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Delhi NCR News: छात्र का आधार-पैन का इस्तेमाल कर 26 करोड़ की जीएसटी की हेराफेरी
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त्रिनगर इलाके की घटना, फर्म ने किया 26 करोड़ रुपये के लेन-देन
-इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने पर छात्र को पता चला
-छात्र की शिकायत पर पुलिस मामला दर्ज कर जांच शुरू की
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उत्तरी–पश्चिमी जिला के त्रिनगर इलाके में एक छात्र के पैन और आधार कार्ड के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। जालसाजों ने छात्र के दस्तावेज से फर्म बनाकर करीब 26 करोड़ रुपये के कारोबार का फर्जी रिकार्ड तैयार कर लिया। धोखाधड़ी का पता तब चला जब छात्र ने अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया। रिटर्न भरते समय उसे आयकर विभाग के पोर्टल पर अपने नाम से जुड़ा लगभग 26 करोड़ रुपये का जीएसटी टर्नओवर देकर छात्र हैरान रह गया और इसकी शिकायत पुलिस में की। साइबर सेल ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
छात्र ने साइबर सेल में दर्ज प्राथमिकी में बताया कि जीएसटीएन पोर्टल पर जांच करने पर पता चला कि 10 जून 2024 को उसके नाम पर एक फर्म को रजिस्टर किया है। यह फर्म कई महीनों तक एक्टिव रही और 31 दिसंबर 2024 को उसकी जानकारी के बिना ही रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। ऑफिशियल पोर्टल से प्राप्त दस्तावेजों में दर्ज जानकारी से स्पष्ट है कि इस अवधि के दौरान फर्म का इस्तेमाल कथित रूप से कई करोड़ रुपये के जीएसटी ट्रांजैक्शन करने के लिए किया गया।
पुलिस ने शिकायत दर्ज करने के बाद मामले की जांच शुरू की है। पुलिस सबसे पहले इस बात की जांच कर रही है कि किसने छात्र के दस्तावेज का इस्तेमाल किया। पुलिस तकनीकी जांच कर उन बैंक खातों और मोबाइल नंबर की जांच कर रही है, जिसे आरोपियों ने इस्तेमाल किया है।
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-इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने पर छात्र को पता चला
-छात्र की शिकायत पर पुलिस मामला दर्ज कर जांच शुरू की
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। उत्तरी–पश्चिमी जिला के त्रिनगर इलाके में एक छात्र के पैन और आधार कार्ड के दुरुपयोग का मामला सामने आया है। जालसाजों ने छात्र के दस्तावेज से फर्म बनाकर करीब 26 करोड़ रुपये के कारोबार का फर्जी रिकार्ड तैयार कर लिया। धोखाधड़ी का पता तब चला जब छात्र ने अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल किया। रिटर्न भरते समय उसे आयकर विभाग के पोर्टल पर अपने नाम से जुड़ा लगभग 26 करोड़ रुपये का जीएसटी टर्नओवर देकर छात्र हैरान रह गया और इसकी शिकायत पुलिस में की। साइबर सेल ने मामला दर्ज कर जांच शुरू की है।
छात्र ने साइबर सेल में दर्ज प्राथमिकी में बताया कि जीएसटीएन पोर्टल पर जांच करने पर पता चला कि 10 जून 2024 को उसके नाम पर एक फर्म को रजिस्टर किया है। यह फर्म कई महीनों तक एक्टिव रही और 31 दिसंबर 2024 को उसकी जानकारी के बिना ही रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया। ऑफिशियल पोर्टल से प्राप्त दस्तावेजों में दर्ज जानकारी से स्पष्ट है कि इस अवधि के दौरान फर्म का इस्तेमाल कथित रूप से कई करोड़ रुपये के जीएसटी ट्रांजैक्शन करने के लिए किया गया।
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पुलिस ने शिकायत दर्ज करने के बाद मामले की जांच शुरू की है। पुलिस सबसे पहले इस बात की जांच कर रही है कि किसने छात्र के दस्तावेज का इस्तेमाल किया। पुलिस तकनीकी जांच कर उन बैंक खातों और मोबाइल नंबर की जांच कर रही है, जिसे आरोपियों ने इस्तेमाल किया है।
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