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गुरुग्राम में 206 एक्यूआई दर्ज, बढ़ी परेशानी
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गुरुग्राम। उद्योगों में काम काज में तेजी आने और मौसम में बदलाव के साथ ही प्रदूषण भी बढ़ने लगा है। शनिवार को जिले में समग्र वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 206 पर पहुंच गया, जिससे अब सांसों पर भी संकट गहराने लगा है। प्रदूषण बढ़ने के कारण सबसे ज्यादा समस्या बुजुर्गों को होती है, जिसको देखते हुए अस्पतालों में भी डॉक्टर मरीजों को अनिवार्य रूप से मास्क पहनने की सलाह दे रहे हैं।
जिले में कोरोना संक्रमण कम होने के कारण उद्योगों में भी काम काज तेज होने लगा है। वहीं शहर में रुके हुए विकास और निर्माण कार्यों ने भी तेजी पकड़ ली है। जिसकी वजह से प्रदूषण बढ़ना स्वाभाविक है। प्रदूषण में बढ़ोतरी का आलम यह है कि महज एक सप्ताह में ही एक्यूआई पर प्रदूषण बढ़कर 100 से 200 एसपीएम तक पहुंच गया।
एक्यूआई 100 से कम रहने पर वायु गुणवत्ता की स्थिति संतोषजनक मानी जाती है। जबकि इससे ऊपर होने पर वायुमंडल में प्रदूषण बढ़ने का संकेत होता है। शनिवार को मानेसर में स्थिति ज्यादा ही खराब रही जहां एक्यूआई 210 रहा जबकि शहर का सेक्टर-51 इलाका सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा। यहां एक्यूआई पर प्रदूषण 235 एसपीएम दर्ज किया गया। प्रदूषण के लिहाज से फरीदाबाद का बल्लभगढ़ सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाका रहा, जहां एक्यूआई पर प्रदूषण 330 एसपीएम दर्ज किया गया।
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नहीं हो रहा पानी का छिड़काव
प्रदूषण में बढ़ोतरी को देखते हुए ईपीसीए (एनवायरमेंट पोल्यूशन कंट्रोल अथॉरिटी) के निर्देश पर जिला प्रशासन ने भी ऐक्शन प्लान लागू कर दिया है। बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों के द्वारा धूलभरी सड़कों पर पानी के छिड़काव समेत अन्य कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उद्योगों में जनरेटर व ढाबों में कोयले इत्यादि का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।
पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि शुरुआत में की गई अनदेखी बाद में भारी पड़ती है और प्रदूषण में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही किया जा रहा है। सेक्टर-10, महावीर चौक समेत शहर की अन्य खस्ताहाल सड़कों पर नियमित रूप से पानी के छिड़काव की जरूरत है लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।
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जिले में कोरोना संक्रमण कम होने के कारण उद्योगों में भी काम काज तेज होने लगा है। वहीं शहर में रुके हुए विकास और निर्माण कार्यों ने भी तेजी पकड़ ली है। जिसकी वजह से प्रदूषण बढ़ना स्वाभाविक है। प्रदूषण में बढ़ोतरी का आलम यह है कि महज एक सप्ताह में ही एक्यूआई पर प्रदूषण बढ़कर 100 से 200 एसपीएम तक पहुंच गया।
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एक्यूआई 100 से कम रहने पर वायु गुणवत्ता की स्थिति संतोषजनक मानी जाती है। जबकि इससे ऊपर होने पर वायुमंडल में प्रदूषण बढ़ने का संकेत होता है। शनिवार को मानेसर में स्थिति ज्यादा ही खराब रही जहां एक्यूआई 210 रहा जबकि शहर का सेक्टर-51 इलाका सबसे ज्यादा प्रदूषित रहा। यहां एक्यूआई पर प्रदूषण 235 एसपीएम दर्ज किया गया। प्रदूषण के लिहाज से फरीदाबाद का बल्लभगढ़ सबसे ज्यादा प्रदूषित इलाका रहा, जहां एक्यूआई पर प्रदूषण 330 एसपीएम दर्ज किया गया।
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नहीं हो रहा पानी का छिड़काव
प्रदूषण में बढ़ोतरी को देखते हुए ईपीसीए (एनवायरमेंट पोल्यूशन कंट्रोल अथॉरिटी) के निर्देश पर जिला प्रशासन ने भी ऐक्शन प्लान लागू कर दिया है। बावजूद इसके जिम्मेदार विभागों के द्वारा धूलभरी सड़कों पर पानी के छिड़काव समेत अन्य कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। उद्योगों में जनरेटर व ढाबों में कोयले इत्यादि का भी धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।
पिछले वर्षों के आंकड़े बताते हैं कि शुरुआत में की गई अनदेखी बाद में भारी पड़ती है और प्रदूषण में बेतहाशा बढ़ोतरी देखने को मिलती है। इस बार भी कुछ ऐसा ही किया जा रहा है। सेक्टर-10, महावीर चौक समेत शहर की अन्य खस्ताहाल सड़कों पर नियमित रूप से पानी के छिड़काव की जरूरत है लेकिन ऐसा नहीं किया जा रहा है।