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अभय चौटाला को इस्तीफा नहीं, सरकार के खिलाफ वोट करना चाहिए
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गुरुग्राम। पूर्व मुख्यमंत्री एवं विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने कृषि कानूनों के खिलाफ इंडियन नेशनल लोकदल के नेता अभय चौटाला के विधायक पद से त्यागपत्र देने पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि उन्हें इस्तीफा देने के बजाय कांग्रेस की ओर से लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव पर गठबंधन सरकार के खिलाफ वोट करना चाहिए। उनके त्यागपत्र देने से राज्य सरकार को ही फायदा होगा, क्योंकि विपक्ष का एक वोट कम हो जाएगा।
भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बुधवार को पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया के निवास पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य सरकार जनता और विधायकों का विश्वास खो चुकी है। ऐसी सरकार अपनी नाकामियों के बोझ से अपने आप गिर जाती हैं, लेकिन कांग्रेस किसानों के मुद्दे पर राज्य सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहती है। उनकी मंशा है कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बगावत वाली बयानबाजी करने वाले विधायकों का सच भी जनता के सामने आए। उस दौरान उनके बारे में मालूम हो जाएगा कि वे किसानों के साथ है या फिर सरकार के साथ है।
उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन को किसानों का नहीं, बल्कि आम उपभोक्ता और गरीब परिवार का भी करार दिया। कहा कि इन कानूनों से सभी तबकों को नुकसान होगा। 50 दिनों से प्रदेश का अन्नदाता आंदोलनरत है। वो दिल्ली बॉर्डर समेत पूरे प्रदेश में भीषण ठंड के बीच खुले आसमान के नीचे धरना दे रहे हैं। करीब 70 किसानों की मौत आंदोलन के दौरान हो चुकी है, लेकिन सरकार उनकी मांगे मानने की बजाय उन्हें तारीखों के फेर में उलझा रही है। सरकार को किसानों की हालत और हालात की गंभीरता को समझते हुए बिना देरी आंदोलनकारियों की मांगें माननी चाहिए।
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उन्होंने किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की भी अपील करते हुए कहा कि सरकार को द्वेष भावना से कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। लोकतंत्र में जनभावनाओं और अहिंसक आंदोलनों को सत्ताबल से दबाया नहीं जा सकता। शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे किसानों पर बार-बार वाटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। सरकार को समझना चाहिए कि किसान टकराव नहीं समाधान चाहते हैं।
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भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बुधवार को पूर्व मंत्री सुखबीर कटारिया के निवास पर संवाददाता सम्मेलन में कहा कि राज्य सरकार जनता और विधायकों का विश्वास खो चुकी है। ऐसी सरकार अपनी नाकामियों के बोझ से अपने आप गिर जाती हैं, लेकिन कांग्रेस किसानों के मुद्दे पर राज्य सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाना चाहती है। उनकी मंशा है कि अविश्वास प्रस्ताव के दौरान बगावत वाली बयानबाजी करने वाले विधायकों का सच भी जनता के सामने आए। उस दौरान उनके बारे में मालूम हो जाएगा कि वे किसानों के साथ है या फिर सरकार के साथ है।
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उन्होंने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन को किसानों का नहीं, बल्कि आम उपभोक्ता और गरीब परिवार का भी करार दिया। कहा कि इन कानूनों से सभी तबकों को नुकसान होगा। 50 दिनों से प्रदेश का अन्नदाता आंदोलनरत है। वो दिल्ली बॉर्डर समेत पूरे प्रदेश में भीषण ठंड के बीच खुले आसमान के नीचे धरना दे रहे हैं। करीब 70 किसानों की मौत आंदोलन के दौरान हो चुकी है, लेकिन सरकार उनकी मांगे मानने की बजाय उन्हें तारीखों के फेर में उलझा रही है। सरकार को किसानों की हालत और हालात की गंभीरता को समझते हुए बिना देरी आंदोलनकारियों की मांगें माननी चाहिए।
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उन्होंने किसानों पर दर्ज मुकदमे वापस लेने की भी अपील करते हुए कहा कि सरकार को द्वेष भावना से कार्रवाई नहीं करनी चाहिए। लोकतंत्र में जनभावनाओं और अहिंसक आंदोलनों को सत्ताबल से दबाया नहीं जा सकता। शांतिपूर्ण आंदोलन कर रहे किसानों पर बार-बार वाटर कैनन और आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पूरी तरह अलोकतांत्रिक है। सरकार को समझना चाहिए कि किसान टकराव नहीं समाधान चाहते हैं।