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Gurugram News: करोड़ों की पंचायती भूमि का बड़ा घोटाला उजागर
Fri, 24 Oct 2025 11:24 PM IST
नोएडा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
संवाद न्यूज एजेंसी, गुरुग्राम
Updated Fri, 24 Oct 2025 11:24 PM IST
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राजस्व अधिकारियों पर धोखाधड़ी का आरोप, ग्राम पंचायत सराय की भूमि से जुड़ा है मामला
संवाद न्यूज एजेंसी
तावडू। उपमंडल में ग्राम पंचायत सराय-गंगानी में करोड़ों रुपये कीमत वाली पंचायती भूमि की गलत रजिस्ट्री का मामला सामने आया है। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) तावडू ने उपायुक्त (डीसी) नूंह को दो अलग-अलग पत्र भेजकर इस घोटाले की जांच की मांग की है। एक पत्र में राजस्व विभाग के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अपील की गई है, जबकि दूसरे में फ्रॉड रजिस्ट्री को रद्द करने का अनुरोध किया गया है। यह भूमि आईटीसी ग्रैंड भारत होटल के सामने स्थित है और इसका बाजार मूल्य प्रति एकड़ करीब 15 करोड़ रुपये आंका जा रहा है, जबकि जमीन रजिस्ट्री में कुल कीमत करीब 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत सराय की गांव गंगानी में खेवट नंबर 377, खतौनी नंबर 379 और खसरा नंबर 224 की कुल 37 कनाल 5 मरला भूमि पंचायत देह की संपत्ति है। जमाबंदी 2016-17 के रिकॉर्ड में यह स्पष्ट रूप से पंचायत के नाम दर्ज है। हालांकि गांव कोटा खंडेवला के सुरजमल पुत्र दलीप सिंह के वारिसों- धर्मपाल, सुखबीर, सतबीर उर्फ सत्ते और ज्ञानचंद ने इस भूमि को गैर-कानूनी तरीके से अपने नाम रजिस्टर्ड करा लिया। सुरजमल मात्र गैर-मौरूसी (गैर-वारिसी किराएदार) थे और उनके पास भूमि बेचने या हस्तांतरित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। बीडीपीओ तावडू ने डीसी को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि यह गैर-कानूनी रजिस्ट्री राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत, आपराधिक साजिश और लापरवाही के बिना संभव नहीं थी। इसमें उप-पंजीयक कार्यालय के स्टाफ, पटवारी और कानूनगो की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। भारतीय दंड संहिता की धाराओं धोखाधड़ी जालसाजी और साजिश के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही एक निष्पक्ष और कड़ी जांच सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।
कोर्ट में विचाराधीन है मामला
इस मामले की न्यायिक स्थिति पर नजर डालें तो यह पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़ में एक केस विचाराधीन था। 21 दिसंबर 2023 को हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को पंजाब ग्राम साझा भूमि (विनियमन) अधिनियम 1961 की धारा 13-ए के तहत नियमित मुकदमा दायर करने की अनुमति देकर याचिका वापस लेने की इजाजत दी थी। अदालत ने जमाबंदी 2016-17 का हवाला देते हुए भूमि को ग्राम पंचायत की संपत्ति माना था। इसके बावजूद, तहसील प्रशासन ने कथित भूमाफिया और राजनीतिक दबाव में आकर बीते तीन अक्तूबर को रजिस्ट्री कर दी। दूसरे पत्र में बीडीपीओ ने इस फ्रॉड रजिस्ट्री को रद्द करने की मांग की है, ताकि पंचायती संपत्ति की रक्षा हो सके। पत्र की प्रतियां मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद नूंह, उपमंडल अधिकारी तावडू और जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी नूंह को भी भेजी गई हैं। वहीं, डीसी कार्यालय से अब मामले की जांच शुरू होने की संभावना है।
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यह पंचायती भूमि पर गलत कब्जा और रजिस्ट्री नियमों का खुला उल्लंघन है और सख्त कार्रवाई की जरूरत है। अरुण कुमार, बीडीपीओ
