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पर्यावरण मंजूरी लिए बिना अरावली क्षेत्र में कैसे बना पुलिस ट्रेनिंग सेंटर प्रमुख मुख्य संरक्षक वन विभाग दे जवाब
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पर्यावरण मंजूरी लिए बिना पुलिस ट्रेनिंग सेंटर बनने पर जवाब तलब
गुरुग्राम। भोंडसी स्थित अरावली क्षेत्र में 398 एकड़ जमीन पर पर्यावरण मंजूरी लिए बिना पुलिस ट्रेनिंग सेंटर किस तरह स्थापित हुआ वन विभाग के प्रमुख मुख्य संरक्षक से इसका जवाब मांगा गया है। साथ ही इस मामले में विभाग ने क्या कार्रवाई की इसकी भी रिपोर्ट तलब की गई है। मामले में दायर एक याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) ने यह आदेश जारी किए हैं। वन विभाग के प्रमुख मुख्य संरक्षक को एक महीने के अंदर रिपोर्ट जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। मामले में अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
मानेसर के पूर्व सरपंच व पर्यावरणविद् राम अवतार यादव ने बताया कि पंजाब भू संरक्षण अधिनियम 1900 (पीएलपीए) की दफा 4 व 5 के तहत भोंडसी स्थित अरावली क्षेत्र की 398 एकड़ जमीन सुरक्षित थी। इंडियन रिजर्व बटालियन (आइआरबी) ने पुलिस ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर बनाने के लिए इस जमीन का अधिग्रहण करने के लिए वन विभाग को प्रस्ताव भेजा था। वन विभाग से पर्यावरण मंजूरी मिले बिना ही पुलिस प्रशासन ने पांच हजार पेड़ों की कटाई कर वहां 59 एकड़ में अपना ट्रेनिंग सेंटर स्थापित कर दिया। इस बात का खुलाया उनके द्वारा लगाई गई ही एक आरटीआई से हुआ।
इसके आधार पर राम अवतार की ओर से गत दिनों एनजीटी में याचिका दायर की गई थी। जिसमें नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए इस पुलिस ट्रेनिंग सेंटर को ढहाने की मांग की थी। इस याचिका पर मंगलवार को एनजीटी में सुनवाई हुई। एनजीटी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इससे जुड़े तथ्यों और मामले में वन विभाग ने क्या कार्रवाई की इसके लिए वन विभाग के प्रमुख मुख्य संरक्षक को एक महीने में अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता राम अवतार यादव का कहना है कि वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ही इस तरह के अवैध निर्माण हो रहे हैं। यही कारण है कि गुरुग्राम में अरावली क्षेत्र लगातार घटता जा रहा है। जब तक इस पुलिट ट्रेनिंग सेंटर को ढहा कर दोबारा वहां पौधारोपण नहीं किया जाता तब तक अपनी लड़ाई जारी रखुंगा।
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गुरुग्राम। भोंडसी स्थित अरावली क्षेत्र में 398 एकड़ जमीन पर पर्यावरण मंजूरी लिए बिना पुलिस ट्रेनिंग सेंटर किस तरह स्थापित हुआ वन विभाग के प्रमुख मुख्य संरक्षक से इसका जवाब मांगा गया है। साथ ही इस मामले में विभाग ने क्या कार्रवाई की इसकी भी रिपोर्ट तलब की गई है। मामले में दायर एक याचिका पर मंगलवार को सुनवाई करते हुए नेशनल ग्रीन टिब्यूनल (एनजीटी) ने यह आदेश जारी किए हैं। वन विभाग के प्रमुख मुख्य संरक्षक को एक महीने के अंदर रिपोर्ट जमा करवाने के निर्देश दिए गए हैं। मामले में अगली सुनवाई 8 जुलाई को होगी।
मानेसर के पूर्व सरपंच व पर्यावरणविद् राम अवतार यादव ने बताया कि पंजाब भू संरक्षण अधिनियम 1900 (पीएलपीए) की दफा 4 व 5 के तहत भोंडसी स्थित अरावली क्षेत्र की 398 एकड़ जमीन सुरक्षित थी। इंडियन रिजर्व बटालियन (आइआरबी) ने पुलिस ट्रेनिंग एंड रिसर्च सेंटर बनाने के लिए इस जमीन का अधिग्रहण करने के लिए वन विभाग को प्रस्ताव भेजा था। वन विभाग से पर्यावरण मंजूरी मिले बिना ही पुलिस प्रशासन ने पांच हजार पेड़ों की कटाई कर वहां 59 एकड़ में अपना ट्रेनिंग सेंटर स्थापित कर दिया। इस बात का खुलाया उनके द्वारा लगाई गई ही एक आरटीआई से हुआ।
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इसके आधार पर राम अवतार की ओर से गत दिनों एनजीटी में याचिका दायर की गई थी। जिसमें नियमों का उल्लंघन कर बनाए गए इस पुलिस ट्रेनिंग सेंटर को ढहाने की मांग की थी। इस याचिका पर मंगलवार को एनजीटी में सुनवाई हुई। एनजीटी ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए इससे जुड़े तथ्यों और मामले में वन विभाग ने क्या कार्रवाई की इसके लिए वन विभाग के प्रमुख मुख्य संरक्षक को एक महीने में अपनी रिपोर्ट देने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता राम अवतार यादव का कहना है कि वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ही इस तरह के अवैध निर्माण हो रहे हैं। यही कारण है कि गुरुग्राम में अरावली क्षेत्र लगातार घटता जा रहा है। जब तक इस पुलिट ट्रेनिंग सेंटर को ढहा कर दोबारा वहां पौधारोपण नहीं किया जाता तब तक अपनी लड़ाई जारी रखुंगा।
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