मेहनत के बाद भी बामुश्किल 500 रुपये कमाते हैं। इसमें से बड़ा हिस्सा ऑटो के किराए व सीएनजी में निकल जाता है।
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शहर में परिवहन व्यवस्था 25 मार्च को लॉकडाउन के बाद से ठप है। अनलॉक में ऑटो को सशर्त अनुमति मिली है। ऑटो चालक दोबारा काम पर तो निकले, लेकिन पूरे दिन मेहनत के बाद भी 500 रुपये तक नहीं कमा पा रहे हैं। ऑटो चालकों ने बताया कि आजकल सवारियां ऑटो में बैठने से डर रही हैं। हरियाणा ऑटो चालक संघ के महामंत्री योगेश शर्मा ने कहा कि परिवार पालने के लिए काम बदलने वाले ऑटो चालकों में कोई मजदूरी कर रहा है तो कोई छोटी-मोटी नौकरी। 15 फीसदी चालक अपने ऑटो का इस्तेमाल कर सब्जी बेचने लगे हैं। करीब 15 फीसदी मकान का किराया भी नहीं दे सकते थे, वे अपने गांव लौट गए हैं।
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संघ के प्रदेशाध्यक्ष हेमंत शर्मा ने बताया कि सरकार ने असंगठित क्षेत्र के लोगों को आर्थिक मदद देने का आश्वासन दिया था, लेकिन ऑटो चालकों की तरफ ध्यान नहीं दिया गया। इनके रजिस्ट्रेशन तो किए गए, लेकिन आज तक सहायता नहीं दी गई। दिल्ली सरकार ने ऑटो चालकों की पांच हजार रुपये प्रतिमाह की आर्थिक मदद दी है। मृत्युंजय कुमार का कहना है कि अनलॉक में ऑटो चलाने की अनुमति के बावजूद सवारियां न होने से खर्च नहीं निकल पा रहा है। पूरे दिन मेहनत के बाद भी बामुश्किल 500 रुपये कमाते हैं। इसमें से बड़ा हिस्सा ऑटो के किराए व सीएनजी में निकल जाता है।
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