{"_id":"6ad4b8a30ff468829604bec2","slug":"a-devotee-of-rama-carries-with-him-a-token-of-rama-gurgaon-news-c-24-1-gur1002-104668-2026-10-18","type":"story","status":"publish","title_hn":"Gurugram News: राम भक्त ले चला रे राम की निशानी...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Gurugram News: राम भक्त ले चला रे राम की निशानी...
विज्ञापन
श्री बाबा हरदेवा रामलीला के मंचन में भरत श्रीराम का संवाद होता हुआ। अयोजक
हेलीमंडी रामलीला में भरत मिलाप, सीता हरण व जटायु-रावण युद्ध का हुआ मंचन
संवाद न्यूज एजेंसी
पटौदी। श्री बाबा हरदेवा रामलीला में शनिवार रात प्रसिद्ध भजन की पंक्तियों राम भक्त ले चला रे राम की निशानी का जीवंत दृश्य देखने को मिला, जब वनवास के दौरान भगवान श्रीराम से मिलने पहुंचे भरत की व्याकुलता और भाई के प्रति उनका अगाध प्रेम देख दर्शक भावुक हो उठे। मंच पर कलाकारों ने प्रभु श्रीराम के त्याग, अद्वितीय भ्रातृप्रेम और पिता के प्रति वचनबद्धता को अपने जीवंत अभिनय से साकार कर दिया। इस दौरान पिता दशरथ के निधन का समाचार पाकर जहां मंच से लेकर दीर्घा तक शोक का माहौल बन गया, वहीं माता कैकेयी के क्षमा मांगने और श्रीराम द्वारा उन्हें विधाता का विधान कहकर समझाने के संवादों ने दर्शकों को पूरी तरह रामकथा से बांधे रखा।
रघुकुल रीत सदा चली आई...
भरत ने श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजपाट संभालने का आग्रह किया। श्रीराम ने अपने पिता को दिए वचन का पालन करने की बात कही। उन्होंने कहा कि रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई। श्रीराम ने स्पष्ट किया कि 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद ही वह अयोध्या लौटेंगे। यह प्रसंग भाई के प्रति प्रेम, त्याग और सम्मान का संदेश देता है।
शूर्पणखा की नाक काटने का मंचन हुआ
रामलीला के अगले प्रसंगों में लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक काटने का मंचन हुआ। इसके बाद खर-दूषण वध, शूर्पणखा और रावण के संवाद भी दिखाए गए। सीता हरण तथा जटायु-रावण युद्ध का भी प्रभावशाली ढंग से मंचन किया गया। कोलकाता से आए कलाकारों ने विभिन्न पात्रों की भूमिकाएं निभाईं। इस अवसर पर पूर्व नगरपालिका चेयरमैन शिव कुमार गुप्ता, कमल गोयल, पार्षद राकेश कुमार और भारत भूषण सहित कई गणमान्य लोग तथा दर्शक मौजूद रहे।
विज्ञापन
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
पटौदी। श्री बाबा हरदेवा रामलीला में शनिवार रात प्रसिद्ध भजन की पंक्तियों राम भक्त ले चला रे राम की निशानी का जीवंत दृश्य देखने को मिला, जब वनवास के दौरान भगवान श्रीराम से मिलने पहुंचे भरत की व्याकुलता और भाई के प्रति उनका अगाध प्रेम देख दर्शक भावुक हो उठे। मंच पर कलाकारों ने प्रभु श्रीराम के त्याग, अद्वितीय भ्रातृप्रेम और पिता के प्रति वचनबद्धता को अपने जीवंत अभिनय से साकार कर दिया। इस दौरान पिता दशरथ के निधन का समाचार पाकर जहां मंच से लेकर दीर्घा तक शोक का माहौल बन गया, वहीं माता कैकेयी के क्षमा मांगने और श्रीराम द्वारा उन्हें विधाता का विधान कहकर समझाने के संवादों ने दर्शकों को पूरी तरह रामकथा से बांधे रखा।
रघुकुल रीत सदा चली आई...
भरत ने श्रीराम से अयोध्या लौटकर राजपाट संभालने का आग्रह किया। श्रीराम ने अपने पिता को दिए वचन का पालन करने की बात कही। उन्होंने कहा कि रघुकुल रीत सदा चली आई, प्राण जाए पर वचन न जाई। श्रीराम ने स्पष्ट किया कि 14 वर्ष का वनवास पूरा करने के बाद ही वह अयोध्या लौटेंगे। यह प्रसंग भाई के प्रति प्रेम, त्याग और सम्मान का संदेश देता है।
विज्ञापन
शूर्पणखा की नाक काटने का मंचन हुआ
रामलीला के अगले प्रसंगों में लक्ष्मण द्वारा शूर्पणखा की नाक काटने का मंचन हुआ। इसके बाद खर-दूषण वध, शूर्पणखा और रावण के संवाद भी दिखाए गए। सीता हरण तथा जटायु-रावण युद्ध का भी प्रभावशाली ढंग से मंचन किया गया। कोलकाता से आए कलाकारों ने विभिन्न पात्रों की भूमिकाएं निभाईं। इस अवसर पर पूर्व नगरपालिका चेयरमैन शिव कुमार गुप्ता, कमल गोयल, पार्षद राकेश कुमार और भारत भूषण सहित कई गणमान्य लोग तथा दर्शक मौजूद रहे।
विज्ञापन