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20 एकड़ जमीन पर बने कृत्रिम झील : राव इंद्रजीत

Tue, 22 Sep 2026 01:08 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Tue, 22 Sep 2026 01:08 AM IST
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Artificial lake built on 20 acres of land: Rao Inderjit
जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान के लिए मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर दिया सुझाव
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मानसून के दौरान गुरुग्राम में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान और गिरते भूजल स्तर को रोकने के लिए केंद्रीय राज्य मंत्री राव इंद्रजीत सिंह ने मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी को पत्र लिखा है। उन्होंने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और प्राकृतिक जल निकासी तंत्र को बहाल करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए हैं।
राव इंद्रजीत सिंह ने सरहौल बॉर्डर के पास हरियाणा पर्यटन विभाग की करीब 20 एकड़ से अधिक जमीन पर कृत्रिम झील विकसित करने का सुझाव दिया है। उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में नाथूपुर, डीएलएफ फेज-3 सहित आसपास के क्षेत्रों का बरसाती पानी आता है। इस जमीन का उपयोग बारिश के पानी के संग्रहण और भूजल रिचार्ज के लिए किया जा सकता है। इस एरिया में नालों में मॉल, रिहायसी सोसाइटी बनने से पानी निकासी प्रभावित होती है। यहां पर अस्थायी रूप से नमो भारत के लिए जमीन दी जानी है। हालांकि इसके बाद भी यहां पर जमीन है। मंत्री के अनुसार गुरुग्राम नगर निगम के अधिकारियों, आईआईटी गांधीनगर के विशेषज्ञों और जापानी कंपनी निप्पॉन कोएई के विशेषज्ञों के साथ जलभराव को लेकर बैठक हुई। विशेषज्ञों के अनुसार प्राकृतिक बरसाती नालों, शहर में स्थित तालाबों और अन्य प्राकृतिक बहाव क्षेत्रों के रास्तों पर अतिक्रमण के कारण बारिश का पानी रिहायशी इलाकों में भर जाता है।
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किसानों को दिया जा सकता है वार्षिक मुआवजा
राव इंद्रजीत सिंह ने दौलताबाद, धनकोट, खेड़की माजरा, चंदू समेत अन्य गांवों की उन जमीनों का भी उल्लेख किया है, जहां वर्षों से बरसाती पानी जमा हो रहा है। उन्होंने सुझाव दिया कि ऐसी जमीनों पर कृत्रिम झील विकसित की जा सकती हैं और किसानों को इसके बदले वार्षिक मुआवजा दिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि कई स्थानों पर जलभराव वाली जमीन को लेकर वेटलैंड घोषित करने की प्रक्रिया भी चल रही है। इसके लिए मुआवजे का प्रस्ताव सरकार के पास भेजा गया है। उनका सुझाव है कि गुरुग्राम के मास्टर प्लान में ऐसी खाली जमीनों को जल संरक्षण के लिए विकसित किया जाए।
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प्राकृतिक नालों को अतिक्रमण मुक्त कराने की जरूरत
केंद्रीय राज्य मंत्री ने गुरुग्राम का सैटेलाइट इमेज के जरिये सर्वे कराने और पुराने प्राकृतिक नालों की पहचान कर उन्हें कब्जामुक्त कराने की दिशा में काम करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि गुरुग्राम शहर के तेजी से विस्तार के साथ-साथ पुराने बरसाती पानी के निकासी मार्गों की पहचान कर उनका संरक्षण जरूरी है। बड़े पार्कों और खुले स्थानों पर इंजेक्शन वेल बनाकर वर्षा जल को जमीन के भीतर पहुंचाने का सुझाव भी पत्र में दिया गया है।


भूजल स्तर गिरने पर जताई चिंता
नीति आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए गुरुग्राम सहित दक्षिण हरियाणा के कई जिलों में लगातार गिर रहे भूजल स्तर पर चिंता जताई गई है। पत्र के अनुसार गुरुग्राम में भूजल स्तर वर्ष 2004 में करीब 18 मीटर था, जो वर्ष 2025 में बढ़कर करीब 38 मीटर तक पहुंच गया।
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