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Ghaziabad News: तुम मुझे डॉक्टर को दिखाकर पागल घोषित कर दोगे
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गाजियाबाद। विनोद की बहन बीना मुजफ्फरनगर में रहती हैं। बीना ने पुलिस को बताया कि विनोद बीमारी के कारण परेशान रहने लगे थे। कुछ समय पहले उन्हें किडनी और लीवर का इंफेक्शन हो गया। दवाइयां खाकर वह परेशान रहने लगे। वह घर में बोलते थे वह मर जाएगा। उन्होंने विनोद को मनोचिकित्सक को भी दिखाया तो विनोद कहने लगा कि तुम मुझे पागलों के डॉक्टरों को दिखाकर पागल घोषित कर दोगे और अस्पताल में भर्ती करा दोगे।
सूचना मिलने पर मुजफ्फरनगर से महेंद्रा एंक्लेव पहुंची बहन बीना का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। रोते हुए बोली कि विनोद का दिल्ली और मुजफ्फरनगर में अलग-अलग चिकित्सकों से इलाज चल रहा था। वह भाई को समझाती रहती थी कि सब ठीक हो जाएगा। बीना ने बताया कि उन्हें जरा भी अंदेशा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेंगे। कई बार वह पत्नी के साथ मरने की बात कहते थे। पुलिस ने बताया कि विनोद पूर्व में गंगनहर पर भी जाकर पूर्व में कई बार जान देने की कोशिश कर चुके हैं। जिन्हें परिजन व पड़ोसियों ने बचाया था। एसीपी कविनगर अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है। (संवाद)
बहन बोली- मैं रुक जाती तो शायद भाई दवाई खानी शुरू कर देता
बीना ने पुलिस को बताया कि विनोद के लिए दिमाग शांत करने की दवा चिकित्सक ने दी थी। विनोद उन्हें नहीं खाते थे। वह उनकी बात मानते थे। अगर वह रुक जाती तो शायद वह दवाई खानी शुरू कर देते और यह नहीं होता।
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सूचना मिलने पर मुजफ्फरनगर से महेंद्रा एंक्लेव पहुंची बहन बीना का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। रोते हुए बोली कि विनोद का दिल्ली और मुजफ्फरनगर में अलग-अलग चिकित्सकों से इलाज चल रहा था। वह भाई को समझाती रहती थी कि सब ठीक हो जाएगा। बीना ने बताया कि उन्हें जरा भी अंदेशा नहीं था कि वह इतना बड़ा कदम उठा लेंगे। कई बार वह पत्नी के साथ मरने की बात कहते थे। पुलिस ने बताया कि विनोद पूर्व में गंगनहर पर भी जाकर पूर्व में कई बार जान देने की कोशिश कर चुके हैं। जिन्हें परिजन व पड़ोसियों ने बचाया था। एसीपी कविनगर अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि शवों का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है। (संवाद)
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बहन बोली- मैं रुक जाती तो शायद भाई दवाई खानी शुरू कर देता
बीना ने पुलिस को बताया कि विनोद के लिए दिमाग शांत करने की दवा चिकित्सक ने दी थी। विनोद उन्हें नहीं खाते थे। वह उनकी बात मानते थे। अगर वह रुक जाती तो शायद वह दवाई खानी शुरू कर देते और यह नहीं होता।
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