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प्री-मेच्योर बच्चा देने पर फर्टिलिटी सेंटर के खिलाफ दी शिकायत
Updated Sun, 29 Apr 2018 11:32 PM IST
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प्री-मेच्योर बच्चा देने पर फर्टिलिटी सेंटर के खिलाफ शिकायत
गुरुग्राम। हेल्दी बेबी का दावा फेल होने पर एक व्यक्ति ने सेक्टर-14 स्थित एक फर्टिलिटी सेंटर के खिलाफ जिला मेडिकल नेग्लिजेंसी बोर्ड को शिकायत दी है। आरोप है कि आईवीएफ के लिए 11 लाख रुपये चार्ज करने के बाद भी फर्टिलिटी सेंटर ने हेल्दी बेबी देने की बजाय प्री-मेच्योर बच्चा थमा दिया। जिसके एक हिस्से की ग्रोथ कम है। बोर्ड ने शिकायत के आधार पर दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उनकी पत्नी मां बनने में असक्षम है। बच्चे की चाह में उन्होंने वर्ष 2016 में सेक्टर-46 स्थित एक फर्टिलिटी सेंटर से संपर्क किया था। यहां डॉक्टर ने उन्हें हेल्दी बेबी देने का वादा किया और इसके लिए उनसे 8 लाख रुपये का अनुबंध साइन करवाया गया था। जिसके बाद फर्टिलिटी सेंटर ने हैदराबाद स्थित अपने दूसरे सेंटर में सेगरोगेसी की मदद से मई 2017 में डिलीवरी की डेट बताई। नीरज का आरोप है कि फर्टिलिटी सेंटर ने 30 मार्च को ही उन्हें बच्चा पैदा होने की सूचना दे दी। इसके बाद वह हैदराबाद स्थित सेंटर पर गए। जहां वंटिलेटर पर बच्चा दिखाया गया। नीरज के मुताबिक वह केवल 1 किलो 400 ग्राम का था। बच्चे के बारे में पूछने पर सेंटर की ओर से उनसे कहा गया कि बच्चा कुछ दिन में बढ़ने लगेगा, लेकिन वह बच्चा प्री-मेच्योर है और उसका दाहिना हिस्सा नहीं बढ़ रहा है। इस मामले में अब नीरज ने मेडिकल नेग्लिजेंसी बोर्ड को फर्टिलिटी सेंटर के खिलाफ शिकायत दी है। आरोप है कि सेंटर ने बच्चे का डीएनए टेस्ट भी नहीं करवाया और उन्हें अनहेल्दी बेबी थमा दिया।
मामले की जांच में शामिल मेडिकल नेग्लिजेंसी बोर्ड के सदस्य डॉ संजय नरूला ने बताया कि शिकायत पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शिकायतकर्ता और सेंटर की ओर से वकील द्वारा दी गई दलील दर्ज कर ली गई है। विशेषज्ञ की राय के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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गुरुग्राम। हेल्दी बेबी का दावा फेल होने पर एक व्यक्ति ने सेक्टर-14 स्थित एक फर्टिलिटी सेंटर के खिलाफ जिला मेडिकल नेग्लिजेंसी बोर्ड को शिकायत दी है। आरोप है कि आईवीएफ के लिए 11 लाख रुपये चार्ज करने के बाद भी फर्टिलिटी सेंटर ने हेल्दी बेबी देने की बजाय प्री-मेच्योर बच्चा थमा दिया। जिसके एक हिस्से की ग्रोथ कम है। बोर्ड ने शिकायत के आधार पर दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
शिकायतकर्ता ने बताया कि उनकी पत्नी मां बनने में असक्षम है। बच्चे की चाह में उन्होंने वर्ष 2016 में सेक्टर-46 स्थित एक फर्टिलिटी सेंटर से संपर्क किया था। यहां डॉक्टर ने उन्हें हेल्दी बेबी देने का वादा किया और इसके लिए उनसे 8 लाख रुपये का अनुबंध साइन करवाया गया था। जिसके बाद फर्टिलिटी सेंटर ने हैदराबाद स्थित अपने दूसरे सेंटर में सेगरोगेसी की मदद से मई 2017 में डिलीवरी की डेट बताई। नीरज का आरोप है कि फर्टिलिटी सेंटर ने 30 मार्च को ही उन्हें बच्चा पैदा होने की सूचना दे दी। इसके बाद वह हैदराबाद स्थित सेंटर पर गए। जहां वंटिलेटर पर बच्चा दिखाया गया। नीरज के मुताबिक वह केवल 1 किलो 400 ग्राम का था। बच्चे के बारे में पूछने पर सेंटर की ओर से उनसे कहा गया कि बच्चा कुछ दिन में बढ़ने लगेगा, लेकिन वह बच्चा प्री-मेच्योर है और उसका दाहिना हिस्सा नहीं बढ़ रहा है। इस मामले में अब नीरज ने मेडिकल नेग्लिजेंसी बोर्ड को फर्टिलिटी सेंटर के खिलाफ शिकायत दी है। आरोप है कि सेंटर ने बच्चे का डीएनए टेस्ट भी नहीं करवाया और उन्हें अनहेल्दी बेबी थमा दिया।
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मामले की जांच में शामिल मेडिकल नेग्लिजेंसी बोर्ड के सदस्य डॉ संजय नरूला ने बताया कि शिकायत पर कार्रवाई शुरू कर दी गई है। शिकायतकर्ता और सेंटर की ओर से वकील द्वारा दी गई दलील दर्ज कर ली गई है। विशेषज्ञ की राय के बाद रिपोर्ट तैयार की जाएगी।
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