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Gurugram News: मोबाइल डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी में अकाउंटेंट ने की 30 करोड़ की धोखाधड़ी
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निदेशक ने बीमार होने के कारण साल भर से नहीं ली थी जानकारी
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मोबाइल डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी एमडीएम टेलीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड में अकाउंटेंट ने रिश्तेदारों व कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। बैंक में चल रही लिमिट के ब्लाक होने के बाद इसकी जानकारी प्रबंधन को मिली। कंपनी प्रबंधन ने पुलिस आयुक्त को 2022 के इस मामले की शिकायत की थी। सदर थाना पुलिस ने कंपनी प्रबंधन के बयान पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार 2019 में एमडीएम टेलीवेंचर्स लिमिटेड नाम से कंपनी बनाई गई थी। 2021 में गुरुग्राम के 71 वर्षीय अशोक कुमार साहनी इस कंपनी के निदेशक बने। इसी दौरान वे गंभीर रूप से बीमार हो गए। 2022 में उन्हें अपने दिल की बाइपास सर्जरी करानी पड़ी। कंपनी की एक और निदेशक सिल्का सलोनी बिस्वास और सीइओ प्रदीप्तो गांगुली के निर्देश पर कंपनी में अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत मोनीश मित्तल बैंक से संबंधित सारे लेन-देन देख रहे थे।
मार्च 2022 में बैंक की तरफ से कंपनी लिमिट के खाते के ब्लाक होने की जानकारी मिली। प्रदीप्तो गांगुली और मोनीश ने इसे संभालने की बात कही। इसके बाद निदेशक सिल्का सलोनी ने अप्रैल में कंपनी से इस्तीफा दे दिया। प्रदीप्तो गांगुली को बैक डेट से निदेशक बनाया गया। इस दौरान अप्रैल से नवंबर 2022 तक कंपनी के दूसरे खातों से कई अन्य दूसरी कंपनियों के बेनामी खातों व अन्य लोगों के खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए।
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बैंक खातों में उपयोग होने वाले नंबर भी बदले
मोनीश और प्रदीप्तो ने नवंबर में अशोक कुमार साहनी को फोन पर कंपनी के घाटे में जाने की बात कही और बताया कि सभी व्यावसायिक गतिविधियां बंद हैं। उन्होंने कंपनी को बेचने की राय रखी। इसके बाद अशोक ने मोनीश से वित्तीय लेन-देन की जानकारी मांगी, लेकिन उन्होंने देने से इनकार कर दिया। इस दौरान बैंक से जांच करने पर पता चला कि मोनीश ने बैंक खातों में उपयोग होने वाले मोबाइल नंबरों को भी बदल दिया। ट्रांसफर के दौरान मोनीश के पास ही ओटीपी व अन्य मैसेज जाते रहे। इससे प्रबंधन को जानकारी नहीं मिल पाई। बैंक से जांच में पता चला कि पांच-छह महीनों में 30 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी की गई है। यह भी पता चला कि आरोपी ने बैंक के ओवरड्राफ्ट, क्रेडिट सीमा का उपयोग अपने रिश्तेदारों की कंपनियों को पैसा दिलाने के लिए किया। फिलहाल अब सदर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मोबाइल डिस्ट्रीब्यूटर कंपनी एमडीएम टेलीवेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड में अकाउंटेंट ने रिश्तेदारों व कुछ अन्य लोगों के साथ मिलकर 30 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की। बैंक में चल रही लिमिट के ब्लाक होने के बाद इसकी जानकारी प्रबंधन को मिली। कंपनी प्रबंधन ने पुलिस आयुक्त को 2022 के इस मामले की शिकायत की थी। सदर थाना पुलिस ने कंपनी प्रबंधन के बयान पर केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
पुलिस के अनुसार 2019 में एमडीएम टेलीवेंचर्स लिमिटेड नाम से कंपनी बनाई गई थी। 2021 में गुरुग्राम के 71 वर्षीय अशोक कुमार साहनी इस कंपनी के निदेशक बने। इसी दौरान वे गंभीर रूप से बीमार हो गए। 2022 में उन्हें अपने दिल की बाइपास सर्जरी करानी पड़ी। कंपनी की एक और निदेशक सिल्का सलोनी बिस्वास और सीइओ प्रदीप्तो गांगुली के निर्देश पर कंपनी में अकाउंटेंट के रूप में कार्यरत मोनीश मित्तल बैंक से संबंधित सारे लेन-देन देख रहे थे।
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मार्च 2022 में बैंक की तरफ से कंपनी लिमिट के खाते के ब्लाक होने की जानकारी मिली। प्रदीप्तो गांगुली और मोनीश ने इसे संभालने की बात कही। इसके बाद निदेशक सिल्का सलोनी ने अप्रैल में कंपनी से इस्तीफा दे दिया। प्रदीप्तो गांगुली को बैक डेट से निदेशक बनाया गया। इस दौरान अप्रैल से नवंबर 2022 तक कंपनी के दूसरे खातों से कई अन्य दूसरी कंपनियों के बेनामी खातों व अन्य लोगों के खातों में करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए।
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बैंक खातों में उपयोग होने वाले नंबर भी बदले
मोनीश और प्रदीप्तो ने नवंबर में अशोक कुमार साहनी को फोन पर कंपनी के घाटे में जाने की बात कही और बताया कि सभी व्यावसायिक गतिविधियां बंद हैं। उन्होंने कंपनी को बेचने की राय रखी। इसके बाद अशोक ने मोनीश से वित्तीय लेन-देन की जानकारी मांगी, लेकिन उन्होंने देने से इनकार कर दिया। इस दौरान बैंक से जांच करने पर पता चला कि मोनीश ने बैंक खातों में उपयोग होने वाले मोबाइल नंबरों को भी बदल दिया। ट्रांसफर के दौरान मोनीश के पास ही ओटीपी व अन्य मैसेज जाते रहे। इससे प्रबंधन को जानकारी नहीं मिल पाई। बैंक से जांच में पता चला कि पांच-छह महीनों में 30 करोड़ से ज्यादा की धोखाधड़ी की गई है। यह भी पता चला कि आरोपी ने बैंक के ओवरड्राफ्ट, क्रेडिट सीमा का उपयोग अपने रिश्तेदारों की कंपनियों को पैसा दिलाने के लिए किया। फिलहाल अब सदर थाना पुलिस ने केस दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।