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आपातकाल के 50 वर्ष : लघु सचिवालय परिसर में लगाई जागरूकता प्रदर्शनी
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मातृभाषा सत्याग्रही ईश्वर चंद ने किया प्रदर्शनी का शुभारंभ और लोकतंत्र के सत्याग्रहियों को नमन
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने पर आपातकाल के पीड़ितों को श्रद्धांजलि व सम्मान देने हेतु सूचना जनसंपर्क भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से लघु सचिवालय परिसर में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में स्लाइड्स के माध्यम से आपातकाल में लोकतंत्र पर हुए प्रहार से जुड़ी विभिन्न घटनाओं के संस्मरणों को प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शनी का शुभारंभ वर्ष 1957 में हुए हिंदी आंदोलन सत्याग्रही ईश्वर चंद ने किया। संयोगवश, इसी दिन उनका 85वां जन्मदिन भी था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस प्रयास के माध्यम से युवा पीढ़ी को वर्ष 1975 में लोकतंत्र को कुचलने के लिए आपातकाल लागू करने के उपरांत देश में उपजे हालातों के बारे में सटीक जानकारी मिलेगी। साथ ही लोकतंत्र को दोबारा स्थापित करने व संविधान की मर्यादा को बचाने वाले सत्याग्रहियों के संघर्ष के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। लोकतंत्र के सत्याग्रहियों को नमन करते हुए कहा कि भारत में संविधान की रक्षा के लिए आपके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।
इस प्रदर्शनी का उद्देश्य विशेषकर युवाओं को उस दौर की सच्चाई से अवगत कराना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। गुरुग्राम के साथ-साथ यह प्रदर्शनी पटौदी उपमंडल में भी लगाई जाएगी। पटौदी के उप मंडलीय सचिवालय में प्रदर्शनी का शुभारंभ 17 जुलाई से होगा। लघु सचिवालय परिसर गुरुग्राम में प्रदर्शनी सरल केंद्र व अन्य आवश्यक कार्य से आने वाले लोगों को अपनी ओर ध्यान आकर्षित कर रही है। प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को 50 वर्ष पहले जनता को संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने की घटना को जानने का अवसर मिल रहा है। इस अवसर पर सूचना सहायक सविता, सूचना केंद्र सहायक विश्वास सैनी, विजय रोहिल्ला, नरेंद्र, नीरज व अमित कुमार सहित अन्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
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अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। आपातकाल के 50 वर्ष पूर्ण होने पर आपातकाल के पीड़ितों को श्रद्धांजलि व सम्मान देने हेतु सूचना जनसंपर्क भाषा एवं संस्कृति विभाग की ओर से लघु सचिवालय परिसर में एक प्रदर्शनी का आयोजन किया गया। प्रदर्शनी में स्लाइड्स के माध्यम से आपातकाल में लोकतंत्र पर हुए प्रहार से जुड़ी विभिन्न घटनाओं के संस्मरणों को प्रदर्शित किया गया।
प्रदर्शनी का शुभारंभ वर्ष 1957 में हुए हिंदी आंदोलन सत्याग्रही ईश्वर चंद ने किया। संयोगवश, इसी दिन उनका 85वां जन्मदिन भी था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस प्रयास के माध्यम से युवा पीढ़ी को वर्ष 1975 में लोकतंत्र को कुचलने के लिए आपातकाल लागू करने के उपरांत देश में उपजे हालातों के बारे में सटीक जानकारी मिलेगी। साथ ही लोकतंत्र को दोबारा स्थापित करने व संविधान की मर्यादा को बचाने वाले सत्याग्रहियों के संघर्ष के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। लोकतंत्र के सत्याग्रहियों को नमन करते हुए कहा कि भारत में संविधान की रक्षा के लिए आपके योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता।
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इस प्रदर्शनी का उद्देश्य विशेषकर युवाओं को उस दौर की सच्चाई से अवगत कराना और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाना रहा। गुरुग्राम के साथ-साथ यह प्रदर्शनी पटौदी उपमंडल में भी लगाई जाएगी। पटौदी के उप मंडलीय सचिवालय में प्रदर्शनी का शुभारंभ 17 जुलाई से होगा। लघु सचिवालय परिसर गुरुग्राम में प्रदर्शनी सरल केंद्र व अन्य आवश्यक कार्य से आने वाले लोगों को अपनी ओर ध्यान आकर्षित कर रही है। प्रदर्शनी के माध्यम से लोगों को 50 वर्ष पहले जनता को संवैधानिक अधिकारों से वंचित करने की घटना को जानने का अवसर मिल रहा है। इस अवसर पर सूचना सहायक सविता, सूचना केंद्र सहायक विश्वास सैनी, विजय रोहिल्ला, नरेंद्र, नीरज व अमित कुमार सहित अन्य व्यक्ति भी उपस्थित रहे।
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