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सरकारी नौकरी का झांसा देकर 40 लाख ठगे
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गुरुग्राम। सरकारी नौकरी दिलाने का झांसा देकर 40 लाख रुपये ठग लिए। व्यक्ति ने अपने 4 भतीजों को सरकारी नौकरी दिलाने के लिए जमीन बेच दी। आरोपियों ने फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एफसीआई) में नौकरी के लिए फर्जी नियुक्ति पत्र भी दिया। पैसा लेने के लिए आरोपियों ने छत्तीसगढ़ बुलवाया। अब आरोपी फरार हैं। सोहना सदर थाना पुलिस ने शिकायत के आधार धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है।
सदर सोहना पुलिस को दी शिकायत में गांव दोहला निवासी श्याम सिंह ने बताया कि उनकी मुलाकात दिल्ली मंडी हाउस में कार्यरत अमित चपरासी से हुई थी। अमित ने उसे एक आईएएस के बारे में बताया। उसने फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में पद खाली होने का झांसा देकर अक्तूबर 2020 में निकेश पचपुते से मिलवाया। बातचीत के बाद उन्होंने बेटे के दस्तावेज मांगे।
श्याम सिंह ने अपने भतीजे अरुण, क्रुणाल, पुष्पेंद्र और सोनू के दस्तावेज भेज दिए। दस्तावेज देखने के बाद निकेश ने चारों को रायपुर छत्तीसगढ़ भेजने को कहा। वहां एफसीआई में एजी तीन पद पर नौकरी लगाने की बात कही। इन चारों को बातचीत के अनुसार 4-4 लाख रुपये देकर छत्तीसगढ़ भेज दिया। रायपुर के होटल मिडलैंड में पहुंचने पर उनकी मुलाकात कथित आईएएस आलोक कुमार महाजन व निकेश मिले, जिन्हें चारों ने 4-4 लाख रुपये नकद दे दिए। इसके बाद दोनों ने उन चारों को अप्वाइंटमेंट लेटर दिए और कहा कि दिवाली के बाद फोन पर बता देंगे। इसके बाद उन्हें वापस भेज दिया।
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इसके बाद श्याम की निकेश से बात होती रही। दिवाली के 20 दिन बाद निकेश के मांगने पर चारों युवक 5 लाख रुपये लेकर बिलासपुर गए। निकेश ने पुष्पेंद्र को पत्र दिया और अन्य तीनों का डाक से पत्र घर पहुंचने की बात कही। इसके बाद चारों युवक बिलासपुर से वापस गुरुग्राम आ गए। निकेश ने 13 लाख रुपये आलोक व अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करा दिया। इसके बाद फरवरी 2021 में निकेश व आलोक क्रेटा गाड़ी से ड्राइवर के साथ आए और उनसे 28 लाख रुपये लेकर चले गए। दोनों को दिए गए रुपये जमीन बेचकर व गिरवी रखकर लिए गए थे। इसके बाद भी आरोपियों ने उन्हें नौकरी नहीं दी। जब भी वह नौकरी पर बुलवाने की बात कहते तो आरोपी भरोसा दे देते। इसके बाद उन्हें अपने साथ ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस को शिकायत देकर मामला दर्ज कराया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।
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सदर सोहना पुलिस को दी शिकायत में गांव दोहला निवासी श्याम सिंह ने बताया कि उनकी मुलाकात दिल्ली मंडी हाउस में कार्यरत अमित चपरासी से हुई थी। अमित ने उसे एक आईएएस के बारे में बताया। उसने फूड कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में पद खाली होने का झांसा देकर अक्तूबर 2020 में निकेश पचपुते से मिलवाया। बातचीत के बाद उन्होंने बेटे के दस्तावेज मांगे।
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श्याम सिंह ने अपने भतीजे अरुण, क्रुणाल, पुष्पेंद्र और सोनू के दस्तावेज भेज दिए। दस्तावेज देखने के बाद निकेश ने चारों को रायपुर छत्तीसगढ़ भेजने को कहा। वहां एफसीआई में एजी तीन पद पर नौकरी लगाने की बात कही। इन चारों को बातचीत के अनुसार 4-4 लाख रुपये देकर छत्तीसगढ़ भेज दिया। रायपुर के होटल मिडलैंड में पहुंचने पर उनकी मुलाकात कथित आईएएस आलोक कुमार महाजन व निकेश मिले, जिन्हें चारों ने 4-4 लाख रुपये नकद दे दिए। इसके बाद दोनों ने उन चारों को अप्वाइंटमेंट लेटर दिए और कहा कि दिवाली के बाद फोन पर बता देंगे। इसके बाद उन्हें वापस भेज दिया।
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इसके बाद श्याम की निकेश से बात होती रही। दिवाली के 20 दिन बाद निकेश के मांगने पर चारों युवक 5 लाख रुपये लेकर बिलासपुर गए। निकेश ने पुष्पेंद्र को पत्र दिया और अन्य तीनों का डाक से पत्र घर पहुंचने की बात कही। इसके बाद चारों युवक बिलासपुर से वापस गुरुग्राम आ गए। निकेश ने 13 लाख रुपये आलोक व अपने बैंक अकाउंट में ट्रांसफर करा दिया। इसके बाद फरवरी 2021 में निकेश व आलोक क्रेटा गाड़ी से ड्राइवर के साथ आए और उनसे 28 लाख रुपये लेकर चले गए। दोनों को दिए गए रुपये जमीन बेचकर व गिरवी रखकर लिए गए थे। इसके बाद भी आरोपियों ने उन्हें नौकरी नहीं दी। जब भी वह नौकरी पर बुलवाने की बात कहते तो आरोपी भरोसा दे देते। इसके बाद उन्हें अपने साथ ठगी का अहसास हुआ। इसके बाद उन्होंने पुलिस को शिकायत देकर मामला दर्ज कराया है। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है।