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Gurugram News: डीयू के आकर्षण से स्थानीय कॉलेजों में घटे आवेदन
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- रोजगारपरक पाठ्यक्रमों की बढ़ी मांग, पारंपरिक कोर्सों में सीटें भरने की चुनौती
संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में दाखिला प्रक्रिया शुरू होने और रोजगार आधारित पाठ्यक्रमों की बढ़ती लोकप्रियता का असर अब जिले के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों पर भी दिखाई देने लगा है। स्नातक पाठ्यक्रमों में इस बार अपेक्षा से कम आवेदन मिलने से कॉलेजों को सीटें भरने की चिंता सताने लगी है।
कॉलेजों के अनुसार इस बार बीकॉम और अन्य कॉमर्स पाठ्यक्रमों में अपेक्षाकृत अधिक आवेदन मिले हैं, जबकि बीए, बीएससी और अन्य पारंपरिक स्नातक पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की रुचि पहले के मुकाबले कम हुई है। नए खुले कॉलेजों में यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वहां अभी छात्रों का विश्वास और आकर्षण बढ़ाने की जरूरत है। शिक्षाविदों का मानना है कि दाखिला प्रक्रिया में देरी भी इसका प्रमुख कारण है। स्थानीय कॉलेजों में आवेदन शुरू होने तक दिल्ली विश्वविद्यालय और कई केंद्रीय एवं निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी। बेहतर विकल्प और समय पर दाखिले का लाभ उठाते हुए बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने पहले ही अन्य संस्थानों में प्रवेश ले लिया।
वर्जन-
छात्रों की पसंद तेजी से बदल रही है। अब विद्यार्थी ऐसे पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनसे रोजगार और बेहतर करियर की संभावनाएं जुड़ी हों। यही कारण है कि पारंपरिक कोर्सों में हर साल आवेदन कम हो रहे हैं। -प्रो. सुभाष सपड़ा, पूर्व प्रादेशिक उपाध्यक्ष, हरियाणा राजकीय कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन
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संवाद न्यूज एजेंसी
गुरुग्राम। दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में दाखिला प्रक्रिया शुरू होने और रोजगार आधारित पाठ्यक्रमों की बढ़ती लोकप्रियता का असर अब जिले के सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों पर भी दिखाई देने लगा है। स्नातक पाठ्यक्रमों में इस बार अपेक्षा से कम आवेदन मिलने से कॉलेजों को सीटें भरने की चिंता सताने लगी है।
कॉलेजों के अनुसार इस बार बीकॉम और अन्य कॉमर्स पाठ्यक्रमों में अपेक्षाकृत अधिक आवेदन मिले हैं, जबकि बीए, बीएससी और अन्य पारंपरिक स्नातक पाठ्यक्रमों में विद्यार्थियों की रुचि पहले के मुकाबले कम हुई है। नए खुले कॉलेजों में यह स्थिति और अधिक चुनौतीपूर्ण है, क्योंकि वहां अभी छात्रों का विश्वास और आकर्षण बढ़ाने की जरूरत है। शिक्षाविदों का मानना है कि दाखिला प्रक्रिया में देरी भी इसका प्रमुख कारण है। स्थानीय कॉलेजों में आवेदन शुरू होने तक दिल्ली विश्वविद्यालय और कई केंद्रीय एवं निजी विश्वविद्यालयों में प्रवेश प्रक्रिया काफी आगे बढ़ चुकी थी। बेहतर विकल्प और समय पर दाखिले का लाभ उठाते हुए बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने पहले ही अन्य संस्थानों में प्रवेश ले लिया।
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वर्जन-
छात्रों की पसंद तेजी से बदल रही है। अब विद्यार्थी ऐसे पाठ्यक्रमों को प्राथमिकता दे रहे हैं, जिनसे रोजगार और बेहतर करियर की संभावनाएं जुड़ी हों। यही कारण है कि पारंपरिक कोर्सों में हर साल आवेदन कम हो रहे हैं। -प्रो. सुभाष सपड़ा, पूर्व प्रादेशिक उपाध्यक्ष, हरियाणा राजकीय कॉलेज टीचर्स एसोसिएशन
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