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मालिनी अवस्थी के लोक गीतों पर झूमे दर्शक

Sat, 19 Nov 2016 11:23 PM IST
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद
ब्यूरो , अमर उजाला गाजियाबाद Updated Sat, 19 Nov 2016 11:23 PM IST
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Visits to the folk songs of Malini Awasthi Jume
मा‌लिनी अवस्थी - फोटो : अमर उजाला

हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले के तीसरे दिन शनिवार को कन्या वंदन, मातृ सम्मेलन और लोक संगीत का कार्यक्रम हुआ। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण लोक गायिका पदम श्री मालिनी अवस्थी द्वारा प्रस्तुत किए गए लोक गीत रहे। देर शाम मालिनी अवस्थी ने स्टेज से अमीर खुसरो की रचना ‘काहे को भये विदेश...’ गाना शुरू किया तो दर्शक झूम उठे।

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उनके प्रत्येक गीत पर जमकर तालियां बजीं। इसके बाद मालिनी अवस्थी ने ‘बनरा बुलाए..बन्नी नहीं आवे..चली आओ बनरी री...अटरिया सूनी पड़ी,  गाया तो दर्शक मग्न होकर नाचने लगे। उन्होंने नोटबंदी पर भी गीत सुनाया... गजब कीन्हों रे सरकार, ओ रामा कैसे सपरी... रुपया हो गईल पुरान, हो रामा कैसे सपरी , सुनाकर लोगों को झूमने पर मजबूर कर दिया।
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कविनगर रामलीला ग्राउंड में चल रहे हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला में कन्या वंदन में 450 छात्र-छात्राएं शामिल रहे। मुख्य अतिथि महामंडलेश्वर साध्वी मैत्री गिरि और राष्ट्रीय सेवा भारती की रेणु पाठक के सानिध्य में बालकों ने बालिकाओं के गंगाजल से पैर धोए उसके बाद तिलक लगाकर श्रीफल और दक्षिणा देकर कन्या वंदन संपन्न किया।
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इस मौके पर रेणु पाठक ने कहा कि आजकल समाज में अराजकता फैली हुई है। कहीं महिलाएं व्यभिचार का शिकार हो रही हैं, तो कहीं कन्याओं की भ्रूण में ही हत्या की जा रही है। इन सबके मूल में  संस्कृति का पतन दिख रहा है। मेले में हिंदू संस्कृति को दोबारा स्थापित करने का प्रयास हो रहा है जो सराहनीय है।


इससे पहले दोपहर में मातृ सम्मेलन का आयोजन हुआ जिसमें 800 महिलाएं शामिल रहीं। इसमें कनखल से साध्वी संतोषी माता और दिव्य ज्योति जागृति मिशन की साध्वी श्वेता भारती मुख्य रूप से शामिल रहीं। साध्वी संतोषी ने कहा कि एक भजन की पंक्तियां हैं कि... पूत कपूत सुने हैं पर माता सुनी न कुमाता..।


इसलिए मातृ शक्ति की महत्ता हर काल में रही है। इस मौके पर मुख्य रूप से सचिव सुशील कुमार, उपाध्यक्ष एवं मेला प्रभारी ललित जायसवाल, अध्यक्ष डॉ. दिनेश अरोड़ा, डॉ. मधु पोद्दार, विपिन त्यागी और अश्वनी शर्मा आदि मौजूद रहे।

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