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Gurugram News: बारिश के दौरान जलभराव रोकने के लिए बनेगा बाढ़ नियंत्रण केंद्र
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पश्चिम क्षेत्र और एनएच-48 के मास्टर स्टॉर्म वॉटर ड्रेन की निगरानी के लिए जारी टेंडर
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मानसून के दौरान शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके तहत पश्चिम क्षेत्र और एनएच-48 के मास्टर स्टॉर्म वाटर ड्रेन के सुचारू संचालन के लिए बाढ़ नियंत्रण केंद्र स्थापित करने की योजना है। इस पर करीब 2.76 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
योजना के तहत मानसून के दौरान ड्रेनेज सिस्टम की निगरानी, जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बाढ़ नियंत्रण कार्यालय स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा ड्रेनों की सफाई, पंपिंग व्यवस्था, मशीनरी संचालन और संबंधित अन्य कार्य भी किए जाएंगे।
इस कार्य की अनुमानित लागत 2.76 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। अधिकारियों के अनुसार, मानसून के दौरान एनएच-48 और पश्चिमी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को कम करने के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे बारिश के समय ट्रैफिक बाधित होने की समस्या में भी कमी आने की उम्मीद है। योजना के अनुसार इसके तहत संभावित जगहों पर जेनसेट, पंप, जेसीबी, श्रमिक, मोबाइल पंप सेट समेत अन्य उपकरण शामिल है। फ्लड कंट्रोल रूम के जरिए ही जलभराव की समस्या पर एक रणनीति बनाकर काम किया जाएगा और शहर को इस समस्या से निजात दिलाई जाएगी। योजना के तहत हाईवे के अंडरपास में मॉक ड्रिल की जानी है और इसके लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता विक्रम सिंह ने बताया कि इसके लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। मानसून के दौरान शहर में जलभराव की समस्या से निपटने के लिए गुरुग्राम महानगर विकास प्राधिकरण (जीएमडीए) ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। इसके तहत पश्चिम क्षेत्र और एनएच-48 के मास्टर स्टॉर्म वाटर ड्रेन के सुचारू संचालन के लिए बाढ़ नियंत्रण केंद्र स्थापित करने की योजना है। इस पर करीब 2.76 करोड़ रुपये खर्च होंगे।
योजना के तहत मानसून के दौरान ड्रेनेज सिस्टम की निगरानी, जल निकासी व्यवस्था को दुरुस्त रखने और आपात स्थिति में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के लिए बाढ़ नियंत्रण कार्यालय स्थापित किया जाएगा। इसके अलावा ड्रेनों की सफाई, पंपिंग व्यवस्था, मशीनरी संचालन और संबंधित अन्य कार्य भी किए जाएंगे।
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इस कार्य की अनुमानित लागत 2.76 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। अधिकारियों के अनुसार, मानसून के दौरान एनएच-48 और पश्चिमी क्षेत्रों में जलभराव की समस्या को कम करने के लिए यह व्यवस्था महत्वपूर्ण साबित होगी। इससे बारिश के समय ट्रैफिक बाधित होने की समस्या में भी कमी आने की उम्मीद है। योजना के अनुसार इसके तहत संभावित जगहों पर जेनसेट, पंप, जेसीबी, श्रमिक, मोबाइल पंप सेट समेत अन्य उपकरण शामिल है। फ्लड कंट्रोल रूम के जरिए ही जलभराव की समस्या पर एक रणनीति बनाकर काम किया जाएगा और शहर को इस समस्या से निजात दिलाई जाएगी। योजना के तहत हाईवे के अंडरपास में मॉक ड्रिल की जानी है और इसके लिए कार्ययोजना तैयार की गई है। जीएमडीए के कार्यकारी अभियंता विक्रम सिंह ने बताया कि इसके लिए कदम उठाए जा रहे हैं।
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