{"_id":"6a9402e25f25e5e4d90f3f2a","slug":"acting-on-his-engineer-sons-advice-the-sub-inspector-ushered-in-a-dragon-revolution-gurgaon-news-c-24-1-gur1002-99421-2026-08-30","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: इंजीनियर बेटे की सलाह पर दरोगा साहब ने ला दी ड्रैगन क्रांति","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: इंजीनियर बेटे की सलाह पर दरोगा साहब ने ला दी ड्रैगन क्रांति
विज्ञापन
फर्रुखनगर के गाँव ताजनगर का किसान सेढूराम या अपनी ड्रैगन की खेती मे फल दिखाते हुए
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ताजनगर के किसान ने किया कमाल, ड्रैगन फ्रूट की खेती से कमा रहे लाखों
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखनगर। इंजीनियर बेटे की सलाह पर एक सेवानिवृत्त दरोगा ने लीक से हटकर खेती की और ड्रैगन फ्रूट की फसल उगाकर कृषि क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति ला दी। पारंपरिक गेहूं और धान की खेती से हटकर किए गए इस आधुनिक बदलाव ने न सिर्फ उनकी आय को कई गुना बढ़ा दिया, बल्कि आसपास के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का एक नया स्रोत बनकर उभरा है।
दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त दरोगा व ताजनगर गांव के प्रगतिशील किसान सेढूराम यादव ने बताया कि उन्होंने छोटे बेटे इंजीनियर लोकेश यादव की सलाह पर वर्ष 2021 में 5 कनाल जमीन में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की थी। उन्होंने खेत में 308 पोल लगाए थे। आज एक पोल से 10 से 15 किलो फल मिल रहा है। बाजार में ड्रैगन फ्रूट 150 से 200 रुपये किलो बिक रहा है।
एक बार लगाया गया पौधा 25 साल तक देता है फल
किसान ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट कैक्टस प्रजाति का पौधा है, जिसमें पानी की जरूरत बहुत कम होती है और यह हरियाणा की जलवायु के पूरी तरह अनुकूल है। एक बार पौधा लगाने के बाद यह 20 से 25 साल तक लगातार फल देता है। इसमें किसी प्रकार की खाद और कीटनाशक की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती, जिससे लागत काफी कम आती है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि पांच कनाल में करीब ढाई से 3 लाख रुपये की लागत आती है, लेकिन दूसरे साल से ही एक से डेढ़ लाख रुपये की शुद्ध कमाई होने लगी है। गुड़गांव और दिल्ली की बड़ी मंडियों में इसकी भारी मांग है, लेकिन वे स्थानीय स्तर पर ही मंडियों में इसे बेच देते हैं।
सेढूराम यादव ने कहा कि युवाओं को नौकरी के पीछे भागने के बजाय आधुनिक खेती अपनानी चाहिए। आज आसपास के गांवों के किसान भी उनके खेत पर ड्रैगन फ्रूट की खेती देखने और सीखने आ रहे हैं। संभवतः जिले के पहले किसान हैं सेढूराम, जिन्होंने परंपरागत खेती से हटकर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर एक नई पहल की है।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
फर्रुखनगर। इंजीनियर बेटे की सलाह पर एक सेवानिवृत्त दरोगा ने लीक से हटकर खेती की और ड्रैगन फ्रूट की फसल उगाकर कृषि क्षेत्र में एक बड़ी क्रांति ला दी। पारंपरिक गेहूं और धान की खेती से हटकर किए गए इस आधुनिक बदलाव ने न सिर्फ उनकी आय को कई गुना बढ़ा दिया, बल्कि आसपास के अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा का एक नया स्रोत बनकर उभरा है।
दिल्ली पुलिस से सेवानिवृत्त दरोगा व ताजनगर गांव के प्रगतिशील किसान सेढूराम यादव ने बताया कि उन्होंने छोटे बेटे इंजीनियर लोकेश यादव की सलाह पर वर्ष 2021 में 5 कनाल जमीन में ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू की थी। उन्होंने खेत में 308 पोल लगाए थे। आज एक पोल से 10 से 15 किलो फल मिल रहा है। बाजार में ड्रैगन फ्रूट 150 से 200 रुपये किलो बिक रहा है।
विज्ञापन
एक बार लगाया गया पौधा 25 साल तक देता है फल
किसान ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट कैक्टस प्रजाति का पौधा है, जिसमें पानी की जरूरत बहुत कम होती है और यह हरियाणा की जलवायु के पूरी तरह अनुकूल है। एक बार पौधा लगाने के बाद यह 20 से 25 साल तक लगातार फल देता है। इसमें किसी प्रकार की खाद और कीटनाशक की ज्यादा जरूरत नहीं पड़ती, जिससे लागत काफी कम आती है।
विज्ञापन
उन्होंने बताया कि पांच कनाल में करीब ढाई से 3 लाख रुपये की लागत आती है, लेकिन दूसरे साल से ही एक से डेढ़ लाख रुपये की शुद्ध कमाई होने लगी है। गुड़गांव और दिल्ली की बड़ी मंडियों में इसकी भारी मांग है, लेकिन वे स्थानीय स्तर पर ही मंडियों में इसे बेच देते हैं।
सेढूराम यादव ने कहा कि युवाओं को नौकरी के पीछे भागने के बजाय आधुनिक खेती अपनानी चाहिए। आज आसपास के गांवों के किसान भी उनके खेत पर ड्रैगन फ्रूट की खेती देखने और सीखने आ रहे हैं। संभवतः जिले के पहले किसान हैं सेढूराम, जिन्होंने परंपरागत खेती से हटकर ड्रैगन फ्रूट की खेती शुरू कर एक नई पहल की है।