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Gurugram News: वीरता की मिसाल...व्हील चेयर से जंग तक

Wed, 20 May 2026 06:48 PM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Wed, 20 May 2026 06:48 PM IST
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An example of bravery...from wheelchair to war
राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस पर विशेष
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जिले में रहने वाले व अजेय साहस के लिए जाने वाले वीरो ने साझा किया अनुभव


पूनम

गुरुग्राम। शौर्य और वीरता की मिसाल से गुरुग्राम को गौरवान्वित करते हैं वे बहादुर जिन्होंने आतंकियों से देशवासियों की रक्षा के लिए अपनी जान की परवाह नहीं की। राष्ट्रीय आतंकवाद विरोधी दिवस पर हमने गुरुग्राम में रहने वाले अजेय साहस के लिए जाने वाले देश के दो वीरो मेजर जनरल सुनील कुमार राजदान और मेजर जनरल जीडी बख्शी से बात की।



मेजर जनरल सुनील कुमार राजदान ने आतंकियों से 14 बेटियों को बचाया

मेजर जनरल सुनील कुमार राजदान भारतीय सेना के एक अत्यंत साहसी और सम्मानित अधिकारी हैं। वे व्हीलचेयर पर होने के बावजूद मेजर जनरल के पद तक पहुंचने वाले सेना के पहले अधिकारी बनकर इतिहास रचने वाले सैनिक हैं। 8 अक्तूबर 1994 को जम्मू-कश्मीर के नौगाम सेक्टर में उन्होंने एक अभूतपूर्व सैन्य ऑपरेशन का नेतृत्व किया था। वहां आतंकियों ने 14 साल की 13 लड़कियों और एक 35 वर्षीय महिला को बंधक बनाकर कैद किया हुआ था, जिनमें से एक बेटी के पिता की गुहार पर उन्होंने इस मिशन को अंजाम दिया। इस अभियान में उनके पेट में 10 गोलियां लगी और वे हमेशा के लिए व्हीलचेयर पर आ गए। मूलत: कश्मीर के रहने वाले मेजर जनरल सुनील राजदान का परिवार कश्मीर विस्थापित होकर मथुरा आ गया था, जहां वे पले बढ़े। हालांकि, सेना ने उनका पर्याप्त सम्मान किया मगर उन्हें मलाल है कि मथुरा जहां उनका बचपन और जवानी बीती है, वहां सरकार की कभी सराहना या सम्मान नहीं मिला जबकि आम जनता उन्हें मान देती है।
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आतंकियों के भय से भाग रहे हिंदुओं का पलायन रोका


करगिल युद्ध में अपने बटालियन का कमांड के लिए सेना का विशिष्ट सेवा पदक प्राप्त मेजर जनरल जीडी बख्शी कई आतंकी मुठभेड़ का भी नेतृत्व कर चुके हैं। आतंकवाद के खिलाफ महत्वपूर्ण कार्रवाई में से एक को वे याद करते हुए बताते हैं कि 2001 से 2003 के बीच से किश्तवाड़ में तैनात थे। वे वहां 60 प्रतिशत मुसलमान और 40 प्रतिशत हिंदू थे। वहां लश्कर के आतंकियों का आतंक था। उन्होंने उनके टाॅप कमांडरों को मार गिराने की कार्रवाई शुरू की थी। जवाबी कार्रवाई में उन्होंने वहां के हिंदुओं को मारना शुरू किया। आतंकवादियों के कहर के कारण उस इलाके के हिंदू पलायन कर रहे थे, जिन्हें उन्होंने रोका और ऐसा माहौल तैयार किया कि वहां से हिंदुओं का पलायन रुक गया। जनरल बख्शी बताते हैं कि पिछले कुछ सालों से आतंकियों के प्रति सरकार की आक्रामक कार्रवाइयों से उन्हें संतोष है। उरी, बालटाल और ऑपरेशन सिंदूर ने साबित किया है कि भारतीय सेना आतंकियों को घर में घुसकर मार सकती है।
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