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Gurugram News: जीएमडीए के आईसीसीसी से जुड़ेंगे शहर में लगने वाले पीजोमीटर
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भूमिगत जलस्तर की निगरानी के लिए लगेंगे 25 पीजोमीटर
स्वचालित पीजोमीटर को जीएमडीए के इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। घटते भूमिगत जलस्तर की निगरानी के लिए अलग-अलग स्थानों पर लगने वाले 25 स्वचालित पीजोमीटर को गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमडीए) के इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (आईसीसीसी) से जोड़ा जाएगा। इससे भूमिगत जल स्तर के स्तर और इसकी कमी से संबंधित डेटा की मैपिंग की जा सकेगी।
इसकी सहमति जीएमडीए की कोर प्लानिंग सेल की बैठक में बनी। मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा की मौजूदगी में बैठक में कहा गया कि इस संबंध में जल विज्ञान विभाग से तकनीकी जानकारी और विवरण मांगा जा सकता है। अतिरिक्त सीईओ सुभाष यादव ने बताया कि एक पीजोमीटर की कीमत करीब तीन लाख रुपये है। इन्हें नगरीय क्षेत्र में दो किमी के दायरे में और ग्रामीण क्षेत्र में पांच किमी के दायरे में लगाने की योजना है। बताया गया कि शहरी क्षेत्र में भी इसका दायरा बढ़ा कर पांच किमी तक किया जा सकता है।
मीणा ने कहा कि पीजोमीटर के अलावा भूजल स्तर को सुधारने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग को भी जांचने के आदेश दिए हैं। शहर में अलग-अलग स्थानों पर 406 हार्वेस्टिंग प्वाइंट थे। इनमें से 267 ठीक थे, शेष को ठीक कराने के लिए कहा है। इसके अलावा रेन वाटर हार्वेस्टिंग के प्वाइंट का विवरण बेवसाइट पर भी डालने को कहा है। इनके संबंध में लोगों के विभाग तक जानकारी पहुंचाने के लिए ईमेल आईडी और व्हाट्सएप नंबर भी जारी किए जाएं। आवासीय सोसाइटियों में जो भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्वाइंट हैं, उनका ठीक से काम करना भी सुनिश्चित किया जाए।
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स्वचालित पीजोमीटर को जीएमडीए के इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर से जोड़ा जाएगा
अमर उजाला ब्यूरो
गुरुग्राम। घटते भूमिगत जलस्तर की निगरानी के लिए अलग-अलग स्थानों पर लगने वाले 25 स्वचालित पीजोमीटर को गुरुग्राम मेट्रोपॉलिटन डेवलपमेंट अथॉरिटी (जीएमडीए) के इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (आईसीसीसी) से जोड़ा जाएगा। इससे भूमिगत जल स्तर के स्तर और इसकी कमी से संबंधित डेटा की मैपिंग की जा सकेगी।
इसकी सहमति जीएमडीए की कोर प्लानिंग सेल की बैठक में बनी। मुख्य कार्यकारी अधिकारी पीसी मीणा की मौजूदगी में बैठक में कहा गया कि इस संबंध में जल विज्ञान विभाग से तकनीकी जानकारी और विवरण मांगा जा सकता है। अतिरिक्त सीईओ सुभाष यादव ने बताया कि एक पीजोमीटर की कीमत करीब तीन लाख रुपये है। इन्हें नगरीय क्षेत्र में दो किमी के दायरे में और ग्रामीण क्षेत्र में पांच किमी के दायरे में लगाने की योजना है। बताया गया कि शहरी क्षेत्र में भी इसका दायरा बढ़ा कर पांच किमी तक किया जा सकता है।
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मीणा ने कहा कि पीजोमीटर के अलावा भूजल स्तर को सुधारने के लिए रेन वाटर हार्वेस्टिंग को भी जांचने के आदेश दिए हैं। शहर में अलग-अलग स्थानों पर 406 हार्वेस्टिंग प्वाइंट थे। इनमें से 267 ठीक थे, शेष को ठीक कराने के लिए कहा है। इसके अलावा रेन वाटर हार्वेस्टिंग के प्वाइंट का विवरण बेवसाइट पर भी डालने को कहा है। इनके संबंध में लोगों के विभाग तक जानकारी पहुंचाने के लिए ईमेल आईडी और व्हाट्सएप नंबर भी जारी किए जाएं। आवासीय सोसाइटियों में जो भी रेन वाटर हार्वेस्टिंग प्वाइंट हैं, उनका ठीक से काम करना भी सुनिश्चित किया जाए।
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