{"_id":"5c51e388bdec2273792f3c6d","slug":"41548870536-gurgaon-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"ऑपरेशन कर ईराकी सैनिक के पेट से निकाले बम के कण","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
ऑपरेशन कर ईराकी सैनिक के पेट से निकाले बम के कण
विज्ञापन
ऑपरेशन कर इराकी सैनिक के पेट से निकाले बम के कण
गुरुग्राम। सेक्टर- 43 स्थित पारस अस्पताल में एक इराकी सैनिक का ऑपरेशन कर उसके पेट से बम के कण निकाले गए। मरीज का अस्पताल में यह 22वां ऑपरेशन था। इससे पहले उसके ईराक और जॉर्डन आदि देशों में 21 ऑपरेशन हो चुके हैं। पारस अस्पताल के डॉक्टरों ने सफल सर्जरी कर पीड़ित को नया जीवनदान दिया।
वर्ष 2012 में आईएसआईएस द्वारा ईराक में किए गए बम धमाकों में 55 वर्षीय इराकी सैनिक अब्बास हसन घायल हो गए थे। बम धमाके से हसन के पेट का दाहिना हिस्सा फट गया था और उनकी आंतें पेट से बाहर निकल आई थीं। पिछले सात सालों में पीड़ित सैनिक की ईराक और जॉर्डन के अलावा कई देशों में 21 सर्जरी हुईं। उनकी आंतों को जाली लगाकर पेट के अंदर समेटा गया लेकिन बम के कुछ कण छोटी आंत और बड़ी आंत के बीच में फंसे होने के कारण पीड़ित को न सही से भूख लगती थी और मल भी पेट के अंदर ही रिस रहा था।
इलाज करने वाले पारस अस्पताल के डॉक्टर राकेश दुरखरे ने बताया कि मरीज का यहां 22वां ऑपरेशन किया गया है। उसके पेट से बम के छोटे कण निकाल दिए गए हैं। जिससे अब मरीज को भूख भी लग रही है और मल भी अपने रास्ते से ही बाहर निकल रहा है। मरीज की स्थिति अब बेहतर है और उसे अब किसी अन्य ऑपरेशन की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
---
विज्ञापन
गुरुग्राम। सेक्टर- 43 स्थित पारस अस्पताल में एक इराकी सैनिक का ऑपरेशन कर उसके पेट से बम के कण निकाले गए। मरीज का अस्पताल में यह 22वां ऑपरेशन था। इससे पहले उसके ईराक और जॉर्डन आदि देशों में 21 ऑपरेशन हो चुके हैं। पारस अस्पताल के डॉक्टरों ने सफल सर्जरी कर पीड़ित को नया जीवनदान दिया।
वर्ष 2012 में आईएसआईएस द्वारा ईराक में किए गए बम धमाकों में 55 वर्षीय इराकी सैनिक अब्बास हसन घायल हो गए थे। बम धमाके से हसन के पेट का दाहिना हिस्सा फट गया था और उनकी आंतें पेट से बाहर निकल आई थीं। पिछले सात सालों में पीड़ित सैनिक की ईराक और जॉर्डन के अलावा कई देशों में 21 सर्जरी हुईं। उनकी आंतों को जाली लगाकर पेट के अंदर समेटा गया लेकिन बम के कुछ कण छोटी आंत और बड़ी आंत के बीच में फंसे होने के कारण पीड़ित को न सही से भूख लगती थी और मल भी पेट के अंदर ही रिस रहा था।
विज्ञापन
इलाज करने वाले पारस अस्पताल के डॉक्टर राकेश दुरखरे ने बताया कि मरीज का यहां 22वां ऑपरेशन किया गया है। उसके पेट से बम के छोटे कण निकाल दिए गए हैं। जिससे अब मरीज को भूख भी लग रही है और मल भी अपने रास्ते से ही बाहर निकल रहा है। मरीज की स्थिति अब बेहतर है और उसे अब किसी अन्य ऑपरेशन की जरूरत नहीं है।
विज्ञापन
---