आरोप निराधार हैं। रजिस्ट्री कोर्ट आदेश और दस्तावेजों के मूल्यांकन पर की गई है। निष्पक्ष जांच के लिए तैयार हैं। रीता ग्रोवर, तहसीलदार तावडू
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संवाद न्यूज एजेंसी
तावडू। उपमंडल में ग्राम पंचायत सराय-गंगानी में करोड़ों रुपये कीमत वाली पंचायती भूमि की गलत रजिस्ट्री का मामला सामने आया है। खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी (बीडीपीओ) तावडू ने उपायुक्त (डीसी) नूंह को दो अलग-अलग पत्र भेजकर इस घोटाले की जांच की मांग की है। एक पत्र में राजस्व विभाग के अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अपील की गई है, जबकि दूसरे में फ्रॉड रजिस्ट्री को रद्द करने का अनुरोध किया गया है। यह भूमि आईटीसी ग्रैंड भारत होटल के सामने स्थित है और इसका बाजार मूल्य प्रति एकड़ करीब 15 करोड़ रुपये आंका जा रहा है, जबकि जमीन रजिस्ट्री में कुल कीमत करीब 8 करोड़ रुपये बताई जा रही है।
जानकारी के मुताबिक ग्राम पंचायत सराय की गांव गंगानी में खेवट नंबर 377, खतौनी नंबर 379 और खसरा नंबर 224 की कुल 37 कनाल 5 मरला भूमि पंचायत देह की संपत्ति है। जमाबंदी 2016-17 के रिकॉर्ड में यह स्पष्ट रूप से पंचायत के नाम दर्ज है। हालांकि गांव कोटा खंडेवला के सुरजमल पुत्र दलीप सिंह के वारिसों- धर्मपाल, सुखबीर, सतबीर उर्फ सत्ते और ज्ञानचंद ने इस भूमि को गैर-कानूनी तरीके से अपने नाम रजिस्टर्ड करा लिया। सुरजमल मात्र गैर-मौरूसी (गैर-वारिसी किराएदार) थे और उनके पास भूमि बेचने या हस्तांतरित करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं था। बीडीपीओ तावडू ने डीसी को भेजे पत्र में आरोप लगाया है कि यह गैर-कानूनी रजिस्ट्री राजस्व विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत, आपराधिक साजिश और लापरवाही के बिना संभव नहीं थी। इसमें उप-पंजीयक कार्यालय के स्टाफ, पटवारी और कानूनगो की भूमिका संदिग्ध बताई गई है। भारतीय दंड संहिता की धाराओं धोखाधड़ी जालसाजी और साजिश के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है। साथ ही एक निष्पक्ष और कड़ी जांच सुनिश्चित करने का अनुरोध किया गया है।
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कोर्ट में विचाराधीन है मामला
इस मामले की न्यायिक स्थिति पर नजर डालें तो यह पहले पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट, चंडीगढ़ में एक केस विचाराधीन था। 21 दिसंबर 2023 को हाईकोर्ट ने याचिकाकर्ताओं को पंजाब ग्राम साझा भूमि (विनियमन) अधिनियम 1961 की धारा 13-ए के तहत नियमित मुकदमा दायर करने की अनुमति देकर याचिका वापस लेने की इजाजत दी थी। अदालत ने जमाबंदी 2016-17 का हवाला देते हुए भूमि को ग्राम पंचायत की संपत्ति माना था। इसके बावजूद, तहसील प्रशासन ने कथित भूमाफिया और राजनीतिक दबाव में आकर बीते तीन अक्तूबर को रजिस्ट्री कर दी। दूसरे पत्र में बीडीपीओ ने इस फ्रॉड रजिस्ट्री को रद्द करने की मांग की है, ताकि पंचायती संपत्ति की रक्षा हो सके। पत्र की प्रतियां मुख्य कार्यकारी अधिकारी जिला परिषद नूंह, उपमंडल अधिकारी तावडू और जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी नूंह को भी भेजी गई हैं। वहीं, डीसी कार्यालय से अब मामले की जांच शुरू होने की संभावना है।
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यह पंचायती भूमि पर गलत कब्जा और रजिस्ट्री नियमों का खुला उल्लंघन है और सख्त कार्रवाई की जरूरत है। अरुण कुमार, बीडीपीओ
आरोप निराधार हैं। रजिस्ट्री कोर्ट आदेश और दस्तावेजों के मूल्यांकन पर की गई है। निष्पक्ष जांच के लिए तैयार हैं। रीता ग्रोवर, तहसीलदार तावडू