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लीचेट के मामले में नगर निगम व इकोग्रीन के खिलाफ होगी कार्रवाई
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गुरुग्राम (पंकज मोहन मिश्रा)। बंधवाड़ी कूड़ा निस्तारण प्लांट से रिस रहे खतरनाक लीचेट (कूड़े से रिसने वाला तरल) का मामला वैसे तो ठंडे बस्ते में जा चुका है लेकिन ज्यादा जोर देने पर एचएसपीसीबी (हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड) के अधिकारी, एमसीजी व ईकोग्रीन के खिलाफ कार्रवाई की बात कहकर मामला टालने की कोशिश करते नजर आते हैं। इस बारे में पूछने पर एचएसपीसीबी के क्षेत्रीय अधिकारी कुलदीप सिंह ने कहा कि मामले में विभाग की तरफ से नगर निगम व ईकोग्रीन कंपनी की तरफ से कार्रवाई की जाएगी। करीब साल भर पहले बंधवाड़ी कूड़ा निस्तारण प्लांट से खतरनाक लीचेट (खतरनाक तरल पदार्थ) के रिसाव का मामला सामने आया था।
उस वक्त स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि बिना उचित व्यवस्था किए बंधवाड़ी में कूड़ा निस्तारण किया जाने लगा, जिससे रिस रहे लीचेट युक्त पानी पीने के कारण कई जंगली पशु मर गए। वहीं, आसपास के लोगों ने लीचेट के चलते पूरे इलाके के भूमिगत जल को प्रदूषित होने की आशंका जताते हुए इसके जांच की मांग की थी। इस पर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने पिछले साल जुलाई-अगस्त में मौके पर जाकर लीचेट का नमूना भी लिया था।
इसके बाद की क्या कार्रवाई हुई, कोई नहीं जानता। स्थिति यह है कि बंधवाड़ी से खतरनाक लीचेट रिसने का मामला अब ठंडे बस्ते में जा चुका है। वर्तमान हालात के बारे में भी एचएसपीसीबी व ईकोग्रीन कंपनी के अधिकारी कुछ बताने के लिए तैयार नहीं हैं। लीचेट कूड़े से रिसने वाला एक तरल पदार्थ है, जिसे स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद खतरनाक बताया जा रहा है। इससे कैंसर तक की बीमारी होने की बात सामने आ चुकी है।
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बंधवाड़ी में बन गया कूड़े का पहाड़
शहर में कूड़ा निस्तारण का जिम्मा नगर निगम ने ईकोग्रीन कंपनी को दिया है। कंपनी ने 2017 से गुरुग्राम में कचरा प्रबंधन का काम शुरू किया था। तब से अब तक लाखों टन गीला कचरा यहां पर डाला जा चुका है और लीचेट के रिसाव का मुख्य वजह गीला कचरा ही है। इसी को देखते हुए 2019 तक बंधवाड़ी में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित किए जाने की योजना थी लेकिन लेकिन प्लांट लगना तो दूर इसके लिए जमीन तक उपलब्ध नहीं हो पाई। मौजूदा स्थिति यह है कि यहां पर 25 लाख टन से ज्यादा के कूड़े का पहाड़ बना हुआ है। एचएसपीसीबी और ईकोग्रीन की ढीली कार्यशैली को देखते हुए बंधवाड़ी के लोगों ने भी अब लीचेट के मुद्दे पर आवाज उठाना बंद कर दिया है।
मामले में हम लगातार नजर बनाए हुए हैं। लीचेट रिसाव के मामले में हम नगर निगम व ईकोग्रीन के खिलाफ प्रोसेक्यूशन फाइल करेंगे।
- कुलदीप सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, एचएसपीसीबी
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उस वक्त स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि बिना उचित व्यवस्था किए बंधवाड़ी में कूड़ा निस्तारण किया जाने लगा, जिससे रिस रहे लीचेट युक्त पानी पीने के कारण कई जंगली पशु मर गए। वहीं, आसपास के लोगों ने लीचेट के चलते पूरे इलाके के भूमिगत जल को प्रदूषित होने की आशंका जताते हुए इसके जांच की मांग की थी। इस पर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों ने पिछले साल जुलाई-अगस्त में मौके पर जाकर लीचेट का नमूना भी लिया था।
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इसके बाद की क्या कार्रवाई हुई, कोई नहीं जानता। स्थिति यह है कि बंधवाड़ी से खतरनाक लीचेट रिसने का मामला अब ठंडे बस्ते में जा चुका है। वर्तमान हालात के बारे में भी एचएसपीसीबी व ईकोग्रीन कंपनी के अधिकारी कुछ बताने के लिए तैयार नहीं हैं। लीचेट कूड़े से रिसने वाला एक तरल पदार्थ है, जिसे स्वास्थ्य की दृष्टि से बेहद खतरनाक बताया जा रहा है। इससे कैंसर तक की बीमारी होने की बात सामने आ चुकी है।
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बंधवाड़ी में बन गया कूड़े का पहाड़
शहर में कूड़ा निस्तारण का जिम्मा नगर निगम ने ईकोग्रीन कंपनी को दिया है। कंपनी ने 2017 से गुरुग्राम में कचरा प्रबंधन का काम शुरू किया था। तब से अब तक लाखों टन गीला कचरा यहां पर डाला जा चुका है और लीचेट के रिसाव का मुख्य वजह गीला कचरा ही है। इसी को देखते हुए 2019 तक बंधवाड़ी में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट स्थापित किए जाने की योजना थी लेकिन लेकिन प्लांट लगना तो दूर इसके लिए जमीन तक उपलब्ध नहीं हो पाई। मौजूदा स्थिति यह है कि यहां पर 25 लाख टन से ज्यादा के कूड़े का पहाड़ बना हुआ है। एचएसपीसीबी और ईकोग्रीन की ढीली कार्यशैली को देखते हुए बंधवाड़ी के लोगों ने भी अब लीचेट के मुद्दे पर आवाज उठाना बंद कर दिया है।
मामले में हम लगातार नजर बनाए हुए हैं। लीचेट रिसाव के मामले में हम नगर निगम व ईकोग्रीन के खिलाफ प्रोसेक्यूशन फाइल करेंगे।
- कुलदीप सिंह, क्षेत्रीय अधिकारी, एचएसपीसीबी